चौपाई छंद-छंद के छ
छंद छ के मैं बात बतावौं।सुग्घर ओखर गुन ला गावौं।
गुरुगुल ये कक्षा कहलावै।रहि रहि निसदिन गुन ला गावै।।
छंद छ के सब नींव ल जानौ।दो हजार सोलह हे मानौ।
जिला भिलाई के गुन गावै।पहल उहा ले होये हावै।।
छंद ज्ञान गुरु नांव धरौं जी।अरुण निगम के पाँव परौं जी।
हिरदे निरमल बोलै बानी।छंद विधा के ओहे ज्ञानी।।
छंद साधना रोज करै जी।ज्ञान ध्यान अनमोल धरै जी।
साधक मन के गुन हे भारी।छंद ज्ञान हावै हितकारी।।
छंद आनलाइन मा होवै।कक्षा मा सब निसदिन खोवै।
नियम धरम के पालन होथे।सीखय नइ ओ कक्षा खोथे।।
छंद म नइ हे लापरवाही।कक्षा ले बाहिर ओ जाही।
होवै गुरुकुल ले उजियारा।साधक मन के हावै प्यारा।।
छंद गीत अउ सुग्घर गोष्ठी।भरथे छंद खजाना कोठी।
जिनिस जिनिस के छंद लिखाये।सबके मन ला अब्बड़ भाये।।
छंद सीखना अब्बड़ भारी।बनथे गुरु सब बारी बारी।
सुग्घर हावै भाईचारा।दीदी भैया इही अधारा।।
छंद हवे छत्तीसगढ़ी ये।पढ़ही सब अगला पीढ़ी ये।
जुग जुग के हवे चिन्हारी।छत्तीसगढ़ ह हे महतारी।।
आशा आजाद"कृति"
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