दोहावली - आशा आजाद"कृति
छत्तीसगढ़ राजभाखा दिवस
आज राजभाखा दिवस ,छत्तीसगढ़ म जान ।
भाखा सुघ्घर नेक हे , हमर राज के सान ।
हमर राज के ध्येय हे , होवय भाखा पोठ ।
मनखे मनखे बोल लय, सुघ्घर गुत्तुर गोठ ।।
जन जन के हिरदे बसे , छत्तीसगढ़ी बोल ।
समझौ मनखे बात ला , भाखा हे अनमोल ।।
देवौ सब सम्मान जी , सुघ्घर नित बगराव ।
हिरदे ले बोलौ सबो, राखौ सबो लगाव ।।
काहे सरमावत हवौ , बोले बर ए बोल ।
भाखा सुघ्घर नीक हे , अंतस रस दव घोल ।।
जनमभूमि हा हे इही , इहे करे हम कर्म ।
करमभूमि बर काज कर , सुघर निभावौ धर्म ।।
झन भूलौ उपकार ला , सुघर हमर हे राज ।
भाखा मा संदेव दव , करौ राज बर काज ।।
छंदकार- आशा आजाद"कृति"प
ता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़
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