Friday, 8 November 2019
प्रदीप छंद-गीत
प्रदीप छंद-16-11-पदांत-212
विषय-बिगड़त हावय आज देखलव,
हालत ह वर्तमान के ।
बिगड़त हावय आज देखलव,
हालत ह वर्तमान के।
अपना कोन पराया भूलिन,
दुश्मन होगिन जान के।
(1)
रिश्ता नाता भूलत हावै,
मानवता से दूर हे।
मान लुटत हे बेटी के अब,
ओ कतका मजबूर हे।
मतलब भाव हा पनपत हावै,
कीमत नइ हे जान के।
बिगड़त हावय आज देखलव,
हालत ह वर्तमान के ।
(2)
छल कपट के भाव भरे हे ,
कलुषित होवत आज हे।
अनाचार अउ पाप बाढ़गे,
दोषी जन के राज हे।
कहाँ छुपावय मन के पीरा,
परंपरा नइ दान के।
बिगड़त हावय आज देखलव,
हालत ह वर्तमान के ।
(3)
लोभ मोह मा जलथें नेता,
सत्ता के बस लोभ हे।
छलत हावै गरीब जन ला,
कभू नइ होवत क्षोभ हे।
कलयुग के मानव जहरीला,
देखावा सम्मान के।
बिगड़त हावय आज देखलव,
हालत ह वर्तमान के ।
रचनाकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़
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