Tuesday, 29 October 2019

लोकगीत-मोर मयारू जोड़ी आजा

छत्तीसगढ़ का लोकगीत....✍️

🌹मोर मयारू जोड़ी आजा🌹

*मोर मयारू जोड़ी आजा,*
                    *तोरे रद्दा जोहत हौ।*
*छिन छिन मोला अबड़ सतावै,*
                *तोर मया मा रोवत हौ।*

*अब्बड़ मँय हा तरसत हावौ,*
              *मया ला तोर भुलाये हौ।*
*सरी सरी रतिहा मँय जागौ,*
                *कतक पीरा छुपाये हौ।*
*आजा तरसत हावै नैना,*
                  *बैरी पल ला बोहत हौ।*
*मोर मयारू जोड़ी आजा,*
                      *तोरे रद्दा जोहत हौ।*

*अंतस हिरदे तही समाये,*
               *ये पीरा ले कलपत हो।*
*आस लगे हे मिलबो जोही,*
         *मिलन होय कब तरसत हौ।*
*संगी साथी सबो छूटगे,*
              *नाता सबला खोवत हौ।*
*मोर मयारू जोड़ी आजा,*
                     *तोरे रद्दा जोहत हौ।*

*भूख प्यास ला सबो भुलाये,*
             *दुख मा आँसू पीयत हौ।*
*माथ मा सेंदुर तोर नाव के,*
             *इही आस मा जीयत हौ।*
*कब लाबे बरात गा जोही,*
           *रहि रहि ये मँय सोचत हौ।*
*मोर मयारू जोड़ी आजा,*
                     *तोरे रद्दा जोहत हौ।*

रचनाकार-श्रीमती आशा आजाद...✍️
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

Tuesday, 22 October 2019

मनहरण घनाक्षरी(कवित्त छंद)

मनहरण घनाक्षरी छंद

दारू झन पी

दारू काहे पिये संगी,घर मा जी रहे तंगी,
परिवार वाला मन,बड़ खिसियात हे।
बिख हावै तैहा जान,पियौं नइ मन ठान ,
लीवर सड़ात बड़,बिमारी बढ़ात हे।
नशा सब छोड़ दे जी,मुँहु तँय मोड़ दे जी
अभी माते मनखे हा,पाछु पछतात हे।
घर दुरा लुट जाही, मिले नइ तोला काही,
समै बलवान हावै,तोला ये सिखात हे।

मनहरण घनाक्षरी(कवित्त छंद)

मनहरण घनाक्षरी(कवित्त छंद)

यातायात नियम

सबझन ध्यान धरौं,लापरवाही ले डरौ,
सुग्घर धियान देके,वाहन चलाव जी।।
जीव अनमोल हवै,सुरक्षा के बोल हवै,
यातायात नियम ला,सुघर निभाव जी।।
अनहोनी होवत हे,जिनगी ल खोवत हे,
दुरघटना ले सब,जीव ला बचाव जी।।
नियम के पालन हो,धीर चले वाहन हो,
राह चलै सावधानी,सबो अपनाव जी।।

Sunday, 13 October 2019

अरविंद सवैया-गुरु

अरविंद सवैया-श्रीमती आशा आजाद

परनाम करौ गुरु पाँव परौ गुण के सँग देवत हे पहिचान।
सब ला सत राह दिखावत हे बरसावत हे किरपा सुख मान।
पढ़ले गुनले सच गोठ सदा धर ले जिनगी बर नेक विधान।
निज काज करौ नित ध्यान धरौ फलदायक हे गुरु के सद ज्ञान।

समभाव धरे हिरदे म सदा नित देश करैं सुन लेव विकास।
अभिमान हवे गुरु नाव रटे जिनगी ल गढ़े बन जावय खास।
बगराइन हे गुरु ज्ञान सदा पढ़लौ गुनलौ पिछला इतिहास।।
गुरु जोत जलावत हे मन भीतर ये जिनगी ल करौं ग उजास।।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर,कोरबा,छत्तीसगढ़

अमृतध्वनि छंद-सुग्घर सिरजन

अमृत ध्वनि छंद-श्रीमति आशा आजाद

सुग्घर सिरजन*

सुग्घर सिरजन सब करौ,करदँव सब उद्धार।
नव मारग मा होय जी,चले कलम के धार।।
चले कलम के-धार होय जी,नित उजियारा।
सुग्घर कविता, गढ़ देवव जी,लागय प्यारा।।
साहित सिरजन,ज्ञान बढ़ावँय,सीखँय सबझन।
नेक सोच ले,कवि मन रचदयँ,सुग्घर सिरजन।।

*नसा नास के जड़ हवय*

दारू पीना छोड़ दे,खुद मा रख विश्वास।
नसा नास के जड़ हवँय,जिनगी झन कर नास।।
जिनगी झन कर-नास कभू गा,रहिबे बचके।
टूट जथे घर, ठेनी झगरा,पीके बमके।।
होही अपजश,तय करले तँय,कइसे जीना।
सब मिलही सुन,छोड़ दिये जे,दारू पीना।।

*जय जय भारत देश*

जय जय भारत देश के, हमर तिरंगा शान।
जम्मो मिलके कहय जी,देश हमर हे जान।।
देश हमर हे,मान अमर हे, हे महतारी।
जान इही हे,रंग तिरंगा,हे चिन्हारी।।
जनमन गावँय,वंदे गावँय,हे एके लय।
जुरमिल गावँव,तान लगालव,भारत जय जय।।

*महाशिवरात्रि*

बमबम भोले बोल रे,काँवर ला तँय थाम।
महाशिवरात्रि आज हे,शंभू के ले नाम।।
शंभू के ले,नाम जगत मा,माथ नवाले।
पूरा होही,तोर कामना,जय जय गाले।।
काँवर धरके,आजा संगे,एके होले।
पार लगाही,बोल तहूँ हा ,बमबम भोले।।

*दाई बनगे मौम*

दाई बनगे मौम जी,बेटा के नव बोल।
जान इंग्लिस बोलथे,गोठ करय बिन तोल।।
गोठ करय बिन-तोल सतावय,गवँइ गाँव मा।
शहरी बाबू, बनगे हावँय,रहय छाँव मा।।
चरन पायलगी,नइ जानय जी,मुश्किल भाई।
नाता जम्मो,भुला गये हे,रोवत दाई।।

*झन काटँव*

काहे काटँव रुख रई,एहा हावँय शान।
सुग्घर हावा देत हे,इही बचावँय प्रान।।
इही बचावँय,प्रान हमर जी,पेड़ लगालव।
जीवन देही,झन काटँव जी,मान बढ़ालव ।।
पउधा लगाँव,जतन करौ सब,सुख ला पावँव।
देही बढ़िया,छाँव जान के,काहे काटँव।।

*बेटी हे अनमोल*

हावय बेटी शान जी,बेटा जइसन मान।
बेटी हा अनमोल हे,समता ला तँय जान।।
समता ला तँय,जान जगत के,हे महतारी।
जीवन देवँय,मान बढ़ावय,ओहय नारी।।
मात-पिता के,जतन सकल कर,सुग्घर पालय।
जनम देत हे,पालन करथे,नारी हावँय।।

सुग्घर सिरजन

सुग्घर सिरजन सब करौ,जग के हो उद्धार।
पढ़के सबझन ज्ञान ले,इही कलम के सार।।
इही कलम के,सार करय जे,नित उजियारा।
सुग्घर कविता,गढ़ देवव जी,लागय प्यारा।।
साहित सिरजन,ज्ञान बढ़ावँय,सीखँय सबझन।
नेक सोच ले,कवि मन रचदयँ,सुग्घर सिरजन।।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

Thursday, 10 October 2019

कुण्डलिया छंद-शिक्षक

कुण्डलिया छंद-श्रीमति आशा आजाद

शिक्षक के सम्मान हो,हावै ज्ञानाधार।
निश्छल मन सद्भावना,सत्य प्रेम के सार।।
सत्य प्रेम के सार,ज्ञान के वर्षा करथें।
ज्ञान हवय अनमोल,सदा ये जीवन गढ़थें।।
कह आशा आजाद ,देश के रचथे रक्षक।
विपदा कतको जान,पार लगोइया शिक्षक।।

छंदकार-आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

चौपाई छंद-दुर्गा दाई ले अवतार

चौपाई छंद-श्रीमती आशा आजाद

दुर्गा दाई ले अवतार

आगे देखव अब नवराती।फेर जलावव दीया बाती।
पाप खतम कइसे होही माँ।नारी कब तक ले रोही माँ।

दुर्गा दाई ले अवतारी।नारी मनके दुख हे भारी।
कतका पीरा ल गोहरावौं।पग-पग दुख ला मँय हा पावौं।।

अवतारी बनके तँय आजा।नारी के पीरा ल मिटाजा।
चारो कोती अत्याचारी।मान लुटे कइसन लाचारी।।

जगा-जगा हे छुपे लुटेरा।नारी राखै कहाँ बसेरा।
आके तँय हा पार लगादे।पापी मन ले न्याय दिलादे।।

नान-नान नोनी के पीरा।जाय सुनावय काखर तीरा।
रोवत बिलखत रोजे सुनले।मात गोहार थोरक गुन ले।।

कलयुग मा नइ जीना मोला।आज बलावव दुर्गा तोला।
चुप्पे बइठे देखत दाई।अनाचार ले हे करलाई।।

मानवता ला देख भुलागे।मानुष कतका आज रुलागे।
खून खराबा बाढ़त हावै।आस तैर ले सबो लगावै।।

तँय ता सबके तारनहारी।कहे जगत तोला महतारी।
दाई कलयुग मा तँय आजा।नारी के अब लाज बचाजा।।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

जयकारी छंद

जयकारी छंद-श्रीमती आशा आजाद

गाँधी के अनमोल वचन

बात बेंदरा के अनमोल।बात करव जी सब झन तोल।
गाँधी जी के मंतर तीन।रहव पाप मा झन जी लीन।।

पहली बंदर मूँदे आँख।मनखे अंतस हिरदे झाँख।
सुग्घर दे दव सब सम्मान।आँखी मूदँय झन इंसान।।

दूसर बंदर कान दबाय।गारी झन ता कभू सुनाय।
देवय सबला निसदिन ज्ञान।सुनय कान सबके सम्मान।।

तीसर बंदर मुहूँ दबाय।कतका सुग्घर बात बताय।
बोलौ गुरतुर मीठा बात।सुग्घर बीते दिन अउ रात।।

मीठ प्रेम के भाखा होय।गारी पीरा ले झन रोय।
बनही कतका सुग्घर राज।नीक पहुँचही तब आवाज।।

अपने मन मा रखलव धीर।सहय कभू झन कोनो पीर।
तीन बात के रखलव ध्यान।नेक करम ले बनौ सियान।।

रचनाकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छतीसगढ़