मनहरण घनाक्षरी(कवित्त छंद)
यातायात नियम
सबझन ध्यान धरौं,लापरवाही ले डरौ,
सुग्घर धियान देके,वाहन चलाव जी।।
जीव अनमोल हवै,सुरक्षा के बोल हवै,
यातायात नियम ला,सुघर निभाव जी।।
अनहोनी होवत हे,जिनगी ल खोवत हे,
दुरघटना ले सब,जीव ला बचाव जी।।
नियम के पालन हो,धीर चले वाहन हो,
राह चलै सावधानी,सबो अपनाव जी।।
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