Sunday, 31 May 2020

गीत-सरसी छंद

सरसी छंद गीत

मस्तुरिया जी सान राज के,नेक रहिन इंसान।
मानवता के पाठ पढ़ायिन,सुग्घर जम्मो गान।
(1)
संग चलव रे गीत ल गाके,सुग्घर दिन संदेश।
दीन दुखी के संग चलव रे,कहिन मिटादव क्लेश।
छत्तीसगढ़ म सोना जइसन,नायक के पहिचान।
मस्तुरिया जी सान राज के,नेक रहिन इंसान।

(2)
आशा आस्था उमंग साहस,युवा गीत के बोल।
छत्तीसगढ़ी भाखा सुग्घर,ज्ञान दिहिन अनमोल।
चंदैनी गोंदा मा कह दिन,हवे अधार किसान।
मस्तुरिया जी सान राज के,नेक रहिन इंसान।

(3)
रंगमंच के नायक राहिन,कला रहिस भरमार।
ए भुइयाँ मा हीरा जइसन,बेटा के अवतार।
वर्तमान मा ज्ञान दान हा,हमर हवे अभिमान।
मस्तुरिया जी सान राज के,नेक रहिन इंसान।

(4)
हमर राज के नेक धरोहर,गला म खूब मिठास।
जन ला नित संदेश दिहिन जी,अंतस भर विश्वास।
छत्तीसगढ़ी लेखन धारा,अमिट राज सम्मान।
मस्तुरिया जी सान राज के,नेक रहिन इंसान।

रचनाकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

रोला छंद-किसान

रोला छंद - आशा आजाद

किसान के पीरा

देखौ हमर किसान,देव जम्मो कहिलाथे।
ए भुइयाँ मा आज,काज के गुन ला गाथे।
उपजावै नित अन्न,करय जन सेवा जानौ।
भुइयाँ के भगवान,करम ला जम्मो मानौ।।

करथे मेहनत रोज,घाम ला नित सहिथे जी।
पीरा हवय अपार,दरद ला बड़ रहिथे जी।
दुख के हे भरमार,आज नइ होय गुजारा।
सुनै नही सरकार,खेत हा हवय अधारा।

कलपत आज किसान,खातु बर पइसा नइ हे।
बेचत हावै खेत,अबड़ माते करलइ हे।
देखौ मरत किसान,हवय ओखर दुख भारी।
कइसे बनय अधार,कतक हावै लाचारी।।

लागा करजा खूब,बोझ कइसे ग छुटाही।
रोवत बिलखत रोज,मिलत नइ हे कुछु काही।
चुप्पे हे सरकार,ध्यान नइ अब ता लेवै।
उपजे हावै धान,मोल ओखर नइ देवै।

राखे साहूकार,ब्याज ला नित लेवत हे।
कम देवै जी धान,काट अधिहा देवत हे।
तरसय घर परिवार,मार के मन ला रखथे।
शिक्षा कइसे पाय,ज्ञान ला अबड़ तरसथे।।

सुग्घर खेती होय,बीज अब कति ले आही।
करै सिचाई रोज,सुघर जी पानी चाही।
बिगड़त हे हालात,अन्न अब कम होवत है।
जम्मो आज किसान,अबड़ दुख मा रोवत हे।।

नावा हे तकनीक,लाभ मिलही अब कइसे।
होवत तंग गरीब,चलय घर जइसे तइसे।
सुग्घर करौ उपाय,चैन ला लाना होही।
सुध लेवै सरकार,नही ता नित ओ रोही।

छंदकार - आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़




Tuesday, 5 May 2020

आलेख,कोरोना संकट अउ पर्यावरण

आलेख
कोरोना संकट अउ पर्यावरण

आज कोरोना वायरस ले जनमिस महामारी हा वैश्विक समाज अउ प्रशासन के जम्मो कमजोरी ला उजागर कर दिहिस हे अउ संगे संग ए खतरनाक संकट ले आधू बढ़े के डहर घलो देखाइस हे ।कोविड 19 के ये खतरनाक बीमारी जेन समय के पहिली मनखे के जिनगी मा हावी होगे हावै,अइसन संकट जेन मानव जाति ला क्षिन भर मा नष्ट कर सकत हे ये संकट मानव जिनगी ला आर्थिक विकास,सामाजिक,राजनीतिक जम्मो डहर ले प्रभावित करत जात हे।ते पाय लाकडाउन हा लंबा समय तक अइसनहे बने रहि त दुनिया मा निराशा,तनाव,चिंता जइसन गंभीर मानसिक बीमारी के बाढ़ आ जाही जेन व्यक्तिगत के साथ साथ दुनिया मा सामाजिक, आर्थिक विकास मा बाधा उत्पन्न हो जाही।कोरोना बीमारी के प्रभाव ले कम अउ आर्थिक समस्या के भार ले मानुष के मनोदशा बिगड़ जाही।
ये कोरोना काल विश्व बर एक अइसे संकट हे जेन भविष्य ला सोचे बर मजबूर कर दिये हे, कोरोना वायरस के संक्रमण ले पूरा दुनिया मानो थम से गये हे स्कूल-कॉलेज अउ यात्रा मा पाबंदी, मनखे के एक जगा इकट्ठा होय मा पाबंदी,ए जम्मो पाबंदी ले मनखे कोनो न कोनो रुप मा प्रभावित होत हे। एहा एक बीमारी के खिलाफ बेजोड़ वैश्विक प्रतिक्रिया हे। प्रश्न ये उठत हे के का लाकडाउन हा खतम हो जाही ओखर बाद भी मनखे हा का अपन पुराना दिनचर्या अउ कोरोना के डर ले साधारण जिनगी ला अपना पाही....?
का लाकडाउन ले जेन अर्थव्यवस्था आज मानो थम गये हे ओला भुलाके सुग्घर जिनगी जी पाही..?
दूसर पक्ष मा ए लंबा समय तक अइसे स्थिति बने रही अउ पाबंदी लगे रही त सामाजिक और आर्थिक नुकसान विध्वंसकारी हो जाही। प्रतिबंध समाप्त होय म घलो मानव जिनगी मा ये संकट बरोबर बने रही। संकट ले संक्रमित होय के कारण अनजान मनखे के रोग प्रतिरोधक शक्ति घलो बढ़ सकत हे फेर अइसन होय मा बहुत समय लग सकत हे। एखर लिए हमला सतर्कता के ध्यान रखके हमला दूसर के स्वास्थ्य मा घलो ध्यान देहे ला परही जेखर ले हम ए संकट ले लड़े बर कुछ भागीदारी निभा सकथन।
ये संकट हा अतका जल्दी समाप्त होय के कगार म नइ दिखत हे एखर लिए वैक्सीन बन जाही तभो ले हमला सावधानी अपनाये ल परही,सावधानी ले जिनगी बिताना परही। फेर दू साल तक ए लाकडाउन रही त देश के एक बड़े हिस्सा संक्रमित हो जाही।

विकास के अंधा दउड़ मा भुइँया अउ पर्यावरण के हमन जेन हाल करे हन ओ बीते चार दशक मा चिंता के विषय बने हुए हे फेर विकसित देश अपन जिम्मेदारी निभाये के अलावा विकासशील देश मन बर हावी होवत हे अउ विकासशील देश घलोक विकसित देश मन के डहर मा रेंगत हे अउ पर्यावरण ला नष्ट करत जात हे। पृथ्वी सम्मेलन के 28 साल बाद भी हालात जस के तस रहिस। अइसन लागथे फेर कोरोना महामारी ह विश्व के मनखे मन ला स्वस्थ होय के अवसर दे दिये हे।हवा के जहर कम होगे हावै अउ नदियाँ के जल निर्मल होगे हे।भारत मा जेन गंगा ला साफ करे के अभियान कई साल ले चलत आत हे बीते 5 साल मा लगभग 20000 करोड़ रुपया खर्च करिन हावै तभो ले साधारण सफलता तक नइ दिख पाइस हे। उही गंगा हा लॉकडाउन मा निर्मल बना दिहिस हे।वइसनहे चंडीगढ़ के हिमाचल मा हिमालय के चोटी घलोक दिखे लागे हे । औद्योगिक आय के दर हा जरूर सात फ़ीसदी ले दू फ़ीसदी मा आ गिरीस हे, अर्थव्यवस्था खतरा मा हे,लेकिन इही समय हे के पूरा दुनिया पर्यावरण अउ विकास के संतुलन बर उतके गंभीरता अउ गहराई ले सोचही जतका आज कोरोना संकट ले निपटे के सोचत हावै।

आशा आजाद
मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़