गीत-रामलला के संदेश
अवधपुरी मा रामलला के,मंदिर के निर्माण।
अंतर मन ले श्रेष्ठ बनौ जी,होही जग कल्याण।।
प्रेम भाव ला हिरदे राखौ,कहिथे जी श्रीराम।
मानवता के राह चलौ सब,करलौ जग मा नाम।
द्वेष कपट के भाव त्याग दव,कहिथे वेद पुराण।
अंतर मन ले श्रेष्ठ बनौ जी,होही जग कल्याण।।
दीन दुखी के सेवा करबो,इही बनालौ ध्येय।
धर्म निभाके ए भुइयाँ मा,मनुज बनय उपमेय।
राम नाम के अनुपम वाणी,मन मा फूँकय प्राण।
अंतर मन ले श्रेष्ठ बनौ जी,होही जग कल्याण।।।।
लोभ मोह छिन भर के मानुष,रखौ बात के ध्यान।
मिहनत करना हे जिनगी मा,श्रेष्ठ इही हे ज्ञान।
कर्म सुघर होही तब मिलही,मनखे ला निर्वाण।
अंतर मन ले श्रेष्ठ बनौ जी,होही जग कल्याण।।
रचनाकार-आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़
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