रोला छंद - आशा आजाद
किसान के पीरा
देखौ हमर किसान,देव जम्मो कहिलाथे।
ए भुइयाँ मा आज,काज के गुन ला गाथे।
उपजावै नित अन्न,करय जन सेवा जानौ।
भुइयाँ के भगवान,करम ला जम्मो मानौ।।
करथे मेहनत रोज,घाम ला नित सहिथे जी।
पीरा हवय अपार,दरद ला बड़ रहिथे जी।
दुख के हे भरमार,आज नइ होय गुजारा।
सुनै नही सरकार,खेत हा हवय अधारा।
कलपत आज किसान,खातु बर पइसा नइ हे।
बेचत हावै खेत,अबड़ माते करलइ हे।
देखौ मरत किसान,हवय ओखर दुख भारी।
कइसे बनय अधार,कतक हावै लाचारी।।
लागा करजा खूब,बोझ कइसे ग छुटाही।
रोवत बिलखत रोज,मिलत नइ हे कुछु काही।
चुप्पे हे सरकार,ध्यान नइ अब ता लेवै।
उपजे हावै धान,मोल ओखर नइ देवै।
राखे साहूकार,ब्याज ला नित लेवत हे।
कम देवै जी धान,काट अधिहा देवत हे।
तरसय घर परिवार,मार के मन ला रखथे।
शिक्षा कइसे पाय,ज्ञान ला अबड़ तरसथे।।
सुग्घर खेती होय,बीज अब कति ले आही।
करै सिचाई रोज,सुघर जी पानी चाही।
बिगड़त हे हालात,अन्न अब कम होवत है।
जम्मो आज किसान,अबड़ दुख मा रोवत हे।।
नावा हे तकनीक,लाभ मिलही अब कइसे।
होवत तंग गरीब,चलय घर जइसे तइसे।
सुग्घर करौ उपाय,चैन ला लाना होही।
सुध लेवै सरकार,नही ता नित ओ रोही।
छंदकार - आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़
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Sunday, 31 May 2020
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