Friday, 8 November 2019

मनहरण घनाक्षरी

मनहरण घनाक्षरी

छत्तीसगढ़ के महिमा

छत्तीसगढ़ ला मानौ,धन के भंडार जानौ।
कलकल नदियाँ हा,सुघर बोहात हे।
कौशल नाव धरायें,माटी बड़ ममहायें,
हरिहर धान पान,अबड़ सोहात हे।
खनिज भंडार भरे,बेलाडिला लोहा धरे,
सुघर पहाड़ी मैना,मीठ गीत गात हे।
पंथी नाचा खूब भावै,सुवा गीत बड़ गावै,
भुइँया महतारी के,सुघर सौगात हे।

रायपुर राजधानी,गुत्तुर सबो के बानी,
एक नंवबर के जी,शुभ दिन मनात हे।
झरना झिरिया सोहे,दया मया मन मोहे,
नागवंशी के रहाई,सियान बतात हे।
उर्जा नगरी कहाथें,बड़ चीज बरसाथें,
भुइयाँ हा खान धरें, राज ला बढ़ात हे।
भुइयाँ के सुग्घर माटी,नीक केशकाल घाटी,
कोयला हा कोरबा के,मोल ला बतात हे।

न्यायपालिका हावै,अभ्यारण मन भावै,
देवभोग सोना धरे,माथ चमकात हे।
गोंदा इहाँ खूब फूले,आमा रुख मा झूले,
टप टप पाके आमा,मन ललचात हे।
इहाँ बड़ तिहार होथें,धान इहाँ बड़ बोथें,
मीठा रोटी पीठा ला जी,अबड़ बनात हे।
हावै धान के कटोरा,सुघर जी मानय पोरा,
धान भंडार हा जी,भाग चमकात हे।

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