Friday, 27 March 2020

सार छंद गीत

सार छंद - श्रीमती आशा आजाद

सुग्घर होली खेलव

आगे हाँसत धरके ऐदे,रंग भरे जी होली।
रंग भरे पिचकारी लेलौ,आवव रे हमजोली।।

छेड़ौ सबझन साज नगाड़ा,गावौ मिल जुल गाना।
बिछे रहय रंगोली जइसन,मउसम लगय सुहाना।
गुत्तुर-गुत्तुर भाखा राखौ,बोलौ सुग्घर बोली।
रंग भरे पिचकारी लेलौ,आवव रे हमजोली।।

हरिहर हरिहर रंग रहय जी,नीला पीला डालौ।
ढोल नगाड़ा बाजा बाजै,गीत मया के गालौ।
तान लगाके सब झन बोलौ,होली हे जी होली।।
रंग भरे पिचकारी लेलौ,आवव रे हमजोली।।

होली हे भाई होली हे,तान लगाके घूमौ।
रंग बिरंगी ए भुइयाँ ला,माथ नवा के चूमौ।।
संगी साथी साथ रहय जी,होवै हँसी ठिठोली।
रंग भरे पिचकारी लेलव,आवौ रे हमजोली।।

छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़


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