Friday, 8 November 2019

विधाता छंद

विधाता छंद 122×4

जिहाँ कलकल बहय नदियाँँ,उही हा राज हमर हावै।
जिहाँ हे मीठ रस भाखा,उही हा मान हमर हावै,
कहयँ छत्तीसगढ़ माटी,बड़ा ममहात राहय जी,
जिहाँ हे धान के कोठी,उही हा शान हमर हावै।।

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