छप्पय छंद श्रीमती आशा आजाद
होली आगे देख,सबो संगी जुरियावौ।
छेड़ नगाड़ा साज,थिरक के गाना गावौ।।
अपने धुन के साज,तान ला छेड़ँव संगी।
भुइयाँ दिखही आज,बने जी रंग बिरंगी।।
बने मजा के खेल लौ,ठेनी झगड़ा छोड़ दौ।
मया पिरित के रंग ले,जम्मो नाता जोड़ दौ।।
सुमता के हो रंग,रंग अइसन बगरावौ।
मया पिरित के बोल,गीत ला जुरमिल गावौ।।
बैरी संगी होय,नेक व्यवहार ल रखहूँ।
नसा नास हे जान,मात के झन जी रहहूँ।।
जात पात ला भूलके,भाईचारा लाव जी।
संग मया ला बाट के,हिरदे ले मुस्काव जी।।
छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़
Friday, 27 March 2020
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
-
भारत सुग्घर देश हवय जी,भ्रूण नाश हत्या रोकौ। बेटी के सब मान रखौ जी,दोष बिना झन ता झोकौ।। बेटी सुग्घर घर ला राखय,मान सबो के जाने जी। घर क...
-
त्रिभंगी छंद - श्रीमती आशा आजाद लक्ष्मण मस्तुरिया,गीत रचइया,देश राज सब,छोड़ दिये। सुग्घर सब बानी,अमिट कहानी,सुग्घर तँय हा,राज किये। अमरित ला...
-
फैसन बने हे फोन गा,दिनभर करे हे बात जी। घूमत हवय बतियात हे,देखय नही दिन रात जी।। चेटिंग करे दिनभर धरे,मेसेज सब कतका करे। महिला धरे सब दे...
No comments:
Post a Comment