Friday, 17 April 2020

कुकुभ छंद

कुकुभ छंद...

नक्सल हमला बंद करौ...

नक्सल हमला बंद करौ जी,सुघ्घर सुमता रखलौ जी।
प्रेम भाव हो बस भारत मा,मानवता ला धरलौ जी।।

बिन कारन सब वीर मरय जी,कतक लहू लुहान होवै।
तड़पत हे लइका मन ओखर,घरवाली बहुते रोवै।।

विपदा हे अब्बड़ सुन ले जी,जेखर सुहाग उजड़े हे।
लइका अनाथ होगे ओखर,रोवत माथा पकड़े हे।।

नक्सल मन सुनलव ए बानी,हाथ जोड़ विनती हावै।
मेल-जोल ला सुग्घर राखव,भाईचारा बढ़ जावै।।

कतका पीरा ला गोहराव,कोन कोन दुख ला बोलौं।
मातम रहिथे छाय देख जी,दिल के दुख कइसे खोलौं।।

रात-रात भर जाग जाग के,करे हमर जी रखवाली।
छोड़ अपन परिवार दूर मा,पेट रहय ओखर खाली।।

हे शहीद भारत के अइसन,झुक जावय सबके माथा।
जुग-जुग तक सहरावत हे जी,गावत हे ओखर गाथा।।

भूख प्यास ला भुला जथे जी,ऐखर कुरबानी जानौ।
सच्चा हावय सपूत देखव,वतन परस्ती ला मानौ।।

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