Friday, 17 April 2020

चौपाई छंद

चौपाई छंद

सुग्घर छत्तीसगढ़ ल मानौ ।एक नंवबर सबझन जानौ।
मिलगे दर्जा आज राज के।शान कतक सुन हमर आज के।।

छत्तीसगढ़ी गुरतुर बोली।कतक हँसी अउ जान ठिठोली।
ज्ञान बरसथे निशदिन जानौ।कतक विदूषी हावै मानौ।।

जान छब्बीस मान देश मा।बसथे मनखे कतक भेष मा।
दक्षिण कौशल राज कहाये।सुग्घर गढ़ छत्तीस समाये।।

मिलिस जगा हे नवँवा सुनलौ।कतक हवे आबादी गुनलौ।
देख छत्तीसगढ़ के माटी।केशकाल हे सुग्घर घाटी।

जान नागवंशी के बसना।देखौ सब इतिहास के रचना।
शान कलचुरी के तब सुनलौ।लड़िन ब्रिटिश ले सबझन गुनलौ।

बिकट चीज के हवे खजाना।उर्जा नगरी राज कहाना।
सोना के भंडार भरे हे।दाई कतका खान धरे हे।।

खनिज संपदा कतका जानौ।सहर कोरबा नामी मानौ।
देवभोग मा सोना दिखथे।लोहा बैलाडिला म मिलथे।।

कतक संपदा बाढ़े जानौ।सबो काज के सुविधा मानौ।
झरना झिरिया मंदिर सोहे।मया दया सब मन ला मोहे।।

जान पहाड़ी मैना हावै।राजकीय पक्षी कहलावै।
वनभैसा हे अब्बड़ मिलथे। हमर राज मा गोंदा खिलथे।

न्यायपालिका सुग्घर हावै।बिलासपुर मा मनखे जावै।
अभ्यारण हा सुग्घर भाये।धान कटोरा राज कहाये।

का-का गुन ला मँय बतलावौ।छत्तीसगढ़ के महिमा गावौ।
सुख शांति हा जम्मो आये।हमर राज सुग्घर कहलाये।।

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