छेरछेरा तिहार
संग मनाये देख लव,छेरछेरा ल आज।
सबो बिहनिया जाग के,सब निपटाथे काज।
सब निपटाथे ,काज आज जी,जुर मिल जावै।
छेरछेरा ल,घर-घर घूमत,मांगत जावै।
रोटी पीठा ,बरा सोहारी,मिलजुल खाये।
नाचत कूदत,छेरछेरा ल,संग मनाये।।
अन्न दान के मान हे,इही राज के शान।
पौष माह के आय ले,घर घर निकलय धान।
घर घर निकलय ,धान गुनौ जी,सेवा करथे।
माँग माँग के,लइका जम्मो,झोला भरथे।
घर खुशहाली,छाये रहिथे,इही शान हे।
छत्तीसगढ़ म,बड़ा मान हे,अन्न दान के।
मुर्रा लाई खाय के,बड़ा नियम हे आज,
डंडा नाचा नाचथे,गावयँ सुग्घर साज।
गावय सुग्घर,साज धान ला,सबझन हेरा।
तान लगाके,सबझन बोलय,ग छेर छेरा।
देख मनावय,दान करत हे,जुर मिल भाई।
तिल के लाड़ू,खावय सबझन,मुर्रा लाई।।
सुग्घर सिरजन सब करौ,जग के हो उद्धार।
पढ़के सबझन ज्ञान ले,इही कलम के सार।।
इही कलम के,सार करय जे,नित उजियारा।
सुग्घर कविता,गढ़ देवव जी,लागय प्यारा।।
साहित सिरजन,ज्ञान बढ़ावँय,सीखँय सबझन।
नेक सोच ले,कवि मन रचदयँ,सुग्घर सिरजन।।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
-
कुकुभ छंद भ्रष्ट नेता नेता अइसे भ्रष्ट हवय गा,अपन जेब ला भरथे जी। वोट मांग के नेता बनगे,लोभ मोह बड़ रखथे जी।। जीत जथे ता नेता मन सब,...
-
भारत सुग्घर देश हवय जी,भ्रूण नाश हत्या रोकौ। बेटी के सब मान रखौ जी,दोष बिना झन ता झोकौ।। बेटी सुग्घर घर ला राखय,मान सबो के जाने जी। घर क...
-
त्रिभंगी छंद - श्रीमती आशा आजाद लक्ष्मण मस्तुरिया,गीत रचइया,देश राज सब,छोड़ दिये। सुग्घर सब बानी,अमिट कहानी,सुग्घर तँय हा,राज किये। अमरित ला...
No comments:
Post a Comment