जयकारी छंद-श्रीमती आशा आजाद
गाँधी के अनमोल वचन
बात बेंदरा के अनमोल।बात करव जी सब झन तोल।
गाँधी जी के मंतर तीन।रहव पाप मा झन जी लीन।।
पहली बंदर मूँदे आँख।मनखे अंतस हिरदे झाँख।
सुग्घर दे दव सब सम्मान।आँखी मूदँय झन इंसान।।
दूसर बंदर कान दबाय।गारी झन ता कभू सुनाय।
देवय सबला निसदिन ज्ञान।सुनय कान सबके सम्मान।।
तीसर बंदर मुहूँ दबाय।कतका सुग्घर बात बताय।
बोलौ गुरतुर मीठा बात।सुग्घर बीते दिन अउ रात।।
मीठ प्रेम के भाखा होय।गारी पीरा ले झन रोय।
बनही कतका सुग्घर राज।नीक पहुँचही तब आवाज।।
अपने मन मा रखलव धीर।सहय कभू झन कोनो पीर।
तीन बात के रखलव ध्यान।नेक करम ले बनौ सियान।।
रचनाकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छतीसगढ़
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