कुण्डलिया छंद - श्रीमती आशा आजाद
(1)
जिनगी के दिन चार हे,हाँसत खेल गुजार।
ठेनी झगरा छोड़ दे,जिनगी अपन सुधार।।
जिनगी अपन सुधार,नेक तँय मारग चुनले।
भेदभाव ला छोड़,मया ला हिरदे रखले।।
दुख-सुख संगे बाँट,रहय झन बैरी संगी।
मिलके रहिबो साथ,होय जी सुग्घर जिनगी।।
(2)
मँय नारी अवतार हो,जग मा हे पहिचान।
सरी जगत मा मान हे,देत हवय सम्मान।।
देत हवय सम्मान,कहय जम्मो महतारी।
बेटी दाई जान,इही ले हवय चिन्हारी।।
सुख-दुख रहिथों थाम,करौ मँय सेवा भारी।
धरथों नावा जीव,दरद सहिंथों मँय नारी।।
(3)
झन काटव जी रूख रई,एहा हावय शान।
जीवन हमला देत हे,इही बचावय प्रान।।
इही बचावय प्रान,एकठन पेड़ लगावव।
जीवन एमा जान,काट झन मान घटावव।।
पउधा रोज लगाव,जरी मा पानी डालौ।
देही बढ़िया छाँव,जान के रूख झन काटव।।
छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर,कोरबा,छत्तीसगढ़
Sunday, 2 February 2020
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
-
कुकुभ छंद भ्रष्ट नेता नेता अइसे भ्रष्ट हवय गा,अपन जेब ला भरथे जी। वोट मांग के नेता बनगे,लोभ मोह बड़ रखथे जी।। जीत जथे ता नेता मन सब,...
-
भारत सुग्घर देश हवय जी,भ्रूण नाश हत्या रोकौ। बेटी के सब मान रखौ जी,दोष बिना झन ता झोकौ।। बेटी सुग्घर घर ला राखय,मान सबो के जाने जी। घर क...
-
त्रिभंगी छंद - श्रीमती आशा आजाद लक्ष्मण मस्तुरिया,गीत रचइया,देश राज सब,छोड़ दिये। सुग्घर सब बानी,अमिट कहानी,सुग्घर तँय हा,राज किये। अमरित ला...
No comments:
Post a Comment