Wednesday, 15 January 2020

दोहा मुक्तक

दोहा मुक्तक - श्रीमती आशा आजाद

मकर संक्रांति आय हे,जुरमिल जावौ आज,
बड़े बिहनिया स्नान कर,करदौ दान अनाज,
शुभ मंगल के दिन हवे,जम्मो कहय सियान,
अरपन जल ला जे करे,पूरा होथे काज।।

तिलकुट बनथे आज जी,गुण के सब पकवान।
मीठा तिल के लाड़ू जी,अबड़ बने मिष्ठान,
पतंगबाजी सब करे,खुशी मनावत संग,
आज अबड़ जी सान ले,दयँ गुड़ तिल के दान ।।

रहिथे अब्बड़ स्वाद जी,मूँगफली गुड़ के संग,
चारो कोती मखर के,छाये रहिथे रंग,
नवा फसल बर देव ला,सुमिरय बारंबार,
रंग बिरंगा देख लव,उड़थे सुघर पतंग।

नेपाली मनखे कहे,सुरुज मकर के सार,
कहय पंजाब लोहड़ी,माघी हे संस्कार,
तमिलनाडु कहिथे सुघर,पोंगल हावै नाम,
सुग्घर खिचरी राँध के,बाटय प्रेम अपार।।

सुरुज देव किरपा करौ,इही करय गोहार,
सुग्घर घर परिवार मा,सबके हो उद्धार,
सबझन बाँटय आज तो,मीठा गुड़ पकवान,
खुशियाँ सबला बाँट के,दयँ सुग्घर व्यवहार।।

छंद - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़




No comments:

Post a Comment