छप्पय छंद - आशा आजाद
तुलसीदास महान,महाकवि ओ कहलाइन।
दोहा रचके श्रेष्ठ,जगत के मान बढ़ाइन।
जनहित ज्ञान अपार,भक्ति के मारग चलके।
बनगिन साहित दीप,आज अउ सुघ्घर कल के।
रामचरितमानस रचिन,भक्तिभाव के धार ले।
बनिन प्रेरना दीप ओ,सुग्घर जनहित सार ले।।
रामलला हे देन,सतसई सुघ्घर लिखदिस।
हे रामाज्ञा प्रश्न,जानकी मंगल गढ़दिस।
बरवै छप्पय छंद,भाय रोला रामायण।
छंदावली लुभाय,सुघर हे धर्मा निरुपण।
बरवै रामायण लिखिन,रामभक्ति के भाव ले।
संकट मोचन ओ गढ़िन,शिव के मया लगाव ले।।
छंदकार - आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़
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