Monday, 17 August 2020

सरसी छंद-रामलला के संदेश

गीत-रामलला के संदेश

अवधपुरी मा रामलला के,मंदिर के निर्माण।
अंतर मन ले श्रेष्ठ बनौ जी,होही जग कल्याण।।

प्रेम भाव ला हिरदे राखौ,कहिथे जी श्रीराम।
मानवता के राह चलौ सब,करलौ जग मा नाम।
द्वेष कपट के भाव त्याग दव,कहिथे वेद पुराण।
अंतर मन ले श्रेष्ठ बनौ जी,होही जग कल्याण।।

दीन दुखी के सेवा करबो,इही बनालौ ध्येय।
धर्म निभाके ए भुइयाँ मा,मनुज बनय उपमेय।
राम नाम के अनुपम वाणी,मन मा फूँकय प्राण।
अंतर मन ले श्रेष्ठ बनौ जी,होही जग कल्याण।।।।

लोभ मोह छिन भर के मानुष,रखौ बात के ध्यान।
मिहनत करना हे जिनगी मा,श्रेष्ठ इही हे ज्ञान।
कर्म सुघर होही तब मिलही,मनखे ला निर्वाण।
अंतर मन ले श्रेष्ठ बनौ जी,होही जग कल्याण।।

रचनाकार-आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़


कुकुभ छंद-शहीद मन के कुर्बानी

कुकुभ छंद - आशा आजाद

शहीद मन के कुर्बानी

देश प्रेम हा लहू लहू मा,दिहिन देश बर कुरबानी।
हिंदुस्तान के आजादी मा,याद रही सब बलिदानी।।

मंगल पांडे खूब लड़िस जी,सच्चा ओ क्रांतीकारी।
स्वतंत्रता संग्रामी बनके,होगे दुश्मन बर भारी।।

बिस्मिल के साहस ला जानौ,धूल ब्रिटिश ला चटाये हे।
तीस साल के उमर रहिस तब ,मरके फरज निभाये हे।।

खुदीराम के साहस बढ़के,जोश अबड़ राखै भारी।
सरकारी दफ्दर मा करदिस,बम के ओ गोला बारी।।

वीर भगत सुखदेव शूर अउ,राजगुरू हे संग्रामी।
अशफाई उल्लाह खान ला,कहिथे सच्चा सेनानी।।

वीर चन्द्रशेखर के साहस,कांड करिस ओ काकोरी।
घायल हो गिस लड़ते लड़ते,छुटिस सांस के तब डोरी।।

कहय लाजपत जेला सबझन,सच्चा ओ क्रांतिकारी।
नाव उधम सिंह साहस रखके,खूब करिस जी बम बारी।।

छंदकार - आशा आजाद
पता - 

गद्य-हमर स्वतंत्रता सेनानी

आज स्वतंत्रता दिवस के दिन भारत ला आजादी दिलाने वाला मतवाला,सच्चा सेनानी मन ला याद करत हावन जेखर कुरबानी ले भारतीय मन ला मुक्ति मिलिस हे।

1-मंगल पांडेय-मंगल पांडेय घलो एक क्रांतिकारी रहिस भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के पहिली नायक रहिन।जेखर विद्रोह के चिंगारी ले पूरा उत्तर भारत ला आग के शोला मा बदल दिये रहिस,दिल्ली मा चारो मुड़ा लाश बिछे रहिस।अंग्रेज मन अब्बड़ डर गे रिहिन अउ इही डर के कारन ओला रातो रात 8-अप्रैल 19 1857 के फाँसी मा लटका दिहिन।अंग्रेजी सासन के दमनकारी कानून एखर लिए बनाइन के कोनो अब मंगल पांडेय झन पैदा होय।

2-खुदी राम बोस-सबले नौजवान स्वतंत्रता सेनानी रहिस।स्वतंत्रता के लड़ाई के शुरुआत मा ही कूद पड़िस,बचपन ले ही देश भक्ति के भावना मा स्कूल मा अपन गुरुजी ले पिस्तौल मांग लिहिस जेखर ले मै अंग्रेज मन ला मार सकौ।16 साल मा ही ओहा पास के पुलिस स्टेशन ला बम ले उड़ा दिहिस।ए जुरुम बर 18 अगस्त 1908 के ओला अंग्रेजी सासन हा फाँसी मा चढ़ा दिहिस,ओ बखत ओ 18 साल आठ महिना के रहिस।

3-रामप्रसाद बिस्मिल
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के क्रांतिकारी धारा के एक प्रमुख सेनानी रहिस,जेला ब्रिटिश शासन के विरोध करे बर तीस साल के उमर मा 1927 के ओला फाँसी मा चढ़ा दिये गिस।राम प्रसाद बास्मिल हा काकोरी कांड ला अंजाम दिये रहिस।

4-अशफाक उल्लाह खान
भारतीय स्वतंत्रता संग्रामी के एक प्रमुख सेनानी रहिस।ओला काकोरी कांड मा बहु बड़े भूमिका निभाये के खातिर ओखर उपर अभियोग चलाइन अउ 19 सितंबर 1927 के ओला फैजाबाद जेल मा फाँसी चढ़ा दिन।

5-लाला लाजपत राय
लाला जी पंजाब केसरी के नाव ले प्रसिद्ध रहिस।भारतीय जसनल काग्रेस के लाला लाजपत राय "लाल-बाल-पाल"के तिगड़ी मा सामिल रहिस।ए तीनो झन काग्रेस के प्रमुख नेता रहिन।1914 मा इन मन ब्रिटेन अउ भारत के हालचाल ला बताये गये रहिन फेर विश्व युद्ध के कारन ले वापिस लहुटे नइ सकिन।1920 मा जब भारत आइन त जलियाँवाला बाग हत्याकांड होय रहिस ओखर विरोध मा जंग छेड़ दिहिन। ए बीच मा अंग्रेज उपर लाठी चार्ज कर दिहिन ओखर बाद अंग्रेज मन के अतियाचार ले ओ घायल हो गिस अउ लाला लाजपत राय के 17 नवंबर 1928 के मउत होगे।

5-चन्द्र शेखर आजाद
1921 मा बनारस के सत्याग्रह आंदोलन के दमन हा ओखर जिनगी बदल दिहिस।1922 मा गाँधी जी द्वारा असहयोग आंदोलन ला बंद करे के बाद ओखर विचारधारा मा बदलाव आइस अउ ओ क्रातीकारी रद्दा मा रेंगिस,ओ "हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन" के सक्रिय सदस्य बन गिस।ए संस्था ले जुड़के राम प्रसाद बिस्मिल के मार्गदर्शन मा 19 अगस्त के काकोरी कांड ला अंजाम दिहिस,अउ फरार होगे।ओखर बाद भगत सिंह के साथ लाहौर मा लाला लाजपत राय के मउत के बदला मा "साण्डर्स "के हत्या कर दिहिस।27 फरवरी 1931 मा इलाहाबाद मा"अल्फ्रेड पार्क"हा ब्रिटानी पुलिस के साथ चन्द्र शेखर आजाद ला घेर लिन अउ एखर बीच गोलीबारी होइस अउ आजाद घायल होगे।चन्द्रशेखर आजाद डटके ओखर मुकाबला करिस अउ ओखर बंदूक मा एक गोली बचे रहिस ता सरेंडर करे के बजाय ओ अपन आप ला गोली मार दिहिस।
6-वीर भगत सिंह
आजादी के लड़ाई मा राजगुरू,सुखदेव अउ भगत सिह के बहुत बड़े योगदान हे।8 अप्रैल 1929 के चन्द्रशेखर आजाद के नेतृत्व मा"पब्लिक सेफ्टी" अउ "ट्रेड डिस्प्यूट बिल"के विरोध मा सेन्ट्रल असेंबली मा बम फेके रहिन।ओखर बाद अंग्रेजी सासन हा एमन के गिरफ्तारी ला
चालू कर दिहिस। 24 मार्च 1931 के तीनो ला फाँसी के सजा सुनाए गिस,फेर पूरा देश एखर विरोध मा रहिस अउ जम्मो क्रांतिकारी मन आंदोलन करत रहिन ए जान के एक दिन पहिली अंग्रेजी सासन हा 23 मार्च 1931 के इन मन ला रातो रात फाँसी चढ़ा दिहिन।

7-सरदार उधम सिह
सरदार उधम सिंह के नांव भारत के आजादी बर पंजाब के क्रांतिकारी के रूप मा जाने जाथे13 अप्रैल1919 मा जलियाँवाला बाग हत्याकांड के समय पंजाब के जनरल गवर्नर ला "माइकल ओ हायर" ला लंडन मा जाके ओला गोली मारिस।अंग्रेज मन ओला गिरफ्तार कर "पेंटनमिले जेल मा 23 मार्च 1931 के फाँसी मा चढ़ा दिहिन।


Wednesday, 5 August 2020

मनहरण घनाक्षरी-गुरुदेव

मनहरण घनाक्षरी - आशा आजाद

गुरुदेव

छंद के विद्वान हावै,छंद गुरु कहलावै,
छंद ज्ञान बाँटत हे,सुघर विचार हे।
छंद के कक्षा चलावै,अमरित बगरावै,
छंद गुरुदेव हा जी,हमर अधार हे।
छंद संस्थापक हावै,साधक के मन भावै,
छंद ज्ञान राज बर,नेक उपहार हे।
छंद के गोठ सियानी,हावै बड़ ओ ज्ञानी,
अरुण निगम जी के,नमन सत्कार हे।।

छंदमयी गोष्ठी होवै,जुरमिल ओमा खोवै,
सुरमयी साज ले,मान ला बढ़ात हे।
छंद साधिका के वाणी,हावै सबो जी कल्याणी,
घर बइठे गुरु सबो,उनला सिखात हे।
छंद छंद छाये हवे,ज्ञान गंगा नित बहे,
गुरु शिष्य परंपरा,सबो अपनात हे।
छंद मा छंदाये हावै,साधक के मन भावै,
छंद परिवार के जी,जग गुन गात हे।।

छंदकार - आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

Monday, 3 August 2020

आभार सवैया

 विधान- 8घाव तगण (221×8)
छंद: आभार सवैया

आधार हावै सबो के ग भैया सबो कार्ड राखै बने देय जी ध्यान ।
फोटो खिचाके अँगूठा लगाके ग आधार वाला बताही सबो ज्ञान।
कोनो दिशा मा चले जाव भैया दिलाही बुता गोठ मोरे सही मान।
आधार रोजी दिलावै सुनौ कार्ड राखै उही ला मिले जानलौ धान।

पौधा लगालौ बड़ा नेक हावै इही सांस देवै चलावै सदा जान।
छैया मिले बैठ जावै सबो जी सदा पेड़ छैया ल देवै सुनौ दान।।
देवै सदा शुद्ध हावा सबो ला धुँआ ले बचावै सबो के इही प्रान।
काहे जलाये बिना सोच काटै बचालौ सबो पेड़ दे दौ इही ध्यान।

पौधा लगालौ बड़ा नेक हावै इही सांस देवै चलावै सदा जान।
छैया मिले बैठ जावै सबो जी सदा पेड़ छैया ल देवै सुनौ दान।।
देवै हवा शुद्ध ताजा रखे जी धुँआ ले बचावै सबो के इही प्रान।
काहे जलाये बिना सोच काटै बचालौ सबो पेड़ दे दौ इही ध्यान।

मोद सवैया


विधान- 5घाव भगण+मगण +सगण+गुरु
(211×5)+(222)+(112)+(गुरु)
छंद: मोद सवैया

पाँव पखारत हौ भुइयाँ ममता बसथे बोलै महतारी।
देख हवे नदियाँ कतका दिन रात बहे पानी नित भारी।
खेत म धान बने सब बोवय देवत हे सेवा नर नारी।
धान हवे सबले बढ़िया धन देवत हे मानौ सँगवारी।।

काबर फेंकत हौ पननी सब ध्यान धरौं आगी ल लगादौ।
खावत हे गरवा नइ जानय जान सबो पीड़ा ल मिटादौ।
होवत हे विष पेट मा जी कलपै तड़पै गा जीव बचादौ।
फेंकव साग न भात कभू पननी खतरा हे ये समझादौ।।

जेठ असाढ़ म साँप बिछी कतका नित रेगैं घूमत जावै।
ऊमस कारन बाहिर घूमय देखव पान पताई म लुकावै।
साँप लुकाय कहाँ नइ जानन तेखर ले पनही ला जी बिसावै।
जान बचे सब ध्यान धरौं सब सावन मा रक्षा ल बतावै।।

अरसात सवैया

अरसात सवैया -श्रीमती आशा आजाद

बोट करौ सब ध्यान धरौ सब कीमत जानव चेत लगाव जी।
राज बने सबले बढ़िया अइसे मतदान सबो कर आव जी।
लोभ कभो झन राखव जी धमकाय कभू झन देख डराव जी।
वोट करौ अधिकार मिले सब डालव ये मँय ध्यान धराव जी।

छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता -मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

मदिरा सवैया

 मदिरा सवैया
(भगण 211×7)+2

शिक्षक दे नित ज्ञान अपार बटावत हे सब ध्यान धरौ।
ज्ञान सिखावत हे सत मारग रेंगव झूठ ल आप डरौ।
विश्व चले गुरु ज्ञान म जी सुविचार रखौ सत भाव भरौं।
ज्ञान ल दान करें गढ़थे गुरु देव सही परनाम करौ।।

मीठ मया समभाव रहे नित प्रेम सबो बगरावव जी।
द्वेष कभू झन राखव जी सत मारग ला अपनावव जी।
क्रोध बड़ा नुकसान करे सब धीर ल आदत डावव जी।
प्रेम रहे हिरदे म सदा समता रस के गुन गावव जी।।

काबर तेज चलावय वाहन बाढ़त हे खतरा जानव जी।
ट्रेफिक रूल ल तोड़य जेमन चोट लगे बड़ मानव जी।
देख हवे जिनगी अनमोल धियान धरौं समझावव जी।
धीर म खीर सुनौ सब मानुष होश म वाहन चलावव

गंगोदक सवैया-माँ

गंगोदक सवैया- आशा आजाद

मान दाई के सबो ले बड़े हे महामाय दानी कहाये सुनौ।
कोख मा नौ माह राखे तभे जीव मुस्कात कोरा म आये सुनौ।
मान सम्मान देवै मया मीठ भाखा सदा माँ सिखाये सुनौ।
प्रेम शिक्षा ला देवै सदा माँ इही ज्ञान गंगा बहाये सुनौ।।

छंदकार - आशा आजाद
मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

महाभुजंग प्रयात सवैया

महाभुजंग प्रयात सवैया - आशा आजाद

करौ मात पूजा इही सान हावै सबो आज आधार माँ हा बनाये।
सबो पाँव छूवौ पखारौ गुनौ काज हावै बड़ा मान जीना सिखाये।
नवा दान देथे इही हा सुनौ मान राखौ मया मा सबो हे बँधाये।
बिना माँ सुखी कोन होही भला जान चारो मुड़ा मा मया हे समाये।

छंदकार - आशा आजाद
मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

वाम सवैया

वाम सवैया - आशा आजाद

कटावत जंगल आज सुनौ सब जीव बड़ा करलावत हावै।
सुखावत हे नदियाँ नरवा बरसा बिन जी अकुलावत जावै।
उजारत जंगल लोभ बड़ा अब पेड़ कहूँ नइ देख लगावै।
बचादव पेड़ लगादव आज प्रदूषण ले सब मुक्ति ल पावै।


वाम सवैया-(7जगण)+(1यगण)
(121×7)+(122)

किसान उठावय नाँगर ला अउ
121 , 121, 121 , 121, 1
जोतय खेत बिना सुसताए
21, 121, 121, 122

उदाहरण-
किसान उठावय नाँगर ला अउ जोतय खेत बिना सुसताए।
कभू बिजरावय घाम कभू अँगरा बरसे तन खून सुखाए।
तभो नइ मानय हार सदा करमा धुन गा मन मा मुसकाए।
असाढ़ घिरे बदरा करिया बरखा बरसे हर पीर भुलाए।।

कटावत जंगल आज सुनौ सब जीव बड़ा करलावत हावै।
सुखावत हे नदियाँ नरवा बरसा बिन जी अकुलावत जावै।
उजारत जंगल लोभ बड़ा अब पेड़ कहूँ नइ देख लगावै।
बचावव पेड़ लगादव आज प्रदूषण ले सब मुक्ति ल पावै।

बड़ा अनमोल हवे सुनलौ जिनगी ल बचावय जानव पानी।
बचालव आज सबो मिलके सबके ग बचावत हे जिंदगानी।
अटावत हे नदिया नरवा बिन पेड़ कहाँ बरसै सुन लेव कहानी।
कहूँ तरसे जल बूँद बिना अब ठानव गा बन जावव दानी।।

बड़ा अनमोल हवे सुनलौ जिनगी ल बचावय जानव पानी।
रखे अपने तन चाम ल कोमल कीमत ला अउ मोल ल जानी।
सहेजत हे मनखे नित प्यास बुझावय ओ कहलावय ज्ञानी।
कहूँ तरसे जल बूँद बिना बच जावय नीर सबो झन ठानी।।

बड़े मनभावन सावन मा महिला सब लोगन तीज मनावै।
लगावत हे सब हाथ म रंग सखी मन आज मुसकावत गावै।
सुहागिन आज सजै बड़ देखव नीक बड़ा सब लागत हावै।
धियान धरै पति नाव रटै सुमिरै वरदान सुहागिन ओ कहलावै।।

बड़ा अनमोल हवे सुनलौ जिनगी ल बचावय जानव पानी।
रखे अपने तन चाम ल कोमल मोल हवे कतका पहचानी।
सहेजत हे मनखे नित प्यास बुझावय ओ कहलावय ज्ञानी।
कहूँ तरसे जल बूँद बिना बच जावय नीर सबो झन ठानी।।

छंदकार - आशा आजाद
कोरबा छत्तीसगढ़

सुमुखी सवैया

 सुमुखी सवैया-(7घाव जगण)+(लघु+गुरु

कटावत हे बड़ पेड़ सुनौ बन जीव सबो मन रोवत हे।
प्रदूषण बाढ़त रोग लगे सबके नित सेहत खोवत हे।
सरकार करै कुछु काज भला चुपचाप इहूँ मन सोवत हे।
लुकावत चोर बने कतका लकरी वन के सब ढोवत हे।।

जवान मरे दिन रात सुनौ कतका सुन सैनिक रोज मरे।
शहीद हुये बड़ देश म जानव दुश्मन ले नइ कोय डरे। चलावत हे दिन रात म जी नित तानय अस्त्र ल देख धरे।
जवान शहीद हुए तव जी लहरावत हे ध्वज आज हरे।।

नवावँव माथ ल आज सबो भारत माँ बर सैनिक रोज मरे।
शहीद हुये बड़ देश म जानव दुश्मन ले नइ कोय डरे। चलावत हे दिन रात न देखय तानय अस्त्र ल देख धरे।
लगावँव भारत माँ जय ला लहरावत हे ध्वज आज हरे।।

सरसी छंद गीत-किसान



सरसी छंद गीत-श्रीमती आशा आजाद

ए भुइयाँ मा देव सही हे,सुनलौ हमर किसान।
भूख प्यास के ये मिटोइयाँ,धरती के भगवान।।

मिहनत करके देवय हमला,भरय अन्न भंडार।
उपजावत हे साग अन्न ला,एखर ले संसार।
घर बइठे हम सेवा पाथन,इही हवय जी सान।
ए भुइयाँ मा देव सही हे,सुनलौ हमर किसान।।

आज बड़ा व्याकुल हे जानौ,दुख हा बड़ तड़पाय।
करजा मा बुड़गे हावय जी,पीरा नही मिटाय।
चुप बइठे सरकार आज तो,तँग खेती ले मान।।
ए भुइयाँ मा देव सही हे,सुनलौ हमर किसान।।

करजा जब अब्बड़ हो जाथे,बेचत हावय खेत।
फाँसी मा झूलत हावय सब,तभो करै नइ चेत।
भूख प्यास ले निसदिन मानौ,छूटत इँखर परान।
ए भुइयाँ मा देव सही हे,सुनलौ हमर किसान।।

काला बेचय काला खाये,नही किसानी मोल।
हरलौ दुख पीरा ला जम्मो,सुनलौ सबके बोल।
सुखी रहय जम्मो किसान मन,दयँ इनला सम्मान।
ए भुइयाँ मा देव सही हे,सुनलौ हमर किसान।।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

कुकुभ छंद गीत,भारत के सेच्चे सेनानी

कुकुभ छंद गीत-भारत के सच्चे सेनानी

भारत के सच्चे सेनानी,सबका मान बढ़ाते है,
रण पर कुर्बानी से अपने,झण्डा वो फहराते है।

है शहीद कितने भारत में,कितना रक्त बहाया है,
हिंदुस्तान की शान बान में,मरकर फर्ज निभाया है,
साहस रखकर फर्ज निभाते,दुश्मन मार गिराते है,
रण पर कुर्बानी से अपने,झण्डा वो फहराते है।

घर पर बैठी घरवाली जो,अपना फर्ज निभाती है,
बच्चे उनके नित्य तरसते,पालन श्रेय उठाती है,
हुए वीरगति को सुनकर,अपना होश गवाते है,
रण पर कुर्बानी से अपने,झण्डा वो फहराते है।

जंगल झाड़ी गर्मी सर्दी, तन पर कितना सहते है,
रात रात भर जाग जाग कर,रक्षा सबकी करते है,
हम बैठै है घर पर अपने,सरहद पर सो जाते है,
रण पर कुर्बानी से अपने,झण्डा वो फहराते है।

शत्रु को घुसने ना देते,सीमा पर नजर गड़ाया है,
भूख प्यास का होश कहाँ जब,भारत पर बन आया है,
भारत माता की रक्षा को,लहूँ नेक दे जाते है,
रण पर कुर्बानी से अपने,झण्डा वो फहराते है।

रचनाकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

रोला छंद कोरोना

ला छंद - श्रीमती आशा आजाद

कोरोना हे छाय,देश मा जानौ भाई।
देख वायरस आज,मात गे अब करलाई।।
बिगड़े हे हालात,नास छिन भर मा करथे।
लग जावय ये रोग,कतक मनखे मन मरथे।।

फैलाइस हे रोग,चीन हा देखौ जानौ।
खाइन कच्चा मांस,रोग नावा पहिचानौ।।
फैलत तुरते अंग,हाथ झन जान मिलाहू।
मास्क ल पहिरौ रोज,ज्ञान के बात सिखाहू।।

भीड़ भाड़ ले दूर,रहौ ए सब बर भारी।
जन जन बगरे खूब,वायरस के बीमारी।।
मुँह मा रखौ रुमाल,साथ झन किटानु आये।
बाहिर झन जी जाव,छुवत ये रोग लगाये।।

खाँसी संग जुकाम,हवय जी इही निसानी।
गला करे हे जाम,सांस के बड़ परसानी।।
चमगादड़ अउ सांप,खाय हे चीनी मन जी।
जहर बरोबर आय,बिगड़ गे सबके तन जी।।

शहर शहर अउ गाँव,देश के जम्मो कोना।
कलपत अब्बड़ मान,देख बगरे कोरोना।।
धोवौ अपने हाथ,रोज साबुन ले भैया।
धरलौ करलौ चेत,देश के सबो रहैया।।

घर मा रखहू ध्यान,गरम पानी ला पीहू।
सतर्कता के साथ,ध्यान रखहू ता जीहू।।
करदौ पूरा बंद,चीन के खई खजाना।
बिगड़ जथे हालात,परय पाछु पछताना।

अनुसासन के रोक,आज ये लग गे हावै।
देवै सुघर सुझाव,मनुज घर भीतर जावै।
करथे हित के गोठ,संक्रमित नइ होना हे।
बाहिर ले जब आव,हाथ ला नित धोना हे।।

रोकथाम के काज,करत हे डाक्टर सुनलौ।
कहिथें जेन उपाय,ध्यान धर ओला गुनलौ।।
सर्दी छींक जुकाम,जाँच खाँसी के करहू।
रखके मनखे चेत,स्वस्थ तन मन ला रखहू।

छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

छप्पय छंद हमर बस्तर

छप्पय छंद - आशा आजाद

हमर बस्तर

बस्तर के इतिहास,बतावँव मँय हा सुनलौ।
दक्षिण कौशल नाँव,कहाये सुघ्घर गुनलौ।
काकतीय हे वंश,केन्द्र जगदलपुर हावय।
श्रद्धा हवय अपार,सुघर देवालय भावय।
मूल निवासी मन रहे,हल्बा भतरा गोंड़ जी।
हिरदे बसथे प्रेम हा,ओखर नइ हे जोड़ जी।।

झरना के बड़ रूप,गुफा हा अब्बड़ भाये।
बस्तर महल अनूप,देख मन हा मोहाये।
चित्रकूट के धार,दूध कस दिखथे भाई।
दंतेश्वरी कहाय,उहाँ कुलदेवी माई।
महल ऐतिहासिक हवे,चिन्हारी हे राज के।
कलाशिल्प बढ़के उहाँ,सुघ्घर जम्मो काज हे।।

लोक संस्कृति नीक,परंपरा मन ल भावय।
गौर नृत्य के गीत,पुरुष मिल जुलके गावय।
शैला अउ ककसार,सबो हे नाचा सुग्घर।
हल्बी भाखा नीक,कहय कश्मीर ह बस्तर।
हे घाटी कांकेर के,मन होवय आनंद जी।
सुग्घर जंगल मोह लय,मन गाये मकरंद जी।।

छंदकार - आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छग

संशोधित

छप्पय छंद - आशा आजाद

हमर बस्तर

बस्तर के इतिहास,बतावँव मँय हा सुनलौ।
दक्षिण कौशल नाँव,कहाये सुघ्घर गुनलौ।
काकतीय हे वंश,केन्द्र जगदलपुर हावय।
श्रद्धा हवय अपार,इहाँ सुघ्घर देवालय।
मूल निवासी मन रहे,हल्बा भतरा गोंड़ जी।
हिरदे बसथे प्रेम हा,ओखर नइ हे जोड़ जी।।

झरना के बड़ रूप,गुफा हा अब्बड़ भाये।
बस्तर महल अनूप,देख मन हा मोहाये।
चित्रकूट के धार,दूध कस दिखथे भाई।
दंतेश्वरी कहाय,उहाँ कुलदेवी माई।
महल ऐतिहासिक हवे,चिन्हारी हे राज के।
कलाशिल्प बढ़के उहाँ,सुघ्घर जम्मो काज हे।।

लोक संस्कृति नीक,परंपरा मन ल भावय।
गौर नृत्य के गीत,पुरुष मिल जुलके गावय।
शैला अउ ककसार,सबो हे नाचा सुग्घर।
हल्बी भाखा नीक,कहय कश्मीर ह बस्तर।
हे घाटी कांकेर के,मन होवय आनंद जी।
सुग्घर जंगल मोह लय,मन गाये मकरंद जी।।

छंदकार - आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छग

छप्यय छंद तुलसीदास

छप्पय छंद - आशा आजाद

तुलसीदास महान,महाकवि ओ कहलाइन।
दोहा रचके श्रेष्ठ,जगत के मान बढ़ाइन।
जनहित ज्ञान अपार,भक्ति के मारग चलके।
बनगिन साहित दीप,आज अउ सुघ्घर कल के।
रामचरितमानस रचिन,भक्तिभाव के धार ले।
बनिन प्रेरना दीप ओ,सुग्घर जनहित सार ले।।

रामलला हे देन,सतसई सुघ्घर लिखदिस।
हे रामाज्ञा प्रश्न,जानकी मंगल गढ़दिस।
बरवै छप्पय छंद,भाय रोला रामायण।
छंदावली लुभाय,सुघर हे धर्मा निरुपण।
बरवै रामायण लिखिन,रामभक्ति के भाव ले।
संकट मोचन ओ गढ़िन,शिव के मया लगाव ले।।

छंदकार - आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़



मुंशी प्रेमचंद दोहावली

दोहावली - आशा आजाद

मुंशी प्रेमचंद

प्रेमचंद मुंशी हवे,सकल जगत के शान।
सुघर कहानी आज भी,देवय सुघ्घर ज्ञान।।

उपन्यास मा सार हे,दय सुघ्घर संदेश।
अंतस मन निर्मल करे,सबो मिटावय क्लेश।।

अनुपम जम्मो पटकथा,गोठ करय सब पात्र।
पढ़के सबो निबंध ला,खुश होवय सब छात्र।।

नेक विचारक देश के,कहिथे सकल समाज।
तोड़व सबो कुरीति ला,इही रहिस आगाज।।

लिखिस कहानी प्रेरणा,लिखिस पूस के रात।
लागय अइसन पात्र सब,सुघर करत हे बात।।

कर्मभूमि अउ निर्मला,उपन्यास अनमोल।
रंगभूमि गोदान मा,भाव भरे हर बोल।।

विधवा विवाह पथ चलौ,त्यागौ छूआछूत।
तोड़ो दहेज के प्रथा,सच्चा बनौ सपूत।।

नाटक सुघ्घर सृष्टि हे,सचिस सुघर संग्राम।
अदबे अकबर ला लिखिस,हिंदुस्तान के नाम।।

इक्तिफाक ताकत रचिस,लेख लिखिस अनमोल।
ज्ञान सार सुघ्घर गढ़िस,पढ़ मन जावय डोल।।

सैलानी बंदर रचिस,बाल कहानी भाय।
पागल हाथी मस्त हे,पढ़ लइकन मोहाय।।

छंदकार - आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

सरसी छंद गीत

सरसी गीत छंद - श्रीमती आशा आजाद

सुघर तिहार हरेली हावै,मनखे सब मुस्काय।
नेक परब के महिमा अब्बड़,गावै खुशी मनाय।।

जम्मो अपने घर ला लीपय,चमकय सबो दुवार।
खुशी मनावय प्रेम भाव ले,सुग्घर दय व्यवहार।।
गैंती राँपा नाँगर सबला,सुग्घर सब चमकाय।
नेक परब के महिमा अब्बड़,गावै खुशी मनाय।

मीठा गुड़ के गुत्तुर चीला,इही रहय पकवान।
पूजा कुलदेवता के करथे,घर के सबो सियान।।
नाचै गावै खेलै कूदै,अब्बड़ धूम मचाय।
नेक परब के महिमा अब्बड़,गावै खुशी मनाय।

फेंकय नरियर जोर जोर ले,सुग्घर खेलय खेल।
मया बाँटथें सब आपस मा,अंतस मा रख मेल।।
जगा जगा हरियाली रहिथे,मन ला अब्बड़ भाय।
नेक परब के महिमा अब्बड़,गावै खुशी मनाय।

तुलसी के चौंरा हा अब्बड़,सुग्घर रहय लिपाय।
नदियाँ के बँजरी ला लाके,देथे उहाँ बिछाय।।
लइका मन सब गेड़ी चढ़के,खुशी म झूमत जाय।।
नेक परब के महिमा अब्बड़,गावै खुशी मनाय।

गेड़ी चढ़के मजा उड़ावय,रहिथे बड़ आनंद।
खुशहाली मा झूमै गावै,आज किसानी बंद।।
पूजा डोली के सब करथे,सुख मा रहय भुलाय।।
नेक परब के महिमा अब्बड़,गावै खुशी मनाय।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर,कोरबा,छत्तीसगढ़