Thursday, 10 October 2019

चौपाई छंद-दुर्गा दाई ले अवतार

चौपाई छंद-श्रीमती आशा आजाद

दुर्गा दाई ले अवतार

आगे देखव अब नवराती।फेर जलावव दीया बाती।
पाप खतम कइसे होही माँ।नारी कब तक ले रोही माँ।

दुर्गा दाई ले अवतारी।नारी मनके दुख हे भारी।
कतका पीरा ल गोहरावौं।पग-पग दुख ला मँय हा पावौं।।

अवतारी बनके तँय आजा।नारी के पीरा ल मिटाजा।
चारो कोती अत्याचारी।मान लुटे कइसन लाचारी।।

जगा-जगा हे छुपे लुटेरा।नारी राखै कहाँ बसेरा।
आके तँय हा पार लगादे।पापी मन ले न्याय दिलादे।।

नान-नान नोनी के पीरा।जाय सुनावय काखर तीरा।
रोवत बिलखत रोजे सुनले।मात गोहार थोरक गुन ले।।

कलयुग मा नइ जीना मोला।आज बलावव दुर्गा तोला।
चुप्पे बइठे देखत दाई।अनाचार ले हे करलाई।।

मानवता ला देख भुलागे।मानुष कतका आज रुलागे।
खून खराबा बाढ़त हावै।आस तैर ले सबो लगावै।।

तँय ता सबके तारनहारी।कहे जगत तोला महतारी।
दाई कलयुग मा तँय आजा।नारी के अब लाज बचाजा।।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

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