Monday, 10 May 2021

चौपाई छंद-छंद के छ

चौपाई छंद-छंद के छ 


छंद छ के मैं बात बतावौं।सुग्घर ओखर गुन ला गावौं।

गुरुगुल ये कक्षा कहलावै।रहि रहि निसदिन गुन ला गावै।।


छंद छ के सब नींव ल जानौ।दो हजार सोलह हे मानौ।

जिला भिलाई के गुन गावै।पहल उहा ले होये हावै।।


छंद ज्ञान गुरु नांव धरौं जी।अरुण निगम के पाँव परौं जी।

हिरदे निरमल बोलै बानी।छंद विधा के ओहे ज्ञानी।।


छंद साधना रोज करै जी।ज्ञान ध्यान अनमोल धरै जी।

साधक मन के गुन हे भारी।छंद ज्ञान हावै हितकारी।।


छंद आनलाइन मा होवै।कक्षा मा सब निसदिन खोवै।

नियम धरम के पालन होथे।सीखय नइ ओ कक्षा खोथे।।


छंद म नइ हे लापरवाही।कक्षा ले बाहिर ओ जाही।

होवै गुरुकुल ले उजियारा।साधक मन के हावै प्यारा।।


छंद गीत अउ सुग्घर गोष्ठी।भरथे छंद खजाना कोठी।

जिनिस जिनिस के छंद लिखाये।सबके मन ला अब्बड़ भाये।।


छंद सीखना अब्बड़ भारी।बनथे गुरु सब बारी बारी।

सुग्घर हावै भाईचारा।दीदी भैया इही अधारा।।


छंद हवे छत्तीसगढ़ी ये।पढ़ही सब अगला पीढ़ी ये।

जुग जुग के हवे चिन्हारी।छत्तीसगढ़ ह हे महतारी।।


आशा आजाद"कृति"



गीत-लाई ले संसार

गीत - दाई ले संसार


ईश्वर के अवतार दाई हे जिनगी के आधार ।

मया बाँटथे निर्मल मन ले एखर ले संसार ।।


सुघ्घर घर ला राखय दाई सुघ्घर जम्मो काम ।

भाव धरय नित सेवा के ओ दाई चारो धाम ।

पालन पोषण नित करय जी ओखर ले उद्धार ।

ईश्वर के अवतार दाई हे जिनगी के आधार ।।


जीव धरय नौ माह कोख मा मिले जन्म ले नाम ।

दूध धार ले तृप्त करय ओ सत सत हवे प्रणाम ।

जिम्मेदारी सदा निभावय दय सुघ्घर व्यवहार ।

ईश्वर के अवतार दाई हे जिनगी के आधार ।।


घर ममहाथे जइसे तुलसी घर के चारो ओर ।

मया बरोबर दाई बाँटथे नाता रखे बटोर ।

अपन ज्ञान ले करथे दाई घर ला नित अंजोर ।

ईश्वर के अवतार दाई हे जिनगी के आधार ।।


कलयुग मा बस एक दाई हे बाँटय मया समान ।

करुणा के मूरत कहलावै राखय सुघ्घर ज्ञान ।

करम धरम ले मुख नइ मोड़िस कतको होवय भार ।

ईश्वर के अवतार दाई हे जिनगी के आधार ।।




Wednesday, 28 April 2021

चौपाई छंद-आक्सीजन

चौपाई छंद-आक्सीजन कहाँ है


आक्सीजन अब ढूँढ रहे हो।मत काटों क्या पेड़ कहे हो।

वर्तमान में मानुष रोता।लोभ मोह में सबकुछ खोता।।


कलयुग का यह है संदेशा।कभी लगाया नहिं अंदेशा।

प्रतिक्षण मानुष जूझ रहा है।वृक्ष न काटों कभी कहा है।।


जीवन तो बस वृक्ष जहाँ है।आक्सीजन बस मिले वहाँ है।

आज सबक हमको लेना है।वृक्षों को जीवन देना है।।


फैल गया है ये कोरोना।आज पड़े है जीवन खोना।

तड़प तड़प कर मरते सारे।आज वायरस सबको मारे।।


कैसे मानव जीव बचाए।आक्सीजन कैसे नित लाए।

व्याकुल होकर तड़पे भारी।वर्तमान की ये लाचारी।।


कलयुग में यह संकट आया।कोरोना जन को तड़पाया।

आक्सीजन पैसो में बिकता।बिन इसके कोई न टिकता।।


प्रकृति देख चुपचाप खड़ी है।मनुज काल की विषम घड़ी है।

अब पछताए कुछ नही होता।फल वैसा पाए जो बोता।।


वृक्ष लगाना ध्येय बनाएँ।जन जन को यह बात बताएँ।

शुद्ध वायु है एक अधारा।इसे बचाना लक्ष्य हमारा।।


Wednesday, 30 December 2020

छप्पय छंद-दिसंबर ले जा ए साल

छप्पय छंद- दिसंबर ले जा


ले जा तँय ये साल, दिसंबर हावय विनती ।

कोरोना ले मौत, नही अब एखर गिनती ।।

खतरनाक ये साल, कहर ये हा बरपाइस ।

अनुशासन के रोक, रास नइ एहा आइस ।।

भारत के सब नागरिक, डर के साया मा खड़े ।

कोरोना से भय अबड़, मनुज सोच मा हे पड़े ।।


लइका के ए साल, पढ़ाई नइ हे पूरा ।

शाला जाना बंद, पाठ्यक्रम सबो अधूरा ।।

उन्नति के ये मार्ग, सुनौ कुछु नइ हे अच्छा ।

देखौ लगिस विराम, पढ़े के खोवय इच्छा ।।

ज्ञान ध्यान सब भूलथे, लइका जम्मो आज जी ।

खेलकूद मा व्यस्त हे, भूलिन पढ़ना काज जी ।।


कष्ट भरे ये साल, नही हे रोजी मानौ ।

संकट बहुत विशाल, गरीबी अब्बड़ जानौ ।

तड़पय नित्य किसान, धान के पड़गे लाले ।

बिलखत सब परिवार, विकट दिन आइस काले ।।

जन जन रोवत हे अबड़, बेकारी ले त्रस्त हे ।

नेता मन ला का फिकर, सत्ता मा ओ मस्त हे ।।


दुखी अबड़ मजदूर, परत हे आसूँ पीना ।

आय कहाँ ले होय, परत हे लांघन जीना ।।

हावय राशन कार्ड, अन्न पुरथे नइ इनला ।

बीमारी नइ पीर, भूख ले मारय मनला ।।

दीन दुखी के हाल जी, रोवत सबके नैन जी ।

स्वस्थ देह कइसे मिलय, खोइन दिन के चैन जी ।।


Wednesday, 23 December 2020

छप्पय छंद

छप्पय छंद 

प्रीत बड़ा तड़पाय,हृदय व्याकुल है मेरा।
तकती हूँ मै राह,रात से हुआ सवेंरा।।
इन नैनों को आस,नीर है झर झर बहते।
तुम दोगे आवाज,राह को हरदम तकते।
मेरे मन की यह व्यथा,सुनते सारे लोग है।
दीवानी सी फिर रही,दर्द भरा ये रोग है।।

सखियों का वह शोर,अब न भाये सजना।
भूख प्यास सब त्याग,भूल गई मैं सँवरना।।
मुझको विरह सताय,सोच में निसदिन रहती।
अश्क बने अंगार,सनम आओ ये कहती।।
मेरी है यह दुर्दशा,हर क्षण जपती नाम हूँ।
आकर मुझको थाम लो,देती ये पैगाम हूँ।।

Tuesday, 1 December 2020

दोहा-छत्तीसगढ़ राजभाषा दिवस

दोहावली - आशा आजाद"कृति


छत्तीसगढ़ राजभाखा दिवस


आज राजभाखा दिवस ,छत्तीसगढ़ म जान ।

भाखा सुघ्घर नेक हे , हमर राज के सान ।


हमर राज के ध्येय हे , होवय भाखा पोठ ।

मनखे मनखे बोल लय, सुघ्घर गुत्तुर गोठ ।।


जन जन के हिरदे बसे , छत्तीसगढ़ी बोल ।

समझौ मनखे बात ला , भाखा हे अनमोल ।।


देवौ सब सम्मान जी , सुघ्घर नित बगराव ।

हिरदे ले बोलौ सबो, राखौ सबो लगाव ।।


काहे सरमावत हवौ ,  बोले बर ए बोल ।

भाखा सुघ्घर नीक हे , अंतस रस दव घोल ।।


जनमभूमि हा हे इही , इहे करे हम कर्म ।

करमभूमि बर काज कर , सुघर निभावौ धर्म ।।


झन भूलौ उपकार ला , सुघर हमर हे राज ।

भाखा मा संदेव दव , करौ राज बर काज ।।


छंदकार- आशा आजाद"कृति"प

ता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़