सरसी छंद गीत-श्रीमती आशा आजाद
अंतस हिरदे तही समाये,ए मनबँधना मोर,
कोनो रद्दा रेगौं जोही,सुरता आथे तोर।
रहि रहि आये तोरे सुरता,कलपत हावौ मान,
मया पिरित के अइसन बँधना,अब्बड़ पीरा जान,
चर्चा होगे बीच गाँव मा,गली गली अउ खोर,
कोनो रद्दा रेगौं जोही,सुरता आथे तोर।
भूख पियास ल सबो भुलाये,होय अकेला आज,
सुध बुध मँय बिसराये जोही,अब ता आवै लाज,
घर ले बाहिर तोर नांव के,होवत अब्बड़ सोर,
कोनो रद्दा रेगौं जोही,सुरता आथे तोर।।
ले आ अब बारात दुवारी,अतके हावै आस,
नैन अगोरत आबे जल्दी,राखे हँव विश्वास,
बैरी झन तँय होबे संगी,विनती हे कर जोर,
कोनो रद्दा रेगौं जोही,सुरता आथे तोर।।
मोर करेजा ला कर चानी,झन तड़पाबे देख।
भाग लिखाये तोर संग मा,इही करम के लेख,
तोर नाव के चूरी पहिरौ,जिनगी हो अंजोर,
कोनो रद्दा रेंगौ जोही,सुरता आथे तोर।।
छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़
Wednesday, 4 March 2020
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