Tuesday, 30 July 2019

बरवै छंद

बरवै छंद

बेटी बचावव

जन जन ला ये देदव,नेक विचार।
    नोनी-बाबू एके,सम आधार।।1

लोभ मोह मा फँसके,करथे नाश।
     भ्रूण नाश ले टूटे,हे विश्वास।।2

बसे मइल ला मन के,सबझन धोय।
     पाछु पछताय करनी,करके रोय।।3

भेद मिटावय समता,एक बनाय।
     घर-घर बेटी जन्मे ,खुशी मनाय।।4

बोझ समझ के करथे,कतका पाप।
     इही जनम देवइया,नोहय श्राप।।5

धरती मा जन्मे हे,माँ अवतार।
     इही ले हावय सुग्घर, घर संसार।।6


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