Monday, 10 May 2021

चौपाई छंद-छंद के छ

चौपाई छंद-छंद के छ 


छंद छ के मैं बात बतावौं।सुग्घर ओखर गुन ला गावौं।

गुरुगुल ये कक्षा कहलावै।रहि रहि निसदिन गुन ला गावै।।


छंद छ के सब नींव ल जानौ।दो हजार सोलह हे मानौ।

जिला भिलाई के गुन गावै।पहल उहा ले होये हावै।।


छंद ज्ञान गुरु नांव धरौं जी।अरुण निगम के पाँव परौं जी।

हिरदे निरमल बोलै बानी।छंद विधा के ओहे ज्ञानी।।


छंद साधना रोज करै जी।ज्ञान ध्यान अनमोल धरै जी।

साधक मन के गुन हे भारी।छंद ज्ञान हावै हितकारी।।


छंद आनलाइन मा होवै।कक्षा मा सब निसदिन खोवै।

नियम धरम के पालन होथे।सीखय नइ ओ कक्षा खोथे।।


छंद म नइ हे लापरवाही।कक्षा ले बाहिर ओ जाही।

होवै गुरुकुल ले उजियारा।साधक मन के हावै प्यारा।।


छंद गीत अउ सुग्घर गोष्ठी।भरथे छंद खजाना कोठी।

जिनिस जिनिस के छंद लिखाये।सबके मन ला अब्बड़ भाये।।


छंद सीखना अब्बड़ भारी।बनथे गुरु सब बारी बारी।

सुग्घर हावै भाईचारा।दीदी भैया इही अधारा।।


छंद हवे छत्तीसगढ़ी ये।पढ़ही सब अगला पीढ़ी ये।

जुग जुग के हवे चिन्हारी।छत्तीसगढ़ ह हे महतारी।।


आशा आजाद"कृति"



गीत-लाई ले संसार

गीत - दाई ले संसार


ईश्वर के अवतार दाई हे जिनगी के आधार ।

मया बाँटथे निर्मल मन ले एखर ले संसार ।।


सुघ्घर घर ला राखय दाई सुघ्घर जम्मो काम ।

भाव धरय नित सेवा के ओ दाई चारो धाम ।

पालन पोषण नित करय जी ओखर ले उद्धार ।

ईश्वर के अवतार दाई हे जिनगी के आधार ।।


जीव धरय नौ माह कोख मा मिले जन्म ले नाम ।

दूध धार ले तृप्त करय ओ सत सत हवे प्रणाम ।

जिम्मेदारी सदा निभावय दय सुघ्घर व्यवहार ।

ईश्वर के अवतार दाई हे जिनगी के आधार ।।


घर ममहाथे जइसे तुलसी घर के चारो ओर ।

मया बरोबर दाई बाँटथे नाता रखे बटोर ।

अपन ज्ञान ले करथे दाई घर ला नित अंजोर ।

ईश्वर के अवतार दाई हे जिनगी के आधार ।।


कलयुग मा बस एक दाई हे बाँटय मया समान ।

करुणा के मूरत कहलावै राखय सुघ्घर ज्ञान ।

करम धरम ले मुख नइ मोड़िस कतको होवय भार ।

ईश्वर के अवतार दाई हे जिनगी के आधार ।।




Wednesday, 28 April 2021

चौपाई छंद-आक्सीजन

चौपाई छंद-आक्सीजन कहाँ है


आक्सीजन अब ढूँढ रहे हो।मत काटों क्या पेड़ कहे हो।

वर्तमान में मानुष रोता।लोभ मोह में सबकुछ खोता।।


कलयुग का यह है संदेशा।कभी लगाया नहिं अंदेशा।

प्रतिक्षण मानुष जूझ रहा है।वृक्ष न काटों कभी कहा है।।


जीवन तो बस वृक्ष जहाँ है।आक्सीजन बस मिले वहाँ है।

आज सबक हमको लेना है।वृक्षों को जीवन देना है।।


फैल गया है ये कोरोना।आज पड़े है जीवन खोना।

तड़प तड़प कर मरते सारे।आज वायरस सबको मारे।।


कैसे मानव जीव बचाए।आक्सीजन कैसे नित लाए।

व्याकुल होकर तड़पे भारी।वर्तमान की ये लाचारी।।


कलयुग में यह संकट आया।कोरोना जन को तड़पाया।

आक्सीजन पैसो में बिकता।बिन इसके कोई न टिकता।।


प्रकृति देख चुपचाप खड़ी है।मनुज काल की विषम घड़ी है।

अब पछताए कुछ नही होता।फल वैसा पाए जो बोता।।


वृक्ष लगाना ध्येय बनाएँ।जन जन को यह बात बताएँ।

शुद्ध वायु है एक अधारा।इसे बचाना लक्ष्य हमारा।।


Wednesday, 30 December 2020

छप्पय छंद-दिसंबर ले जा ए साल

छप्पय छंद- दिसंबर ले जा


ले जा तँय ये साल, दिसंबर हावय विनती ।

कोरोना ले मौत, नही अब एखर गिनती ।।

खतरनाक ये साल, कहर ये हा बरपाइस ।

अनुशासन के रोक, रास नइ एहा आइस ।।

भारत के सब नागरिक, डर के साया मा खड़े ।

कोरोना से भय अबड़, मनुज सोच मा हे पड़े ।।


लइका के ए साल, पढ़ाई नइ हे पूरा ।

शाला जाना बंद, पाठ्यक्रम सबो अधूरा ।।

उन्नति के ये मार्ग, सुनौ कुछु नइ हे अच्छा ।

देखौ लगिस विराम, पढ़े के खोवय इच्छा ।।

ज्ञान ध्यान सब भूलथे, लइका जम्मो आज जी ।

खेलकूद मा व्यस्त हे, भूलिन पढ़ना काज जी ।।


कष्ट भरे ये साल, नही हे रोजी मानौ ।

संकट बहुत विशाल, गरीबी अब्बड़ जानौ ।

तड़पय नित्य किसान, धान के पड़गे लाले ।

बिलखत सब परिवार, विकट दिन आइस काले ।।

जन जन रोवत हे अबड़, बेकारी ले त्रस्त हे ।

नेता मन ला का फिकर, सत्ता मा ओ मस्त हे ।।


दुखी अबड़ मजदूर, परत हे आसूँ पीना ।

आय कहाँ ले होय, परत हे लांघन जीना ।।

हावय राशन कार्ड, अन्न पुरथे नइ इनला ।

बीमारी नइ पीर, भूख ले मारय मनला ।।

दीन दुखी के हाल जी, रोवत सबके नैन जी ।

स्वस्थ देह कइसे मिलय, खोइन दिन के चैन जी ।।


Wednesday, 23 December 2020

छप्पय छंद

छप्पय छंद 

प्रीत बड़ा तड़पाय,हृदय व्याकुल है मेरा।
तकती हूँ मै राह,रात से हुआ सवेंरा।।
इन नैनों को आस,नीर है झर झर बहते।
तुम दोगे आवाज,राह को हरदम तकते।
मेरे मन की यह व्यथा,सुनते सारे लोग है।
दीवानी सी फिर रही,दर्द भरा ये रोग है।।

सखियों का वह शोर,अब न भाये सजना।
भूख प्यास सब त्याग,भूल गई मैं सँवरना।।
मुझको विरह सताय,सोच में निसदिन रहती।
अश्क बने अंगार,सनम आओ ये कहती।।
मेरी है यह दुर्दशा,हर क्षण जपती नाम हूँ।
आकर मुझको थाम लो,देती ये पैगाम हूँ।।

Tuesday, 1 December 2020

दोहा-छत्तीसगढ़ राजभाषा दिवस

दोहावली - आशा आजाद"कृति


छत्तीसगढ़ राजभाखा दिवस


आज राजभाखा दिवस ,छत्तीसगढ़ म जान ।

भाखा सुघ्घर नेक हे , हमर राज के सान ।


हमर राज के ध्येय हे , होवय भाखा पोठ ।

मनखे मनखे बोल लय, सुघ्घर गुत्तुर गोठ ।।


जन जन के हिरदे बसे , छत्तीसगढ़ी बोल ।

समझौ मनखे बात ला , भाखा हे अनमोल ।।


देवौ सब सम्मान जी , सुघ्घर नित बगराव ।

हिरदे ले बोलौ सबो, राखौ सबो लगाव ।।


काहे सरमावत हवौ ,  बोले बर ए बोल ।

भाखा सुघ्घर नीक हे , अंतस रस दव घोल ।।


जनमभूमि हा हे इही , इहे करे हम कर्म ।

करमभूमि बर काज कर , सुघर निभावौ धर्म ।।


झन भूलौ उपकार ला , सुघर हमर हे राज ।

भाखा मा संदेव दव , करौ राज बर काज ।।


छंदकार- आशा आजाद"कृति"प

ता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़




Monday, 2 November 2020

मनहरण घनाक्षरी छत्तीसगढ़

मनहरण घनाक्षरी-श्रीमती आशा आजाद

छत्तीसगढ़ ला जानौ,भाखा मीठ हे मानौ।
गुत्तुर भाखा सबला,अबड़ सुहात जी।
तोर मोर बोली हावै,हँसी ठिठोली हा भावै।
दाई ददा बोलै मा जी,मन मुस्कात हे।
सब जै जोहार बोलैं,मन मधुरस घोलैं,
संस्कार भुइयाँ के जी,मया ला बढ़ात हे।
जुरमिल गोठियावौ,भाखा गीत सब गावौ,
राज के माटी हा जी,भाग चमकात हे।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

त्रिभंगी छंद लक्ष्मण मस्तुरिया

 त्रिभंगी छंद - श्रीमती आशा आजाद

लक्ष्मण मस्तुरिया,गीत रचइया,देश राज सब,छोड़ दिये।
सुग्घर सब बानी,अमिट कहानी,सुग्घर तँय हा,राज किये।
अमरित ला छोड़े,मुख ला मोड़े,रोवत सबला,छोड़ चले।
हिरदे हा रोवय,हीरा खोवय,तोर जाय ले,दिल ह जले।।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर,कोरबा,छत्तीसगढ़

Monday, 17 August 2020

सरसी छंद-रामलला के संदेश

गीत-रामलला के संदेश

अवधपुरी मा रामलला के,मंदिर के निर्माण।
अंतर मन ले श्रेष्ठ बनौ जी,होही जग कल्याण।।

प्रेम भाव ला हिरदे राखौ,कहिथे जी श्रीराम।
मानवता के राह चलौ सब,करलौ जग मा नाम।
द्वेष कपट के भाव त्याग दव,कहिथे वेद पुराण।
अंतर मन ले श्रेष्ठ बनौ जी,होही जग कल्याण।।

दीन दुखी के सेवा करबो,इही बनालौ ध्येय।
धर्म निभाके ए भुइयाँ मा,मनुज बनय उपमेय।
राम नाम के अनुपम वाणी,मन मा फूँकय प्राण।
अंतर मन ले श्रेष्ठ बनौ जी,होही जग कल्याण।।।।

लोभ मोह छिन भर के मानुष,रखौ बात के ध्यान।
मिहनत करना हे जिनगी मा,श्रेष्ठ इही हे ज्ञान।
कर्म सुघर होही तब मिलही,मनखे ला निर्वाण।
अंतर मन ले श्रेष्ठ बनौ जी,होही जग कल्याण।।

रचनाकार-आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़


कुकुभ छंद-शहीद मन के कुर्बानी

कुकुभ छंद - आशा आजाद

शहीद मन के कुर्बानी

देश प्रेम हा लहू लहू मा,दिहिन देश बर कुरबानी।
हिंदुस्तान के आजादी मा,याद रही सब बलिदानी।।

मंगल पांडे खूब लड़िस जी,सच्चा ओ क्रांतीकारी।
स्वतंत्रता संग्रामी बनके,होगे दुश्मन बर भारी।।

बिस्मिल के साहस ला जानौ,धूल ब्रिटिश ला चटाये हे।
तीस साल के उमर रहिस तब ,मरके फरज निभाये हे।।

खुदीराम के साहस बढ़के,जोश अबड़ राखै भारी।
सरकारी दफ्दर मा करदिस,बम के ओ गोला बारी।।

वीर भगत सुखदेव शूर अउ,राजगुरू हे संग्रामी।
अशफाई उल्लाह खान ला,कहिथे सच्चा सेनानी।।

वीर चन्द्रशेखर के साहस,कांड करिस ओ काकोरी।
घायल हो गिस लड़ते लड़ते,छुटिस सांस के तब डोरी।।

कहय लाजपत जेला सबझन,सच्चा ओ क्रांतिकारी।
नाव उधम सिंह साहस रखके,खूब करिस जी बम बारी।।

छंदकार - आशा आजाद
पता - 

गद्य-हमर स्वतंत्रता सेनानी

आज स्वतंत्रता दिवस के दिन भारत ला आजादी दिलाने वाला मतवाला,सच्चा सेनानी मन ला याद करत हावन जेखर कुरबानी ले भारतीय मन ला मुक्ति मिलिस हे।

1-मंगल पांडेय-मंगल पांडेय घलो एक क्रांतिकारी रहिस भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के पहिली नायक रहिन।जेखर विद्रोह के चिंगारी ले पूरा उत्तर भारत ला आग के शोला मा बदल दिये रहिस,दिल्ली मा चारो मुड़ा लाश बिछे रहिस।अंग्रेज मन अब्बड़ डर गे रिहिन अउ इही डर के कारन ओला रातो रात 8-अप्रैल 19 1857 के फाँसी मा लटका दिहिन।अंग्रेजी सासन के दमनकारी कानून एखर लिए बनाइन के कोनो अब मंगल पांडेय झन पैदा होय।

2-खुदी राम बोस-सबले नौजवान स्वतंत्रता सेनानी रहिस।स्वतंत्रता के लड़ाई के शुरुआत मा ही कूद पड़िस,बचपन ले ही देश भक्ति के भावना मा स्कूल मा अपन गुरुजी ले पिस्तौल मांग लिहिस जेखर ले मै अंग्रेज मन ला मार सकौ।16 साल मा ही ओहा पास के पुलिस स्टेशन ला बम ले उड़ा दिहिस।ए जुरुम बर 18 अगस्त 1908 के ओला अंग्रेजी सासन हा फाँसी मा चढ़ा दिहिस,ओ बखत ओ 18 साल आठ महिना के रहिस।

3-रामप्रसाद बिस्मिल
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के क्रांतिकारी धारा के एक प्रमुख सेनानी रहिस,जेला ब्रिटिश शासन के विरोध करे बर तीस साल के उमर मा 1927 के ओला फाँसी मा चढ़ा दिये गिस।राम प्रसाद बास्मिल हा काकोरी कांड ला अंजाम दिये रहिस।

4-अशफाक उल्लाह खान
भारतीय स्वतंत्रता संग्रामी के एक प्रमुख सेनानी रहिस।ओला काकोरी कांड मा बहु बड़े भूमिका निभाये के खातिर ओखर उपर अभियोग चलाइन अउ 19 सितंबर 1927 के ओला फैजाबाद जेल मा फाँसी चढ़ा दिन।

5-लाला लाजपत राय
लाला जी पंजाब केसरी के नाव ले प्रसिद्ध रहिस।भारतीय जसनल काग्रेस के लाला लाजपत राय "लाल-बाल-पाल"के तिगड़ी मा सामिल रहिस।ए तीनो झन काग्रेस के प्रमुख नेता रहिन।1914 मा इन मन ब्रिटेन अउ भारत के हालचाल ला बताये गये रहिन फेर विश्व युद्ध के कारन ले वापिस लहुटे नइ सकिन।1920 मा जब भारत आइन त जलियाँवाला बाग हत्याकांड होय रहिस ओखर विरोध मा जंग छेड़ दिहिन। ए बीच मा अंग्रेज उपर लाठी चार्ज कर दिहिन ओखर बाद अंग्रेज मन के अतियाचार ले ओ घायल हो गिस अउ लाला लाजपत राय के 17 नवंबर 1928 के मउत होगे।

5-चन्द्र शेखर आजाद
1921 मा बनारस के सत्याग्रह आंदोलन के दमन हा ओखर जिनगी बदल दिहिस।1922 मा गाँधी जी द्वारा असहयोग आंदोलन ला बंद करे के बाद ओखर विचारधारा मा बदलाव आइस अउ ओ क्रातीकारी रद्दा मा रेंगिस,ओ "हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन" के सक्रिय सदस्य बन गिस।ए संस्था ले जुड़के राम प्रसाद बिस्मिल के मार्गदर्शन मा 19 अगस्त के काकोरी कांड ला अंजाम दिहिस,अउ फरार होगे।ओखर बाद भगत सिंह के साथ लाहौर मा लाला लाजपत राय के मउत के बदला मा "साण्डर्स "के हत्या कर दिहिस।27 फरवरी 1931 मा इलाहाबाद मा"अल्फ्रेड पार्क"हा ब्रिटानी पुलिस के साथ चन्द्र शेखर आजाद ला घेर लिन अउ एखर बीच गोलीबारी होइस अउ आजाद घायल होगे।चन्द्रशेखर आजाद डटके ओखर मुकाबला करिस अउ ओखर बंदूक मा एक गोली बचे रहिस ता सरेंडर करे के बजाय ओ अपन आप ला गोली मार दिहिस।
6-वीर भगत सिंह
आजादी के लड़ाई मा राजगुरू,सुखदेव अउ भगत सिह के बहुत बड़े योगदान हे।8 अप्रैल 1929 के चन्द्रशेखर आजाद के नेतृत्व मा"पब्लिक सेफ्टी" अउ "ट्रेड डिस्प्यूट बिल"के विरोध मा सेन्ट्रल असेंबली मा बम फेके रहिन।ओखर बाद अंग्रेजी सासन हा एमन के गिरफ्तारी ला
चालू कर दिहिस। 24 मार्च 1931 के तीनो ला फाँसी के सजा सुनाए गिस,फेर पूरा देश एखर विरोध मा रहिस अउ जम्मो क्रांतिकारी मन आंदोलन करत रहिन ए जान के एक दिन पहिली अंग्रेजी सासन हा 23 मार्च 1931 के इन मन ला रातो रात फाँसी चढ़ा दिहिन।

7-सरदार उधम सिह
सरदार उधम सिंह के नांव भारत के आजादी बर पंजाब के क्रांतिकारी के रूप मा जाने जाथे13 अप्रैल1919 मा जलियाँवाला बाग हत्याकांड के समय पंजाब के जनरल गवर्नर ला "माइकल ओ हायर" ला लंडन मा जाके ओला गोली मारिस।अंग्रेज मन ओला गिरफ्तार कर "पेंटनमिले जेल मा 23 मार्च 1931 के फाँसी मा चढ़ा दिहिन।


Wednesday, 5 August 2020

मनहरण घनाक्षरी-गुरुदेव

मनहरण घनाक्षरी - आशा आजाद

गुरुदेव

छंद के विद्वान हावै,छंद गुरु कहलावै,
छंद ज्ञान बाँटत हे,सुघर विचार हे।
छंद के कक्षा चलावै,अमरित बगरावै,
छंद गुरुदेव हा जी,हमर अधार हे।
छंद संस्थापक हावै,साधक के मन भावै,
छंद ज्ञान राज बर,नेक उपहार हे।
छंद के गोठ सियानी,हावै बड़ ओ ज्ञानी,
अरुण निगम जी के,नमन सत्कार हे।।

छंदमयी गोष्ठी होवै,जुरमिल ओमा खोवै,
सुरमयी साज ले,मान ला बढ़ात हे।
छंद साधिका के वाणी,हावै सबो जी कल्याणी,
घर बइठे गुरु सबो,उनला सिखात हे।
छंद छंद छाये हवे,ज्ञान गंगा नित बहे,
गुरु शिष्य परंपरा,सबो अपनात हे।
छंद मा छंदाये हावै,साधक के मन भावै,
छंद परिवार के जी,जग गुन गात हे।।

छंदकार - आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

Monday, 3 August 2020

आभार सवैया

 विधान- 8घाव तगण (221×8)
छंद: आभार सवैया

आधार हावै सबो के ग भैया सबो कार्ड राखै बने देय जी ध्यान ।
फोटो खिचाके अँगूठा लगाके ग आधार वाला बताही सबो ज्ञान।
कोनो दिशा मा चले जाव भैया दिलाही बुता गोठ मोरे सही मान।
आधार रोजी दिलावै सुनौ कार्ड राखै उही ला मिले जानलौ धान।

पौधा लगालौ बड़ा नेक हावै इही सांस देवै चलावै सदा जान।
छैया मिले बैठ जावै सबो जी सदा पेड़ छैया ल देवै सुनौ दान।।
देवै सदा शुद्ध हावा सबो ला धुँआ ले बचावै सबो के इही प्रान।
काहे जलाये बिना सोच काटै बचालौ सबो पेड़ दे दौ इही ध्यान।

पौधा लगालौ बड़ा नेक हावै इही सांस देवै चलावै सदा जान।
छैया मिले बैठ जावै सबो जी सदा पेड़ छैया ल देवै सुनौ दान।।
देवै हवा शुद्ध ताजा रखे जी धुँआ ले बचावै सबो के इही प्रान।
काहे जलाये बिना सोच काटै बचालौ सबो पेड़ दे दौ इही ध्यान।

मोद सवैया


विधान- 5घाव भगण+मगण +सगण+गुरु
(211×5)+(222)+(112)+(गुरु)
छंद: मोद सवैया

पाँव पखारत हौ भुइयाँ ममता बसथे बोलै महतारी।
देख हवे नदियाँ कतका दिन रात बहे पानी नित भारी।
खेत म धान बने सब बोवय देवत हे सेवा नर नारी।
धान हवे सबले बढ़िया धन देवत हे मानौ सँगवारी।।

काबर फेंकत हौ पननी सब ध्यान धरौं आगी ल लगादौ।
खावत हे गरवा नइ जानय जान सबो पीड़ा ल मिटादौ।
होवत हे विष पेट मा जी कलपै तड़पै गा जीव बचादौ।
फेंकव साग न भात कभू पननी खतरा हे ये समझादौ।।

जेठ असाढ़ म साँप बिछी कतका नित रेगैं घूमत जावै।
ऊमस कारन बाहिर घूमय देखव पान पताई म लुकावै।
साँप लुकाय कहाँ नइ जानन तेखर ले पनही ला जी बिसावै।
जान बचे सब ध्यान धरौं सब सावन मा रक्षा ल बतावै।।

अरसात सवैया

अरसात सवैया -श्रीमती आशा आजाद

बोट करौ सब ध्यान धरौ सब कीमत जानव चेत लगाव जी।
राज बने सबले बढ़िया अइसे मतदान सबो कर आव जी।
लोभ कभो झन राखव जी धमकाय कभू झन देख डराव जी।
वोट करौ अधिकार मिले सब डालव ये मँय ध्यान धराव जी।

छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता -मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

मदिरा सवैया

 मदिरा सवैया
(भगण 211×7)+2

शिक्षक दे नित ज्ञान अपार बटावत हे सब ध्यान धरौ।
ज्ञान सिखावत हे सत मारग रेंगव झूठ ल आप डरौ।
विश्व चले गुरु ज्ञान म जी सुविचार रखौ सत भाव भरौं।
ज्ञान ल दान करें गढ़थे गुरु देव सही परनाम करौ।।

मीठ मया समभाव रहे नित प्रेम सबो बगरावव जी।
द्वेष कभू झन राखव जी सत मारग ला अपनावव जी।
क्रोध बड़ा नुकसान करे सब धीर ल आदत डावव जी।
प्रेम रहे हिरदे म सदा समता रस के गुन गावव जी।।

काबर तेज चलावय वाहन बाढ़त हे खतरा जानव जी।
ट्रेफिक रूल ल तोड़य जेमन चोट लगे बड़ मानव जी।
देख हवे जिनगी अनमोल धियान धरौं समझावव जी।
धीर म खीर सुनौ सब मानुष होश म वाहन चलावव

गंगोदक सवैया-माँ

गंगोदक सवैया- आशा आजाद

मान दाई के सबो ले बड़े हे महामाय दानी कहाये सुनौ।
कोख मा नौ माह राखे तभे जीव मुस्कात कोरा म आये सुनौ।
मान सम्मान देवै मया मीठ भाखा सदा माँ सिखाये सुनौ।
प्रेम शिक्षा ला देवै सदा माँ इही ज्ञान गंगा बहाये सुनौ।।

छंदकार - आशा आजाद
मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

महाभुजंग प्रयात सवैया

महाभुजंग प्रयात सवैया - आशा आजाद

करौ मात पूजा इही सान हावै सबो आज आधार माँ हा बनाये।
सबो पाँव छूवौ पखारौ गुनौ काज हावै बड़ा मान जीना सिखाये।
नवा दान देथे इही हा सुनौ मान राखौ मया मा सबो हे बँधाये।
बिना माँ सुखी कोन होही भला जान चारो मुड़ा मा मया हे समाये।

छंदकार - आशा आजाद
मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

वाम सवैया

वाम सवैया - आशा आजाद

कटावत जंगल आज सुनौ सब जीव बड़ा करलावत हावै।
सुखावत हे नदियाँ नरवा बरसा बिन जी अकुलावत जावै।
उजारत जंगल लोभ बड़ा अब पेड़ कहूँ नइ देख लगावै।
बचादव पेड़ लगादव आज प्रदूषण ले सब मुक्ति ल पावै।


वाम सवैया-(7जगण)+(1यगण)
(121×7)+(122)

किसान उठावय नाँगर ला अउ
121 , 121, 121 , 121, 1
जोतय खेत बिना सुसताए
21, 121, 121, 122

उदाहरण-
किसान उठावय नाँगर ला अउ जोतय खेत बिना सुसताए।
कभू बिजरावय घाम कभू अँगरा बरसे तन खून सुखाए।
तभो नइ मानय हार सदा करमा धुन गा मन मा मुसकाए।
असाढ़ घिरे बदरा करिया बरखा बरसे हर पीर भुलाए।।

कटावत जंगल आज सुनौ सब जीव बड़ा करलावत हावै।
सुखावत हे नदियाँ नरवा बरसा बिन जी अकुलावत जावै।
उजारत जंगल लोभ बड़ा अब पेड़ कहूँ नइ देख लगावै।
बचावव पेड़ लगादव आज प्रदूषण ले सब मुक्ति ल पावै।

बड़ा अनमोल हवे सुनलौ जिनगी ल बचावय जानव पानी।
बचालव आज सबो मिलके सबके ग बचावत हे जिंदगानी।
अटावत हे नदिया नरवा बिन पेड़ कहाँ बरसै सुन लेव कहानी।
कहूँ तरसे जल बूँद बिना अब ठानव गा बन जावव दानी।।

बड़ा अनमोल हवे सुनलौ जिनगी ल बचावय जानव पानी।
रखे अपने तन चाम ल कोमल कीमत ला अउ मोल ल जानी।
सहेजत हे मनखे नित प्यास बुझावय ओ कहलावय ज्ञानी।
कहूँ तरसे जल बूँद बिना बच जावय नीर सबो झन ठानी।।

बड़े मनभावन सावन मा महिला सब लोगन तीज मनावै।
लगावत हे सब हाथ म रंग सखी मन आज मुसकावत गावै।
सुहागिन आज सजै बड़ देखव नीक बड़ा सब लागत हावै।
धियान धरै पति नाव रटै सुमिरै वरदान सुहागिन ओ कहलावै।।

बड़ा अनमोल हवे सुनलौ जिनगी ल बचावय जानव पानी।
रखे अपने तन चाम ल कोमल मोल हवे कतका पहचानी।
सहेजत हे मनखे नित प्यास बुझावय ओ कहलावय ज्ञानी।
कहूँ तरसे जल बूँद बिना बच जावय नीर सबो झन ठानी।।

छंदकार - आशा आजाद
कोरबा छत्तीसगढ़