बरवै छंद
बेटी बचावव
जन जन ला ये देदव,नेक विचार।
नोनी-बाबू एके,सम आधार।।1
लोभ मोह मा फँसके,करथे नाश।
भ्रूण नाश ले टूटे,हे विश्वास।।2
बसे मइल ला मन के,सबझन धोय।
पाछु पछताय करनी,करके रोय।।3
भेद मिटावय समता,एक बनाय।
घर-घर बेटी जन्मे ,खुशी मनाय।।4
बोझ समझ के करथे,कतका पाप।
इही जनम देवइया,नोहय श्राप।।5
धरती मा जन्मे हे,माँ अवतार।
इही ले हावय सुग्घर, घर संसार।।6
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