बरवै छंद - श्रीमती आशा आजाद
आज हरेली हावय,देख तिहार।
घर ला लीपय चमके,सबो दुवार।।
गैंती राँपा नाँगर,सब चमकाय।
पूजा करथें सबझन,ध्यान लगाय।।
मीठा गुड़ अउ चीला,के पकवान।
पूजा कुलदेवता के,करे सियान।।
फेंकय नरियर हावय,सुग्घर खेल।
मया बाँट आपस मा,रखथें मेल।।
तुलसी के चौंरा हा,देख लिपाय।
नदियाँ के बँजरी ला,हे बिछाय।।
गेड़ी चढ़के लेवय,बड़ आनंद।
आज किसानी ला सब,रखथे बंद।।
पूजा डोली के जी,करे किसान।
सुग्घर उपजय सुमिरय,सबके धान।।
जगा जगा हरियाली,मन ला भाय।
नेक परब ला मिल जुल,आज मनाय।।
नाचै गावै मनखे,धूम मचाय।
लइका गेड़ी चढ़के,बड़ हरसाय।।
खोंचय लिम के डारा,घर घर जान।
दूर बिमारी करथे,कहय सियान।।
हमर छत्तीसगढ़ के,ये आधार।
खुशी मनावय सुग्घर,दय व्यवहार।।
प्रेम बरसते कतका,मीठा भाव।
हमर छत्तीसगढ़ ला,माथ नवाव।।
छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर,कोरबा,छत्तीसगढ़
Sunday, 2 February 2020
दोहा मुक्तक
दोहा मुक्तक - श्रीमती आशा आजाद
मकर संक्रांति आय हे,जुरमिल जावौ आज,
बड़े बिहनिया स्नान कर,करदौ दान अनाज,
शुभ मंगल के दिन हवे,जम्मो कहय सियान,
अरपन जल ला जे करे,पूरा होथे काज।।
तिलकुट बनथे आज जी,गुण के सब पकवान।
मीठा तिल के लाड़ू जी,अबड़ बने मिष्ठान,
पतंगबाजी सब करे,खुशी मनावत संग,
आज अबड़ जी सान ले,दयँ गुड़ तिल के दान ।।
रहिथे अब्बड़ स्वाद जी,मूँगफली गुड़ के संग,
चारो कोती मखर के,छाये रहिथे रंग,
नवा फसल बर देव ला,सुमिरय बारंबार,
रंग बिरंगा देख लव,उड़थे सुघर पतंग।
नेपाली मनखे कहे,सुरुज मकर के सार,
कहय पंजाब लोहड़ी,माघी हे संस्कार,
तमिलनाडु कहिथे सुघर,पोंगल हावै नाम,
सुग्घर खिचरी राँध के,बाटय प्रेम अपार।।
सुरुज देव किरपा करौ,इही करय गोहार,
सुग्घर घर परिवार मा,सबके हो उद्धार,
सबझन बाँटय आज तो,मीठा गुड़ पकवान,
खुशियाँ सबला बाँट के,दयँ सुग्घर व्यवहार।।
छंद - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़
मकर संक्रांति आय हे,जुरमिल जावौ आज,
बड़े बिहनिया स्नान कर,करदौ दान अनाज,
शुभ मंगल के दिन हवे,जम्मो कहय सियान,
अरपन जल ला जे करे,पूरा होथे काज।।
तिलकुट बनथे आज जी,गुण के सब पकवान।
मीठा तिल के लाड़ू जी,अबड़ बने मिष्ठान,
पतंगबाजी सब करे,खुशी मनावत संग,
आज अबड़ जी सान ले,दयँ गुड़ तिल के दान ।।
रहिथे अब्बड़ स्वाद जी,मूँगफली गुड़ के संग,
चारो कोती मखर के,छाये रहिथे रंग,
नवा फसल बर देव ला,सुमिरय बारंबार,
रंग बिरंगा देख लव,उड़थे सुघर पतंग।
नेपाली मनखे कहे,सुरुज मकर के सार,
कहय पंजाब लोहड़ी,माघी हे संस्कार,
तमिलनाडु कहिथे सुघर,पोंगल हावै नाम,
सुग्घर खिचरी राँध के,बाटय प्रेम अपार।।
सुरुज देव किरपा करौ,इही करय गोहार,
सुग्घर घर परिवार मा,सबके हो उद्धार,
सबझन बाँटय आज तो,मीठा गुड़ पकवान,
खुशियाँ सबला बाँट के,दयँ सुग्घर व्यवहार।।
छंद - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़
कुण्डलिया छंद
कुण्डलिया छंद - श्रीमती आशा आजाद
(1)
जिनगी के दिन चार हे,हाँसत खेल गुजार।
ठेनी झगरा छोड़ दे,जिनगी अपन सुधार।।
जिनगी अपन सुधार,नेक तँय मारग चुनले।
भेदभाव ला छोड़,मया ला हिरदे रखले।।
दुख-सुख संगे बाँट,रहय झन बैरी संगी।
मिलके रहिबो साथ,होय जी सुग्घर जिनगी।।
(2)
मँय नारी अवतार हो,जग मा हे पहिचान।
सरी जगत मा मान हे,देत हवय सम्मान।।
देत हवय सम्मान,कहय जम्मो महतारी।
बेटी दाई जान,इही ले हवय चिन्हारी।।
सुख-दुख रहिथों थाम,करौ मँय सेवा भारी।
धरथों नावा जीव,दरद सहिंथों मँय नारी।।
(3)
झन काटव जी रूख रई,एहा हावय शान।
जीवन हमला देत हे,इही बचावय प्रान।।
इही बचावय प्रान,एकठन पेड़ लगावव।
जीवन एमा जान,काट झन मान घटावव।।
पउधा रोज लगाव,जरी मा पानी डालौ।
देही बढ़िया छाँव,जान के रूख झन काटव।।
छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर,कोरबा,छत्तीसगढ़
(1)
जिनगी के दिन चार हे,हाँसत खेल गुजार।
ठेनी झगरा छोड़ दे,जिनगी अपन सुधार।।
जिनगी अपन सुधार,नेक तँय मारग चुनले।
भेदभाव ला छोड़,मया ला हिरदे रखले।।
दुख-सुख संगे बाँट,रहय झन बैरी संगी।
मिलके रहिबो साथ,होय जी सुग्घर जिनगी।।
(2)
मँय नारी अवतार हो,जग मा हे पहिचान।
सरी जगत मा मान हे,देत हवय सम्मान।।
देत हवय सम्मान,कहय जम्मो महतारी।
बेटी दाई जान,इही ले हवय चिन्हारी।।
सुख-दुख रहिथों थाम,करौ मँय सेवा भारी।
धरथों नावा जीव,दरद सहिंथों मँय नारी।।
(3)
झन काटव जी रूख रई,एहा हावय शान।
जीवन हमला देत हे,इही बचावय प्रान।।
इही बचावय प्रान,एकठन पेड़ लगावव।
जीवन एमा जान,काट झन मान घटावव।।
पउधा रोज लगाव,जरी मा पानी डालौ।
देही बढ़िया छाँव,जान के रूख झन काटव।।
छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर,कोरबा,छत्तीसगढ़
सार छंद - समता जग मा बगरावौ
सार छंद - श्रीमती आशा आजाद
समता जग मा बगरावौ जी,भाईचारा लावौ।
समरसता के भाव रहै जी,उजियारा बगरावौ।
मनखे मनखे एक रहव जी,बोलिन सुग्घर बानी।
गुरुघासीदास ह मानौ जी,अब्बड़ राहिन ज्ञानी।
बाबा अम्बेडकर ह बोलिन,जात पात ला भूलौ।
समता के रद्दा म रेगौं,हिरदे मन ला छूलौ।
गाँधी जी के नेक वचन ला,सबझन सुग्घर मानौ।
झूठ लबारी गोठ त्याग के,सबला अपने जानौ।।
इँदिरा गाँधी सुग्घर बोलिस,नारी साहस धरलौ।
अनाचार ले जुरमिल लड़हूँ,तन लोहा कस रखलौ।।
झाँसी के रानी के हिम्मत,सबला ये सिखलाथे।
मुसकिल होवै कतको भारी,दुनियाँ ले लड़ जाथे।
छूआछूत ला दूर भगाके,सबझन मन दमकावौ।
मनुज रक्त हा एक हवे जी,मानवता अपनावौ।।
भेदभाव ला तोड़ौं जम्मो,झरखा द्वेष मिटावौ।
नारी के सम्मान करौ जी,देश ल सुघर बनावौ।।
शिक्षा के अनमोल रतन ला,जन जन मा फैलावौ।
अंतस हिरदे जोश जगाके,कमजोरी ल भगावौ।
छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर, कोरबा छत्तीसगढ़
आल्हा छंद - हमर देश के जवान
हमर देश के जवान*
भारत हावय देश हमर जी,करें सुरक्षा बढ़थे मान।
सैनिक हावय मान हमर जी,इही बचावय सबके जान।।
फौजी बनके सेवा करथे,भारत भुइयाँ हवे महान।
दुश्मन ले लड़ जाथे ओमन,हमर देश के हावै शान।।
भारत के सीमा मा ठाड़े ,रात रात भर जागय जान।
नमन सबो झन इनला करलव,हावय देखौ सब बलवान।।
अपन खून ला बहा देय गा,लोहा लेथे अब्बड़ मान।
दिन देखय नइ रतिहा देखय,दे देथे जी अपने जान।।
भारत के झण्डा ला धरके,दुश्मन ला जी मार गिराय।
रखवाली सुन करय हमर गा,देख माथ सबके झुक जाय।।
अबड़ बहादुर हावय देखव,हमर देश के सबो जवान।
दुश्मन देखे थर-थर काँपै,ओखर करलौ सब गुनगान।।
मार गिरावाय हिम्मत ले वो,करें सामना बिन हथियार।
दुश्मन भागे देख फौज ला,सैनिक करथें सब उद्धार।।
बुरी नजर जे राखय सुनले,ओखर करथे गा संहार।
धर-धरके ओ मार गिराये,सैनिक के होथे ललकार।।
रचनाकार-श्रीमति आशा आजाद
पता-एसइसीएल मानिकपुर कोरबा, छत्तीसगढ़
भारत हावय देश हमर जी,करें सुरक्षा बढ़थे मान।
सैनिक हावय मान हमर जी,इही बचावय सबके जान।।
फौजी बनके सेवा करथे,भारत भुइयाँ हवे महान।
दुश्मन ले लड़ जाथे ओमन,हमर देश के हावै शान।।
भारत के सीमा मा ठाड़े ,रात रात भर जागय जान।
नमन सबो झन इनला करलव,हावय देखौ सब बलवान।।
अपन खून ला बहा देय गा,लोहा लेथे अब्बड़ मान।
दिन देखय नइ रतिहा देखय,दे देथे जी अपने जान।।
भारत के झण्डा ला धरके,दुश्मन ला जी मार गिराय।
रखवाली सुन करय हमर गा,देख माथ सबके झुक जाय।।
अबड़ बहादुर हावय देखव,हमर देश के सबो जवान।
दुश्मन देखे थर-थर काँपै,ओखर करलौ सब गुनगान।।
मार गिरावाय हिम्मत ले वो,करें सामना बिन हथियार।
दुश्मन भागे देख फौज ला,सैनिक करथें सब उद्धार।।
बुरी नजर जे राखय सुनले,ओखर करथे गा संहार।
धर-धरके ओ मार गिराये,सैनिक के होथे ललकार।।
रचनाकार-श्रीमति आशा आजाद
पता-एसइसीएल मानिकपुर कोरबा, छत्तीसगढ़
कुकुभ गीत - भारत के सच्चा सेनानी
कुकुभ छंद गीत - श्रीमती आशा आजाद
भारत के सच्चा सेनानी,अब्बड़ मान बढ़ाथे गा,
रण मा कुर्बानी ले अपने,झण्डा ओ फहराथे गा।
हे शहीद कतका भारत मा,अब्बड़ खून बहाये हे
हिंदुस्तान के सान बान मा,मरके फर्ज निभाये हे
साहस रखके फर्ज निभाइन,दुश्मन मार गिराथे गा,
रण मा कुर्बानी ले अपने,झण्डा ओ फहराथे गा।
घर मा बइठे घरवाली हा,अपने फर्ज निभाये जी,
बच्चा ओखर अबड़ तरसथे,पालय कष्ट उठाये जी,
सुनके होगे ओ वीरगति ल,अपने होश गवाथे गा,
रण मा कुर्बानी ले अपने,झण्डा ओ फहराथे गा।
जंगल झाड़ी घाम जाड़ मा,तन मा अब्बड़ सहिथे गा,
रात रात भर जाग जाग के,रक्षा सबके करथे गा,
कठिन काज के जिम्मा लेवै,तभे सुरक्षा आथे गा।
रण पर कुर्बानी से अपने,झण्डा वो फहराथे गा।
दुश्मन झन घुस जावै कोनो,सीमा मा नजर गड़ाये हे,
भूख प्यास के होश कहाँ तब,जब संकट हा छाये हे,
भारत माता के रक्षा बर,लहूँ सदा दे जाथे गा,
रण मा कुर्बानी ले अपने,झण्डा ओ फहराथे गा।
छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़
भारत के सच्चा सेनानी,अब्बड़ मान बढ़ाथे गा,
रण मा कुर्बानी ले अपने,झण्डा ओ फहराथे गा।
हे शहीद कतका भारत मा,अब्बड़ खून बहाये हे
हिंदुस्तान के सान बान मा,मरके फर्ज निभाये हे
साहस रखके फर्ज निभाइन,दुश्मन मार गिराथे गा,
रण मा कुर्बानी ले अपने,झण्डा ओ फहराथे गा।
घर मा बइठे घरवाली हा,अपने फर्ज निभाये जी,
बच्चा ओखर अबड़ तरसथे,पालय कष्ट उठाये जी,
सुनके होगे ओ वीरगति ल,अपने होश गवाथे गा,
रण मा कुर्बानी ले अपने,झण्डा ओ फहराथे गा।
जंगल झाड़ी घाम जाड़ मा,तन मा अब्बड़ सहिथे गा,
रात रात भर जाग जाग के,रक्षा सबके करथे गा,
कठिन काज के जिम्मा लेवै,तभे सुरक्षा आथे गा।
रण पर कुर्बानी से अपने,झण्डा वो फहराथे गा।
दुश्मन झन घुस जावै कोनो,सीमा मा नजर गड़ाये हे,
भूख प्यास के होश कहाँ तब,जब संकट हा छाये हे,
भारत माता के रक्षा बर,लहूँ सदा दे जाथे गा,
रण मा कुर्बानी ले अपने,झण्डा ओ फहराथे गा।
छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़
दोहा मुक्तक -माँ सरस्वती
दोहा मुक्तक छंद - श्रीमती आशा आजाद
हे दाई सुन सरस्वती,इही मोर गोहार,
नारी के दुख देख के,अब ले तँय अवतार,
विपदा अब्बड़ छाय हे,दाव मा लगगे लाज,
रोवत बिलखत आज सुन,नारी अत्याचार।
महिमा कतका गाव ओ,विद्या दाई तोर,
मनखे भूलिन मान ला,नता देय सब टोर,
जम्मो पीरा देख के,बइठे चुप्पे आज,
कलजुग के ए पाप ला,अब तँय कर संहार।
तँय देवी अस देख ले,नारी कतका रोय,
ज्ञान जोत ला बार दे,पाप कभू झन होय,
मनखे हिरदे ज्ञान भर,दे सुग्घर तँय सीख,
नारी के सबले बड़े,लाज कभू झन खोय,
अंधकार बगरे हवय,लुटत हवे सम्मान,
तँय वीणावरदायिनी,नर मा भरदे ज्ञान,
नारी अब कतका सहे,कोन जलाये जोत,
भर दे शक्ति हाथ मा,अतके दे वरदान।
छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़
हे दाई सुन सरस्वती,इही मोर गोहार,
नारी के दुख देख के,अब ले तँय अवतार,
विपदा अब्बड़ छाय हे,दाव मा लगगे लाज,
रोवत बिलखत आज सुन,नारी अत्याचार।
महिमा कतका गाव ओ,विद्या दाई तोर,
मनखे भूलिन मान ला,नता देय सब टोर,
जम्मो पीरा देख के,बइठे चुप्पे आज,
कलजुग के ए पाप ला,अब तँय कर संहार।
तँय देवी अस देख ले,नारी कतका रोय,
ज्ञान जोत ला बार दे,पाप कभू झन होय,
मनखे हिरदे ज्ञान भर,दे सुग्घर तँय सीख,
नारी के सबले बड़े,लाज कभू झन खोय,
अंधकार बगरे हवय,लुटत हवे सम्मान,
तँय वीणावरदायिनी,नर मा भरदे ज्ञान,
नारी अब कतका सहे,कोन जलाये जोत,
भर दे शक्ति हाथ मा,अतके दे वरदान।
छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़
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