दोहा मुक्तक छंद - श्रीमती आशा आजाद
हे दाई सुन सरस्वती,इही मोर गोहार,
नारी के दुख देख के,अब ले तँय अवतार,
विपदा अब्बड़ छाय हे,दाव मा लगगे लाज,
रोवत बिलखत आज सुन,नारी अत्याचार।
महिमा कतका गाव ओ,विद्या दाई तोर,
मनखे भूलिन मान ला,नता देय सब टोर,
जम्मो पीरा देख के,बइठे चुप्पे आज,
कलजुग के ए पाप ला,अब तँय कर संहार।
तँय देवी अस देख ले,नारी कतका रोय,
ज्ञान जोत ला बार दे,पाप कभू झन होय,
मनखे हिरदे ज्ञान भर,दे सुग्घर तँय सीख,
नारी के सबले बड़े,लाज कभू झन खोय,
अंधकार बगरे हवय,लुटत हवे सम्मान,
तँय वीणावरदायिनी,नर मा भरदे ज्ञान,
नारी अब कतका सहे,कोन जलाये जोत,
भर दे शक्ति हाथ मा,अतके दे वरदान।
छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़
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