मदिरा सवैया
(भगण 211×7)+2
शिक्षक दे नित ज्ञान अपार बटावत हे सब ध्यान धरौ।
ज्ञान सिखावत हे सत मारग रेंगव झूठ ल आप डरौ।
विश्व चले गुरु ज्ञान म जी सुविचार रखौ सत भाव भरौं।
ज्ञान ल दान करें गढ़थे गुरु देव सही परनाम करौ।।
मीठ मया समभाव रहे नित प्रेम सबो बगरावव जी।
द्वेष कभू झन राखव जी सत मारग ला अपनावव जी।
क्रोध बड़ा नुकसान करे सब धीर ल आदत डावव जी।
प्रेम रहे हिरदे म सदा समता रस के गुन गावव जी।।
काबर तेज चलावय वाहन बाढ़त हे खतरा जानव जी।
ट्रेफिक रूल ल तोड़य जेमन चोट लगे बड़ मानव जी।
देख हवे जिनगी अनमोल धियान धरौं समझावव जी।
धीर म खीर सुनौ सब मानुष होश म वाहन चलावव
Monday, 3 August 2020
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