छत्तीसगढ़ी लोकगीत
छत्तीसगढ़ के गुत्तुर भाखा,
अड़बड़ मीठ मीठ आय।
जभे मिले संग संगवारी मन,
अड़बड़ मजा जी आय।
(1)छत्तीसगढ़ के चीला रोटी,
अड़बड़ संगी मिठाय।
संगे खावौ पताल चटनी,
मन हा अड़बड़ ललचाय।
छत्तीसगढ़ के गुत्तुर.....
(2)रतिहा के बाँचे भात संगी,
कभो नइ त फेंके जाय।
रतिहा ओला पानी मा बोरौ,
बिहनिया बासी बन जाय।
छत्तीसगढ़ के गुत्तुर....
(3)बासी मा खावौ मिरचा चटनी,
गोंदली संग म कतक मिठाय।
बासी मा भरे पानी ला संगी,
सुरूँट सुरूँट पिये जाय।
छत्तीसगढ़ के गुत्तुर....
(4)छत्तीसगढ़ के सेकवा रोटी,
रोठ मोट बनाये जाय।
दुए ठन रोटी मा हमर पेट हा,
खम खम ले भर जायं।
छत्तीसगढ़ के गुत्तुर...
(5)छत्तीसगढ़ के सोहारी रोटी,
नावाँ चउँर मा मिठाय।
ताते ताते ओला खाके संगी,
सबो रोटी के सुरता भुलाय।
छत्तीसगढ़ के गुत्तुर...
(6)छत्तीसगढ़ के ठेठरी खुरमी,
चाबे मा नई त चबाय।
ऐला खाय ले हमर मुहुँ ले,
कुरूँम कुरूँम बाजे जाय।
छत्तीसगढ़ के गुत्तुर..
(7)छत्तीसगढ़ के गुरतुर भाखा,
अड़बड़ मीठ मीठ आय।
सबो मया ले गोठियाए रे संगी,
मन हा गदगद हो जाय।
छत्तीसगढ़ के गुत्तुर....
लोकगीत रचनाकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर,मानिकपुर,छत्तीसगढ़
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