Monday, 3 August 2020

वाम सवैया

वाम सवैया - आशा आजाद

कटावत जंगल आज सुनौ सब जीव बड़ा करलावत हावै।
सुखावत हे नदियाँ नरवा बरसा बिन जी अकुलावत जावै।
उजारत जंगल लोभ बड़ा अब पेड़ कहूँ नइ देख लगावै।
बचादव पेड़ लगादव आज प्रदूषण ले सब मुक्ति ल पावै।


वाम सवैया-(7जगण)+(1यगण)
(121×7)+(122)

किसान उठावय नाँगर ला अउ
121 , 121, 121 , 121, 1
जोतय खेत बिना सुसताए
21, 121, 121, 122

उदाहरण-
किसान उठावय नाँगर ला अउ जोतय खेत बिना सुसताए।
कभू बिजरावय घाम कभू अँगरा बरसे तन खून सुखाए।
तभो नइ मानय हार सदा करमा धुन गा मन मा मुसकाए।
असाढ़ घिरे बदरा करिया बरखा बरसे हर पीर भुलाए।।

कटावत जंगल आज सुनौ सब जीव बड़ा करलावत हावै।
सुखावत हे नदियाँ नरवा बरसा बिन जी अकुलावत जावै।
उजारत जंगल लोभ बड़ा अब पेड़ कहूँ नइ देख लगावै।
बचावव पेड़ लगादव आज प्रदूषण ले सब मुक्ति ल पावै।

बड़ा अनमोल हवे सुनलौ जिनगी ल बचावय जानव पानी।
बचालव आज सबो मिलके सबके ग बचावत हे जिंदगानी।
अटावत हे नदिया नरवा बिन पेड़ कहाँ बरसै सुन लेव कहानी।
कहूँ तरसे जल बूँद बिना अब ठानव गा बन जावव दानी।।

बड़ा अनमोल हवे सुनलौ जिनगी ल बचावय जानव पानी।
रखे अपने तन चाम ल कोमल कीमत ला अउ मोल ल जानी।
सहेजत हे मनखे नित प्यास बुझावय ओ कहलावय ज्ञानी।
कहूँ तरसे जल बूँद बिना बच जावय नीर सबो झन ठानी।।

बड़े मनभावन सावन मा महिला सब लोगन तीज मनावै।
लगावत हे सब हाथ म रंग सखी मन आज मुसकावत गावै।
सुहागिन आज सजै बड़ देखव नीक बड़ा सब लागत हावै।
धियान धरै पति नाव रटै सुमिरै वरदान सुहागिन ओ कहलावै।।

बड़ा अनमोल हवे सुनलौ जिनगी ल बचावय जानव पानी।
रखे अपने तन चाम ल कोमल मोल हवे कतका पहचानी।
सहेजत हे मनखे नित प्यास बुझावय ओ कहलावय ज्ञानी।
कहूँ तरसे जल बूँद बिना बच जावय नीर सबो झन ठानी।।

छंदकार - आशा आजाद
कोरबा छत्तीसगढ़

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