Wednesday, 30 December 2020

छप्पय छंद-दिसंबर ले जा ए साल

छप्पय छंद- दिसंबर ले जा


ले जा तँय ये साल, दिसंबर हावय विनती ।

कोरोना ले मौत, नही अब एखर गिनती ।।

खतरनाक ये साल, कहर ये हा बरपाइस ।

अनुशासन के रोक, रास नइ एहा आइस ।।

भारत के सब नागरिक, डर के साया मा खड़े ।

कोरोना से भय अबड़, मनुज सोच मा हे पड़े ।।


लइका के ए साल, पढ़ाई नइ हे पूरा ।

शाला जाना बंद, पाठ्यक्रम सबो अधूरा ।।

उन्नति के ये मार्ग, सुनौ कुछु नइ हे अच्छा ।

देखौ लगिस विराम, पढ़े के खोवय इच्छा ।।

ज्ञान ध्यान सब भूलथे, लइका जम्मो आज जी ।

खेलकूद मा व्यस्त हे, भूलिन पढ़ना काज जी ।।


कष्ट भरे ये साल, नही हे रोजी मानौ ।

संकट बहुत विशाल, गरीबी अब्बड़ जानौ ।

तड़पय नित्य किसान, धान के पड़गे लाले ।

बिलखत सब परिवार, विकट दिन आइस काले ।।

जन जन रोवत हे अबड़, बेकारी ले त्रस्त हे ।

नेता मन ला का फिकर, सत्ता मा ओ मस्त हे ।।


दुखी अबड़ मजदूर, परत हे आसूँ पीना ।

आय कहाँ ले होय, परत हे लांघन जीना ।।

हावय राशन कार्ड, अन्न पुरथे नइ इनला ।

बीमारी नइ पीर, भूख ले मारय मनला ।।

दीन दुखी के हाल जी, रोवत सबके नैन जी ।

स्वस्थ देह कइसे मिलय, खोइन दिन के चैन जी ।।


Wednesday, 23 December 2020

छप्पय छंद

छप्पय छंद 

प्रीत बड़ा तड़पाय,हृदय व्याकुल है मेरा।
तकती हूँ मै राह,रात से हुआ सवेंरा।।
इन नैनों को आस,नीर है झर झर बहते।
तुम दोगे आवाज,राह को हरदम तकते।
मेरे मन की यह व्यथा,सुनते सारे लोग है।
दीवानी सी फिर रही,दर्द भरा ये रोग है।।

सखियों का वह शोर,अब न भाये सजना।
भूख प्यास सब त्याग,भूल गई मैं सँवरना।।
मुझको विरह सताय,सोच में निसदिन रहती।
अश्क बने अंगार,सनम आओ ये कहती।।
मेरी है यह दुर्दशा,हर क्षण जपती नाम हूँ।
आकर मुझको थाम लो,देती ये पैगाम हूँ।।

Tuesday, 1 December 2020

दोहा-छत्तीसगढ़ राजभाषा दिवस

दोहावली - आशा आजाद"कृति


छत्तीसगढ़ राजभाखा दिवस


आज राजभाखा दिवस ,छत्तीसगढ़ म जान ।

भाखा सुघ्घर नेक हे , हमर राज के सान ।


हमर राज के ध्येय हे , होवय भाखा पोठ ।

मनखे मनखे बोल लय, सुघ्घर गुत्तुर गोठ ।।


जन जन के हिरदे बसे , छत्तीसगढ़ी बोल ।

समझौ मनखे बात ला , भाखा हे अनमोल ।।


देवौ सब सम्मान जी , सुघ्घर नित बगराव ।

हिरदे ले बोलौ सबो, राखौ सबो लगाव ।।


काहे सरमावत हवौ ,  बोले बर ए बोल ।

भाखा सुघ्घर नीक हे , अंतस रस दव घोल ।।


जनमभूमि हा हे इही , इहे करे हम कर्म ।

करमभूमि बर काज कर , सुघर निभावौ धर्म ।।


झन भूलौ उपकार ला , सुघर हमर हे राज ।

भाखा मा संदेव दव , करौ राज बर काज ।।


छंदकार- आशा आजाद"कृति"प

ता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़