सरसी छंद गीत-श्रीमती आशा आजाद
मस्तुरिया जी सान राज के,
नेक रहिन इंसान।
मानवता के पाठ पढ़ायिन,
गुण के राहिन खान।
(1)
संग चलव रे गीत ल गाके,
सुग्घर दिन संदेश।
दीन दुखी के संग चलव रे,
कहिन मिटादव क्लेश।
छत्तीसगढ़ म सोना जइसन,
नायक के पहिचान।
मस्तुरिया जी सान राज के,
नेक रहिन इंसान।
(2)
आशा आस्था उमंग साहस,
युवा गीत के बोल।
छत्तीसगढ़ी भाखा सुग्घर,
ज्ञान दिहिन अनमोल।
चंदैनी गोंदा मा कह दिन,
हे किसान भगवान।
मस्तुरिया जी सान राज के,
नेक रहिन इंसान।
(3)
रंगमंच के नायक राहिन,
कला रहिस भरमार।
ए भुइयाँ मा हीरा जइसन,
बेटा के अवतार।
वर्तमान मा ज्ञान दान हा,
हमर बनिस अभिमान।
मस्तुरिया जी सान राज के,
नेक रहिन इंसान।
(4)
हमर राज के नेक धरोहर,
गला म खूब मिठास।
जन ला नित संदेश दिहिन जी,
अंतस भर विश्वास।
छत्तीसगढ़ी लेखन धारा,
अमिट राज सम्मान।
मस्तुरिया जी सान राज के,
नेक रहिन इंसान।
रचनाकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़
Friday, 8 November 2019
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
-
भारत सुग्घर देश हवय जी,भ्रूण नाश हत्या रोकौ। बेटी के सब मान रखौ जी,दोष बिना झन ता झोकौ।। बेटी सुग्घर घर ला राखय,मान सबो के जाने जी। घर क...
-
त्रिभंगी छंद - श्रीमती आशा आजाद लक्ष्मण मस्तुरिया,गीत रचइया,देश राज सब,छोड़ दिये। सुग्घर सब बानी,अमिट कहानी,सुग्घर तँय हा,राज किये। अमरित ला...
-
फैसन बने हे फोन गा,दिनभर करे हे बात जी। घूमत हवय बतियात हे,देखय नही दिन रात जी।। चेटिंग करे दिनभर धरे,मेसेज सब कतका करे। महिला धरे सब दे...
No comments:
Post a Comment