चौपाई छंद
आज शरद पूर्णिमा हे संगी।मउसम देखौ रंग बिरंगी।
चंदा देखौ अब्बड़ चमके।अंतस मन हा सबके दमके।।
नाव कौमुदी व्रत कहलाये।देख शुक्लपक्ष मा हे आये।
चमकय देखौ चंदा भारी।किरन होय आजे शुभकारी।।
जन्मे लक्ष्मी आजे सुनलौ।मनोकामना ला सब गुनलौ।
व्रत होथे लइका के आजे।शुभ बेरा मा बाजा बाजे।।
नोनी आजे व्रत जे रहिथे।मिलथे सुग्घर वर सब कहिथे।
रोग दूर हो जाये सुनले।आज शरद दिन ला तँय गुनले।।
आज जागरन जम्मो करथे।हिरदे ला सब निर्मल रखथे।
रोग असाध्य सबो मिट जाथे।आज सुनौ दिन शुभ कहाथे।।
खुशहाली जी आजे आथे।दिन अइसन सुन आज कहाथे।
निर्मल मन तन सबके होवै।रोग असाध्य आजे खोवै।।
चंदा के मुख अब्बड़ भाये।ओला देखे बर सकलाये।
बारत हावै दीया बाती।शुभ बीते जी दिन अ
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