Wednesday, 1 April 2020

अमृतध्वनि छंद

अमृतध्वनि छंद

छेरछेरा तिहार
संग मनाये देख लव,छेरछेरा ल आज।
सबो बिहनिया जाग के,सब निपटाथे काज।
सब निपटाथे ,काज आज जी,जुर मिल जावै।
छेरछेरा ल,घर-घर घूमत,मांगत जावै।
रोटी पीठा ,बरा सोहारी,मिलजुल खाये।
नाचत कूदत,छेरछेरा ल,संग मनाये।। 

अन्न दान के मान हे,इही राज के शान।
पौष माह के आय ले,घर घर निकलय धान।
घर घर निकलय ,धान सबो झन, पूजा करथे।
माँग माँग के,लइका जम्मो,झोला भरथे।
घर खुशहाली,छाये रहिथे,इही शान हे।
छत्तीसगढ़ म,बड़ा मान हे,अन्न दान के।
मुर्रा लाई खाय के,बड़ा नियम हे आज।

डंडा नाचा नाचथे,राखय एके साज।
राखय एके,साज धान सब,कोठी हेरा।
तान लगाके सबझन बोलय,ग छेर छेरा।
देख मनावय,दान करत हे,जुर मिल भाई।
तिल के लाड़ू,खावय अउ सुन,मुर्रा लाई।।

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