बरवै छंद- श्रीमती आशा आजाद
दिव्यांग दिवस
तन ले होय भले जी,जे दिव्यांग।
नइ जाने जी एमन,करना स्वांग।।1
सबो काम ला जानय ,येमन आज।
मिहनत ले करथे ओ,निसदिन काज।।2
हिरदे मा राखत हे ,मीठा भाव।
जीत लेय जी अइसन,जेन स्वभाव।।3
खुदे कमावय पोषय,कतका पेट।
कतको दुख पीरा ला,रखय समेट।।4
मन के होवय सुग्घर,सबला जान।
भूले झन करिहौ जी,सुन अपमान।।5
मनखे बढ़ियाँ रहिथे,सुग्घर गोठ।
असत भावना नइ हे,कहिंथो पोठ।।6
सुग्घर गुत्तुर बानी,मीठा बोल।
मानवता के रस ला,राखव घोल।।7
आघू बढ़ जावौ सब,हिम्मत लाव।
मुश्किल ला देखत ही,दूर भगाव।।8
कर्मठता ले सबझन,आघू आव।
अपने करम ले सुघ्घर,नाम कमाव।।9
रचनाकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़
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