Friday, 27 March 2020

चौपाई छंद

चौपाई छंद - श्रीमती आशा आजाद

जय हो हे भोला भंडारी।तँय ता सबके पालन हारी।
बाढ़े अत्याचार मिटादे।नारी के तँय मान बचादे।।

सरग लोक मा बइठे भोला।पाप म जलगे नारी चोला।
अंधकार ले नोनी रोवै।मान अपन ओ निसदिन खोवै।।

रिश्ता नाता सबो भुलागे।मानुष तन ये आज रुलागे।
अपन कोख मा राखै नारी।समझय नइ गा अतियाचारी।।

जगा जगा हे छुपे लुटेरा।नारी राखै कहाँ बसेरा।
अवतारी बनके तँय आजा।नारी के अब लाज बचाजा।।

कोन डहर अब मान बचावै।कोन जगा गोहार लगावै।
न्याय कहाँ अब मिलही बोलौ।तीसर आँखी अब ता खोलौ।।

तँय ता चुप्पे देखत ठाढ़े।ये भुइयाँ मा पापी बाढ़े।
कबतक तँय पूजा करवाबे।पापी ला कब मार गिराबे।।

भोले तँय अब डमरु बजादे।आज मान के दीप जलादे।
सुख ले राहय जम्मो नारी।सुख के तही हवस अधिकारी।।

आशा बेटी सुमिरय तोला।कलजुग मा तँय आजा भोला।
प्रेम सम्मान सुमता लादे।ये भुइयाँ मा प्रेम बढ़ादे।।

छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

विष्णुपद छंद गीत

विष्णु पद छंद गीत-श्रीमती आशा आजाद

पढ़ना लिखना सीखौ संगी,ज्ञान ध्यान धरलौ।
अंधकार ला दूर करौ जी,चेत सबो करलौ।।

हवे तकनीक आनी बानी,सुग्घर ध्यान धरौ,
ज्ञान बढ़ावत कम्प्यूटर हा,नित सब चेत करौ,
जिनिस जिनिस मा ज्ञान धरे हे,सब सुग्घर पढ़लौ,
अंधकार ला दूर करौ जी,चेत सबो करलौ।।

बन जावौ डाक्टर पढ़ लिख के,तन ला ठीक करे।
तन बीमारी दूर भगावै,शिक्षा सकल धरे।
शिक्षक बनके ज्ञान बाँटबो,प्रन करके बढ़लौ।
अंधकार ला दूर करौ जी,चेत सबो करलौ।।

शोध करौ आनी बानी के,अब्बड़ विषय भरे,
शिक्षा बर नित काज करौ जी,जग उत्थान करे,
नवा अँजोर करदव अइसे,जनहित ज्ञान गढ़लौ,
अंधकार ला दूर करौ जी,चेत सबो करलौ।।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

शंकर छंद


शंकर छंद-श्रीमती आशा आजाद

मस्तुरिया जी सान राज के,हमर हे अभिमान।
सुग्घर जन उद्धार करिन जी,गीत के रसखान।।
जन जन ला संदेश दिहिन जी,नेक अमरित बोल।
ए भुइयाँ के हीरा हावै,कर्म हे अनमोल।।

संग चलव रे गीत ल गाके,दिहिन जी संदेश।
दीन दुखी के संग चलव रे,मिटे जम्मो क्लेश।।
छत्तीसगढ़ म सोना जइसे,अमिट हे पहिचान।
मस्तुरिया जी अंतस मन ले,नेक निक इंसान।।

आशा आस्था उमंग साहस,युवा गीत ह बोल।
छत्तीसगढ़ी भाखा बोलिन,ज्ञान बड़ अनमोल।।
चंदैनी गोंदा मा कह दिन,हे अधार किसान।
मस्तुरिया जी प्रेम भाव के,रचिन गीत सुजान।।

गिरे थके के रहिन सहारा,कला के भरमार।
धन्य भाग ए भुइयाँ के जी,मिलिस ये अवतार।।
छत्तीसगढ़ी ला पोठ बनाके,बनिन हे अभिमान।
मस्तुरिया जी लाइन सुमता,सुघर लेखन ज्ञान।।

हमर राज के नेक धरोहर,कंठ मधुर मिठास।
जन जन मनखे मन मा भरदिन,अंतस म विश्वास।।
छत्तीसगढ़ी लेखन धारा,अमिट हे सम्मान।
मस्तुरिया जी हिरदे बसके,अपन छोड़िन प्रान।।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

सार छंद गीत

सार छंद - श्रीमती आशा आजाद

सुग्घर होली खेलव

आगे हाँसत धरके ऐदे,रंग भरे जी होली।
रंग भरे पिचकारी लेलौ,आवव रे हमजोली।।

छेड़ौ सबझन साज नगाड़ा,गावौ मिल जुल गाना।
बिछे रहय रंगोली जइसन,मउसम लगय सुहाना।
गुत्तुर-गुत्तुर भाखा राखौ,बोलौ सुग्घर बोली।
रंग भरे पिचकारी लेलौ,आवव रे हमजोली।।

हरिहर हरिहर रंग रहय जी,नीला पीला डालौ।
ढोल नगाड़ा बाजा बाजै,गीत मया के गालौ।
तान लगाके सब झन बोलौ,होली हे जी होली।।
रंग भरे पिचकारी लेलौ,आवव रे हमजोली।।

होली हे भाई होली हे,तान लगाके घूमौ।
रंग बिरंगी ए भुइयाँ ला,माथ नवा के चूमौ।।
संगी साथी साथ रहय जी,होवै हँसी ठिठोली।
रंग भरे पिचकारी लेलव,आवौ रे हमजोली।।

छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़


छप्पय छंद

छप्पय छंद श्रीमती आशा आजाद

होली आगे देख,सबो संगी जुरियावौ।
छेड़ नगाड़ा साज,थिरक के गाना गावौ।।
अपने धुन के साज,तान ला छेड़ँव संगी।
भुइयाँ दिखही आज,बने जी रंग बिरंगी।।
बने मजा के खेल लौ,ठेनी झगड़ा छोड़ दौ।
मया पिरित के रंग ले,जम्मो नाता जोड़ दौ।।

सुमता के हो रंग,रंग अइसन बगरावौ।
मया पिरित के बोल,गीत ला जुरमिल गावौ।।
बैरी संगी होय,नेक व्यवहार ल रखहूँ।
नसा नास हे जान,मात के झन जी रहहूँ।।
जात पात ला भूलके,भाईचारा लाव जी।
संग मया ला बाट के,हिरदे ले मुस्काव जी।।

छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

कुकुभ छंद


कुकुभ छंद-श्रीमती आशा आजाद

अम्बेडकर जयंती

चलँव मनाइन जन्मदिवस ला, शुभ दिन देखौ आये हे।
भीम रंग मा डूबिन सबझन,खुशी गीत ला गाये हे।।

बाबा के बानी हे सुग्घर,समता हमला सिखलावै।
रद्दा सत के देखाइस हे,सत मारग ला बतलावै ।।

बाबा के कुर्बानी अइसन, सुग्घर आज बनाये हे।
शिक्षित होके दय प्रकाश ला,कतका नाम कमाये हे।।।

प्रेम भाव समरसता बरसय,शिक्षित बनौ सिखाये हे।
खुदे अकेला कठिन राह मा,रद्दा नवा दिखाये हे।।

जात पात ले ऊपर लाइस,नेक करम ला जानौ जी ।
छूत भाव ले मुक्त कराइस,ओखर गुन ला मानौ जी।।

भीमराव की बेटी हावँव,जानँव अपने हक लेना ।
नारा हे संघर्ष करौ के, साथ भीम के हे सेना।।

शान बान सब तोरे दम ले, बाबा तँय हा दिलवाये ।
झूम उठिन हे जन्मदिवस मा, भीम रंग हे लहराये।।

शिक्षा के अनमोल रतन ले,कर लौ सब उजियारा जी। विपदा मा सुन पार लगाही,हटही दूर अंधियारा जी।।

रचनाकार-श्रीमती आशा आजाद
पता -मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

रोला छंद

रोला छंद - श्रीमती आशा आजाद

कोरोना हे छाय,देश मा जानौ भाई।
देख वायरस आज,मात गे अब करलाई।।
बिगड़े हे हालात,नास छिन भर मा करथे।
लग जावय ये रोग,कतक मनखे मन मरथे।।

फैलाइस हे रोग,चीन हा देखौ जानौ।
खाइन कच्चा मांस,रोग नावा पहिचानौ।।
फैलत तुरते अंग,हाथ झन जान मिलाहू।
मास्क ल पहिरौ रोज,ज्ञान के बात सिखाहू।।

भीड़ भड़क्का छोड़,हवय अबड़ महामारी।
जन जन बगरे खूब,वायरस के बीमारी।।
मुँह मा रखौ रुमाल,साथ झन किटानु आये।
बाहिर झन जी जाव,छुवत ये रोग लगाये।।

खाँसी संग जुकाम,हवय जी इही निसानी।
गला करे हे जाम,सांस के बड़ परसानी।।
चमगादड़ अउ सांप,खाय हे चीनी मन जी।
जहर बरोबर मान,बिगड़ गे सबके तन जी।।

शहर शहर अउ गाँव,देश के जम्मो कोना।
कलपत अब्बड़ मान,देख बगरे कोरोना।।
धोवौ अपने हाथ,रोज साबुन ले भैया।
धरलौ करलौ चेत,देश के सबो रहैया।।

लहसुन सुघर उपाय,गरम पानी ला पीहू।
हल्दी तुलसी काट,सुघर एखर ले जीहू।।
करदौ पूरा बंद,चीन के खई खजाना।
बिगड़ जथे हालात,परय पाछु पछताना।

रोकथाम के काज,करत हे डाक्टर सुनलौ।
कहिथें जेन उपाय,ध्यान धर ओला गुनलौ।।
सर्दी छींक जुकाम,जाँच खाँसी के करहू।
रखके मनखे चेत,स्वस्थ तन मन ला रखहू।

छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

छप्पय छंद - श्रीमती आशा आजाद

कोरोना के रोग,छाय अबड़ महामारी।
बिगड़े हे हालात,वायरस के बीमारी।।
देवय तन ल बिगाड़,बात ला मानौ भैया।
रखहू सबझन ध्यान,देश के सबो रहैया।।
खाँसी छींक जुकाम हो,जाँच करे मा ध्यान दौ।
छुवत बढ़य जी रोग हा,सबला सुग्घर ज्ञान दौ।।

मुँह मा रखौ रुमाल,मास्क ला पहिरौ भाई।
फइल जही नित जान,मातही तब करलाई।।
वायरस के प्रकोप,रात दिन बाढ़ै जानौ।
बाहिर झन जी जाव,गोठ डाक्टर के मानौ।।
हाथ मिलाके सब सुनौ,धोवव अपने हाथ जी।
रोज सावधानी रखौ,घूमौ झन नित साथ जी।

छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

मनहरण घनाक्षरी - श्रीमती आशा आजाद

कोरोना हा बगरत हे,मानुष हा तड़पत हे
महामारी नित बाढ़ै,किटानु फैलात हे
वायरस कहिथे जी,दरद ला सहिथें जी
अंतस मा घुस के जी,बीमारी बगरात हे
चीनी मन के देन हावै,चमगादड़ सांप खावै,
सोचे नइ समझे जी ,मांस कच्चा खात हे
देश के जम्मो कोनो,बगरे हे ये कोरोना,
सावधानी राखे मा जी,रोग कट जात हे।

गरम सब पीयौ पानी,झन करौ मनमानी
सांस बड़ परसानी,लेवत हे प्रान ला





Wednesday, 4 March 2020

शंकर छंद


शंकर छंद-श्रीमती आशा आजाद

मस्तुरिया जी सान राज के,इही हमर अभिमान,
सुग्घर जन उद्धार करिन जी,हे भुइयाँ के सान।
जन जन ला संदेश दिहिन जी,अमरित कस हे बोल,
ए भुइयाँ के हीरा हावै,बानी सब अनमोल।।

संग चलव रे गीत ल गाके,सुग्घर दिन संदेश।
दीन दुखी के संग चलव रे,कहिन मिटादव क्लेश।
छत्तीसगढ़ म सोना जइसन,नायक के पहिचान।
मस्तुरिया जी अंतस मन ले,नेक रहिन इंसान।।

आशा आस्था उमंग साहस,युवा गीत के बोल।
छत्तीसगढ़ी भाखा सुग्घर,ज्ञान दिहिन अनमोल।
चंदैनी गोंदा मा कह दिन,हवे अधार किसान।
मस्तुरिया जी प्रेम भाव के,रचदिन गीत सुजान।।

रंगमंच के नायक राहिन,कला रहिस भरमार।
ए भुइयाँ मा हीरा जइसन,बेटा के अवतार।
छत्तीसगढ़ी ला पोठ बनाके,बनिन हमर अभिमान।
मस्तुरिया जी लाइन सुमता,लेखन मा नित ज्ञान।।

हमर राज के नेक धरोहर,गला म खूब मिठास।
जन ला नित संदेश दिहिन जी,अंतस भर विश्वास।
छत्तीसगढ़ी लेखन धारा,अमिट राज सम्मान।
मस्तुरिया जी हिरदे बसके,छोड़िन अपने प्रान।।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

सरसी छंद गीत

सरसी छंद गीत-श्रीमती आशा आजाद

अंतस हिरदे तही समाये,ए मनबँधना मोर,
कोनो रद्दा रेगौं जोही,सुरता आथे तोर।

रहि रहि आये तोरे सुरता,कलपत हावौ मान,
मया पिरित के अइसन बँधना,अब्बड़ पीरा जान,
चर्चा होगे बीच गाँव मा,गली गली अउ खोर,
कोनो रद्दा रेगौं जोही,सुरता आथे तोर।

भूख पियास ल सबो भुलाये,होय अकेला आज,
सुध बुध मँय बिसराये जोही,अब ता आवै लाज,
घर ले बाहिर तोर नांव के,होवत अब्बड़ सोर,
कोनो रद्दा रेगौं जोही,सुरता आथे तोर।।

ले आ अब बारात दुवारी,अतके हावै आस,
नैन अगोरत आबे जल्दी,राखे हँव विश्वास,
बैरी झन तँय होबे संगी,विनती हे कर जोर,
कोनो रद्दा रेगौं जोही,सुरता आथे तोर।।

मोर करेजा ला कर चानी,झन तड़पाबे देख।
भाग लिखाये तोर संग मा,इही करम के लेख,
तोर नाव के चूरी पहिरौ,जिनगी हो अंजोर,
कोनो रद्दा रेंगौ जोही,सुरता आथे तोर।।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़