Sunday, 30 May 2021
Monday, 10 May 2021
चौपाई छंद-छंद के छ
चौपाई छंद-छंद के छ
छंद छ के मैं बात बतावौं।सुग्घर ओखर गुन ला गावौं।
गुरुगुल ये कक्षा कहलावै।रहि रहि निसदिन गुन ला गावै।।
छंद छ के सब नींव ल जानौ।दो हजार सोलह हे मानौ।
जिला भिलाई के गुन गावै।पहल उहा ले होये हावै।।
छंद ज्ञान गुरु नांव धरौं जी।अरुण निगम के पाँव परौं जी।
हिरदे निरमल बोलै बानी।छंद विधा के ओहे ज्ञानी।।
छंद साधना रोज करै जी।ज्ञान ध्यान अनमोल धरै जी।
साधक मन के गुन हे भारी।छंद ज्ञान हावै हितकारी।।
छंद आनलाइन मा होवै।कक्षा मा सब निसदिन खोवै।
नियम धरम के पालन होथे।सीखय नइ ओ कक्षा खोथे।।
छंद म नइ हे लापरवाही।कक्षा ले बाहिर ओ जाही।
होवै गुरुकुल ले उजियारा।साधक मन के हावै प्यारा।।
छंद गीत अउ सुग्घर गोष्ठी।भरथे छंद खजाना कोठी।
जिनिस जिनिस के छंद लिखाये।सबके मन ला अब्बड़ भाये।।
छंद सीखना अब्बड़ भारी।बनथे गुरु सब बारी बारी।
सुग्घर हावै भाईचारा।दीदी भैया इही अधारा।।
छंद हवे छत्तीसगढ़ी ये।पढ़ही सब अगला पीढ़ी ये।
जुग जुग के हवे चिन्हारी।छत्तीसगढ़ ह हे महतारी।।
आशा आजाद"कृति"
गीत-लाई ले संसार
गीत - दाई ले संसार
ईश्वर के अवतार दाई हे जिनगी के आधार ।
मया बाँटथे निर्मल मन ले एखर ले संसार ।।
सुघ्घर घर ला राखय दाई सुघ्घर जम्मो काम ।
भाव धरय नित सेवा के ओ दाई चारो धाम ।
पालन पोषण नित करय जी ओखर ले उद्धार ।
ईश्वर के अवतार दाई हे जिनगी के आधार ।।
जीव धरय नौ माह कोख मा मिले जन्म ले नाम ।
दूध धार ले तृप्त करय ओ सत सत हवे प्रणाम ।
जिम्मेदारी सदा निभावय दय सुघ्घर व्यवहार ।
ईश्वर के अवतार दाई हे जिनगी के आधार ।।
घर ममहाथे जइसे तुलसी घर के चारो ओर ।
मया बरोबर दाई बाँटथे नाता रखे बटोर ।
अपन ज्ञान ले करथे दाई घर ला नित अंजोर ।
ईश्वर के अवतार दाई हे जिनगी के आधार ।।
कलयुग मा बस एक दाई हे बाँटय मया समान ।
करुणा के मूरत कहलावै राखय सुघ्घर ज्ञान ।
करम धरम ले मुख नइ मोड़िस कतको होवय भार ।
ईश्वर के अवतार दाई हे जिनगी के आधार ।।
Wednesday, 28 April 2021
चौपाई छंद-आक्सीजन
चौपाई छंद-आक्सीजन कहाँ है
आक्सीजन अब ढूँढ रहे हो।मत काटों क्या पेड़ कहे हो।
वर्तमान में मानुष रोता।लोभ मोह में सबकुछ खोता।।
कलयुग का यह है संदेशा।कभी लगाया नहिं अंदेशा।
प्रतिक्षण मानुष जूझ रहा है।वृक्ष न काटों कभी कहा है।।
जीवन तो बस वृक्ष जहाँ है।आक्सीजन बस मिले वहाँ है।
आज सबक हमको लेना है।वृक्षों को जीवन देना है।।
फैल गया है ये कोरोना।आज पड़े है जीवन खोना।
तड़प तड़प कर मरते सारे।आज वायरस सबको मारे।।
कैसे मानव जीव बचाए।आक्सीजन कैसे नित लाए।
व्याकुल होकर तड़पे भारी।वर्तमान की ये लाचारी।।
कलयुग में यह संकट आया।कोरोना जन को तड़पाया।
आक्सीजन पैसो में बिकता।बिन इसके कोई न टिकता।।
प्रकृति देख चुपचाप खड़ी है।मनुज काल की विषम घड़ी है।
अब पछताए कुछ नही होता।फल वैसा पाए जो बोता।।
वृक्ष लगाना ध्येय बनाएँ।जन जन को यह बात बताएँ।
शुद्ध वायु है एक अधारा।इसे बचाना लक्ष्य हमारा।।
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गीत - दाई ले संसार ईश्वर के अवतार दाई हे जिनगी के आधार । मया बाँटथे निर्मल मन ले एखर ले संसार ।। सुघ्घर घर ला राखय दाई सुघ्घर जम्मो काम । भा...
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त्रिभंगी छंद - श्रीमती आशा आजाद लक्ष्मण मस्तुरिया,गीत रचइया,देश राज सब,छोड़ दिये। सुग्घर सब बानी,अमिट कहानी,सुग्घर तँय हा,राज किये। अमरित ला...
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विधाता छंद 122×4 जिहाँ कलकल बहय नदियाँँ,उही हा राज हमर हावै। जिहाँ हे मीठ रस भाखा,उही हा मान हमर हावै, कहयँ छत्तीसगढ़ माटी,बड़ा ममहात राहय जी,...