Friday, 10 January 2020

मुक्तक छंद-श्रीमती आशा आजाद

मुक्तक छंद-श्रीमती आशा आजाद

नवा बछर

नवा बछर के बेरा आगे,आज सबो मिलजुल गावौ,
भाईचारा हिरदे रखलौ,समता ला सब बगरावौ,
सुग्घर भाखा सदा बोल हो,अइसन मन मा सब ठानौ,
समता के सब पाठ पढ़ौ जी,मानवता ला अपनावौ।।

मात पिता के सेवा करबो ,मन मा समझन ये ठानौ,
नाता भाई बहिनी के जी,हिरदे ले सबझन मानौ,
दीन दुखी के सेवा ले जी,पुन्य सदा घर मा आही,
विपदा सबके दूर भगावौ,कष्ट सबो के पहिचानौ।।

हिरदे मा सम्मान रखौ जी,जग के हावय महतारी,
नारी के हिम्मत बन जावौ,नइ हे अबला बेचारी,
ए कलजुग मा नेक सोच ले,फैलावौ सब उजियारा,
लाज बचाबो सब नारी के,समझौ ये जिम्मेदारी।।

नवा बछर मा नवा सोच हा,सबके हिरदे ला भावै,
मीठ मया के होवय भाखा,अइसन गीत ल सब गावै,
सदा ज्ञान ला जुरमिल बाटौ,सबो मिटावौ अँधियारा,
मार पीट अउ खून खराबा,द्वेष सबो हा मिट जावै।।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

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