बरवै छंद...
छंद परिवार
छंद साधना करथे ,नितदिन जान।
ज्ञान देत हे धरलौ,सबझन ध्यान।।1
गुरु ला सबझन सुमिरौ,धरलव पाँव।
छंद साधना गुरु के,हावय छाँव।।2
भाई बहिनी रहिथे,संगे जान।
भाईचारा सुग्घर, हे सम्मान।।3
सुग्घर कक्षा होवय ,रोजे देख।
जगा जगा मा बाढ़य,पढ़लव लेख।।4
दया मया हा बहिथे,इहाँ अपार।
छंद साधना सुग्घर, नव आधार।।5
गुरु के महिमा मुख ले,नइ ता होय।
छंद सार मा डूबे,रहिथे खोय।।6
सुग्घर दीदी भैया,देवय सार।
ज्ञान ध्यान अउ सुग्घर,दय व्यवहार।।7
गुरु के सुग्घर भाखा,गुरतुर बोल।
छंद साज रस देवय,नितदिन घोल।।8
सुग्घर सबझन साधव,छंद विधान।
नित साधे ले बड़ही,अपने ज्ञान।।9
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