छत्तीसगढ़ का लोकगीत....✍️
🌹मोर मयारू जोड़ी आजा🌹
*मोर मयारू जोड़ी आजा,*
*तोरे रद्दा जोहत हौ।*
*छिन छिन मोला अबड़ सतावै,*
*तोर मया मा रोवत हौ।*
*अब्बड़ मँय हा तरसत हावौ,*
*मया ला तोर भुलाये हौ।*
*सरी सरी रतिहा मँय जागौ,*
*कतक पीरा छुपाये हौ।*
*आजा तरसत हावै नैना,*
*बैरी पल ला बोहत हौ।*
*मोर मयारू जोड़ी आजा,*
*तोरे रद्दा जोहत हौ।*
*अंतस हिरदे तही समाये,*
*ये पीरा ले कलपत हो।*
*आस लगे हे मिलबो जोही,*
*मिलन होय कब तरसत हौ।*
*संगी साथी सबो छूटगे,*
*नाता सबला खोवत हौ।*
*मोर मयारू जोड़ी आजा,*
*तोरे रद्दा जोहत हौ।*
*भूख प्यास ला सबो भुलाये,*
*दुख मा आँसू पीयत हौ।*
*माथ मा सेंदुर तोर नाव के,*
*इही आस मा जीयत हौ।*
*कब लाबे बरात गा जोही,*
*रहि रहि ये मँय सोचत हौ।*
*मोर मयारू जोड़ी आजा,*
*तोरे रद्दा जोहत हौ।*
रचनाकार-श्रीमती आशा आजाद...✍️
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़