Sunday, 2 February 2020

बरवै छंद

बरवै छंद - श्रीमती आशा आजाद

आज हरेली हावय,देख तिहार।
घर ला लीपय चमके,सबो दुवार।।

गैंती राँपा नाँगर,सब चमकाय।
पूजा करथें सबझन,ध्यान लगाय।।

मीठा गुड़ अउ चीला,के पकवान।
पूजा कुलदेवता के,करे सियान।।

फेंकय नरियर हावय,सुग्घर खेल।
मया बाँट आपस मा,रखथें मेल।।

तुलसी के चौंरा हा,देख लिपाय।
नदियाँ के बँजरी ला,हे बिछाय।।

गेड़ी चढ़के लेवय,बड़ आनंद।
आज किसानी ला सब,रखथे बंद।।

पूजा डोली के जी,करे किसान।
सुग्घर उपजय सुमिरय,सबके धान।।

जगा जगा हरियाली,मन ला भाय।
नेक परब ला मिल जुल,आज मनाय।।

नाचै गावै मनखे,धूम मचाय।
लइका गेड़ी चढ़के,बड़ हरसाय।।

खोंचय लिम के डारा,घर घर जान।
दूर बिमारी करथे,कहय सियान।।

हमर छत्तीसगढ़ के,ये आधार।
खुशी मनावय सुग्घर,दय व्यवहार।।

प्रेम बरसते कतका,मीठा भाव।
हमर छत्तीसगढ़ ला,माथ नवाव।।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर,कोरबा,छत्तीसगढ़

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