बरवै छंद
सुग्घर जीले जिनगी,हेअनमोल।
गोठ बात ला करबे,सुग्घर तोल।।1
अइसन गुरतुर भाखा,ला तँय बोल।
मया पिरित के रस ला,मीठा घोल।।2
भेद भाव ला करदे,तँय हा त्याग।
छोड़ कपट ला अंतस,मन ले जाग।।3
जगा जगा मा सुनले,बाढ़ँय नाम।
कभू न बिगड़े करबे,अइसन काम।।4
दीन दुखी ला देबे,सुग्घर हाथ।
बिगड़ी बन जावय गा,देबे साथ।।5
पाप पुन्य के रद्दा,अइसन होय।
कभो न तोर करम ले,कोनो रोय।।6
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