गीत - दाई ले संसार
ईश्वर के अवतार दाई हे जिनगी के आधार ।
मया बाँटथे निर्मल मन ले एखर ले संसार ।।
सुघ्घर घर ला राखय दाई सुघ्घर जम्मो काम ।
भाव धरय नित सेवा के ओ दाई चारो धाम ।
पालन पोषण नित करय जी ओखर ले उद्धार ।
ईश्वर के अवतार दाई हे जिनगी के आधार ।।
जीव धरय नौ माह कोख मा मिले जन्म ले नाम ।
दूध धार ले तृप्त करय ओ सत सत हवे प्रणाम ।
जिम्मेदारी सदा निभावय दय सुघ्घर व्यवहार ।
ईश्वर के अवतार दाई हे जिनगी के आधार ।।
घर ममहाथे जइसे तुलसी घर के चारो ओर ।
मया बरोबर दाई बाँटथे नाता रखे बटोर ।
अपन ज्ञान ले करथे दाई घर ला नित अंजोर ।
ईश्वर के अवतार दाई हे जिनगी के आधार ।।
कलयुग मा बस एक दाई हे बाँटय मया समान ।
करुणा के मूरत कहलावै राखय सुघ्घर ज्ञान ।
करम धरम ले मुख नइ मोड़िस कतको होवय भार ।
ईश्वर के अवतार दाई हे जिनगी के आधार ।।
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