चौपाई छंद - आशा आजाद
छंद दिवस ला आज मनाबो,बछर पाँचवा के गुन गाबो।
शुभदिन देखौ आज कहाये,छंद छंद मा मन ह रमाये।।
छंद छ के मैं बात बतावौं,सुग्घर ओखर गुन ला गावौं।
गुरुगुल ये कक्षा कहलावै,रहि रहि निसदिन गुन ला गावै।।
छंद छ के सब नींव ल जानौ,दो हजार सोलह हे मानौ।
जिला भिलाई के गुन गावै,पहल उहा ले होये हावै।।
छंद ज्ञान गुरु नांव धरौं जी,अरुण निगम के पाँव परौं जी।
हिरदे निरमल बोलै बानी,छंद विधा के ओहे ज्ञानी।।
छंद साधना रोज करै जी,ज्ञान ध्यान अनमोल धरै जी।
साधक मन के गुन हे भारी,छंद ज्ञान हावै हितकारी।।
छंद आनलाइन मा होवै,कक्षा मा सब निसदिन खोवै।
नियम धरम के पालन होथे,सीखय नइ ओ कक्षा खोथे।
छंद म नइ हे लापरवाही,कक्षा ले बाहिर ओ जाही।
होवै गुरुकुल ले उजियारा,साधक मन के हावै प्यारा।।
छंद गीत अउ सुग्घर गोष्ठी,भरथे छंद खजाना कोठी।
जिनिस जिनिस के छंद लिखाये,सबके मन ला अब्बड़ भाये।।
छंद सीखना अब्बड़ भारी,बनथे गुरु सब बारी बारी।
सुग्घर हावै भाईचारा, दीदी भैया इही अधारा।।
छंद हवे छत्तीसगढ़ी ये,पढ़ही सब अगला पीढ़ी ये।
जुग जुग के हवे चिन्हारी,छत्तीसगढ़ ह हे महतारी।।
छंद म सौ साधक मन हावै,रोज अभ्यास कर जँचवावै।
सत्तर अस्सी छंद सिखाये,सुघर व्यवहार गुरु अपनावै।।
छंद भाव मा सबो छंदाये,साधक मन के हिरदे भाये।
अरुण निगम संस्थापक हावै,अपन माथ ला सबो नवावै।।
रचनाकार - आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़
Sunday, 26 April 2020
Saturday, 25 April 2020
कुकुभ छंद गीत
कुकुभ छंद गीत-श्रीमती आशा आजाद
छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,वीर नरायण कहलावै।
सच्चा सेनानी ओ राहिन,भारत मा गुन ला गावै।।
अंग्रेज़ी सासन ले जूझिन,अबड़ रहिन जी ओ दानी।
कुर्रूपाट मा जनम लिहिन जी,करिन देश बर अगवानी।।
बिंझवार परिवार के बेटा,आज माथ ला चमकावै।
छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,वीर नरायण कहलावै।।
नरभक्षी ओ शेर ल मारिन,ओखर पढ़लौ सब गाथा ।
अमर वीर के कुर्बानी ले,भारत के चमकिस माथा।
डरिस नही अंतस मन ले ओ,साहस सबके मन भावै।
छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,वीर नरायण कहलावै।।
बहादुरी के अब्बड़ किस्सा,देश प्रेम अउ कुर्बानी।
ब्रिटिश राज हा मान बढ़ाइस,पदवी दिन आनी बानी।
जयस्तंभ के चउक म फाँसी,तोप तान के उड़वावै।
छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,वीर नरायण कहलावै।।
बनिन स्वतंत्रता संग्रामी,याद रही ये बलिदानी।
छत्तीसगढ़ म अमर नाव हे,आज दिवस ला सब मानी।
हिरदे ले परनाम करौ जी,अइसन हीरा नइ आवै।
छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,वीर नरायण कहलावै।।
छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,वीर नरायण कहलावै।
सच्चा सेनानी ओ राहिन,भारत मा गुन ला गावै।।
अंग्रेज़ी सासन ले जूझिन,अबड़ रहिन जी ओ दानी।
कुर्रूपाट मा जनम लिहिन जी,करिन देश बर अगवानी।।
बिंझवार परिवार के बेटा,आज माथ ला चमकावै।
छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,वीर नरायण कहलावै।।
नरभक्षी ओ शेर ल मारिन,ओखर पढ़लौ सब गाथा ।
अमर वीर के कुर्बानी ले,भारत के चमकिस माथा।
डरिस नही अंतस मन ले ओ,साहस सबके मन भावै।
छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,वीर नरायण कहलावै।।
बहादुरी के अब्बड़ किस्सा,देश प्रेम अउ कुर्बानी।
ब्रिटिश राज हा मान बढ़ाइस,पदवी दिन आनी बानी।
जयस्तंभ के चउक म फाँसी,तोप तान के उड़वावै।
छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,वीर नरायण कहलावै।।
बनिन स्वतंत्रता संग्रामी,याद रही ये बलिदानी।
छत्तीसगढ़ म अमर नाव हे,आज दिवस ला सब मानी।
हिरदे ले परनाम करौ जी,अइसन हीरा नइ आवै।
छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,वीर नरायण कहलावै।।
छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़
Saturday, 18 April 2020
चौपाई छंद छत्तीसगढ़
चौपाई छंद-श्रीमती आशा आजाद
हमर छत्तीसगढ़ राज
सुग्घर छत्तीसगढ़ ल मानौ।एक नंवबर सबझन जानौ।
आज राज के दरजा मिलगे।हमर भाग हा सुग्घर खिलगे।।
छत्तीसगढ़ी गुरतुर बोली।कतक हँसी अउ जान ठिठोली।
ज्ञान बरसथे निशदिन जानौ।कतक विदूषी हावै मानौ।।
झरना झिरिया मंदिर सोहे।मया दया सब मन ला मोहे।।
दक्षिण कौशल राज कहाये।सुग्घर गढ़ छत्तीस समाये।।
जान नागवंशी के बसना।देख इतिहास के सब रचना।
ए भुइयाँ के सुग्घर माटी।केशकाल हे सुग्घर घाटी।।
बिकट चीज के हवे खजाना।उर्जा नगरी राज कहाना।
सोना के भंडार भरे हे।दाई कतका खान धरे हे।।
खनिज संपदा कतका जानौ।सहर कोरबा नामी मानौ।
देवभोग मा सोना दिखथे।लोहा बैलाडिला म मिलथे।।
जान पहाड़ी मैना हावै।राजकीय पक्षी कहलावै।
वनभैसा हे अब्बड़ मिलथे। हमर राज मा गोंदा खिलथे।।
न्यायपालिका सुग्घर हावै।बिलासपुर मा मनखे जावै।
अभ्यारण हा सुग्घर भाये।धान कटोरा राज कहाये।।
का-का गुन ला मँय बतलावौ।छत्तीसगढ़ के महिमा गावौ।
खुशहाली हा जम्मो आये।हमर राज सुग्घर कहलाये।।
लवंगलता सवैया
छंद: लवंगलता सवैया
अनाथ हवे दुख पीर सबो नित मात पिता ल पुकारत हावय।
सतावत हे दिन रात इही उन काबर छोड़ भुलावत जावय।
बिना ममता दिन रात न बीतय ये तरसैं नित रोवय गावय।
सियान हवे नइ तीर म जी भगवान घलो बड़ देख सतावय।।
न्याय कहाँ मिलथे ग कभो हम दीन दुखी मन रोवत हावन।
गरीब सहे कतका दुख झेलय काखर तीर म पीर बतावन।
सबो ठग के नित लूटत हे ग अनाज नही अब जेन ल खावन।
सरकार घलो चुप देखत हे कछु काज करे सुख ला तब पावन।।
अनाथ हवे दुख पीर सबो नित मात पिता ल पुकारत हावय।
सतावत हे दिन रात इही उन काबर छोड़ भुलावत जावय।
बिना ममता दिन रात न बीतय ये तरसैं नित रोवय गावय।
सियान हवे नइ तीर म जी भगवान घलो बड़ देख सतावय।।
न्याय कहाँ मिलथे ग कभो हम दीन दुखी मन रोवत हावन।
गरीब सहे कतका दुख झेलय काखर तीर म पीर बतावन।
सबो ठग के नित लूटत हे ग अनाज नही अब जेन ल खावन।
सरकार घलो चुप देखत हे कछु काज करे सुख ला तब पावन।।
चौपाई छंद
चौपाई छंद - श्रीमती आशा आजाद
संविधान के दिन हे आये, शुभ दिन ला सब आज मनाये।
बाबा अम्बेडकर ल जानौ, सब ले बड़का ज्ञानी मानौ।।
जात-पात के भेद मिटाके, सब मनखे ला नित अपनाके।
संविधान ले देश चलावौ, समता के अब भाव जगावौ।।
संविधान भारत के जानौ, कर्म ल अपने सुग्घर जानौ।
मत डारे के हक दिलवाए, मनखे-मनखे गुन ला गाये।।
नारी के सम्मान बढ़े जी, संविधान मा जेन गढ़े जी।
ऊँच-नीच ला झन अपनावौ, भाईचारा मन मा लावौ।।
भीमराव जी राहिन हीरा,दीन हीन के समझिन पीरा।
बाबा बौद्ध धरम अपनाके,पीर हरिन माटी मा जाके।।
संविधान ले सुमता आही, जात पात नइ राहै काही।
सुग्घर भारत अपने होही, शिक्षा के सब बीज ल बोही।।
विश्व म सबले बड़के ज्ञानी, अइसन कर दिन आज सयानी।
हिरदे मा सत्कार भरे हे, भारत के उद्धार करे हे।।
छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर, कोरबा छत्तीसगढ़
चौपाई छंद छत्तीसगढ़
चौपाई छंद-श्रीमती आशा आजाद
हमर छत्तीसगढ़ राज
सुग्घर छत्तीसगढ़ ल मानौ।एक नंवबर सबझन जानौ।
आज राज के दरजा मिलगे।हमर भाग हा सुग्घर खिलगे।।
छत्तीसगढ़ी गुरतुर बोली।कतक हँसी अउ जान ठिठोली।
ज्ञान बरसथे निशदिन जानौ।कतक विदूषी हावै मानौ।।
झरना झिरिया मंदिर सोहे।मया दया सब मन ला मोहे।।
दक्षिण कौशल राज कहाये।सुग्घर गढ़ छत्तीस समाये।।
जान नागवंशी के बसना।देख इतिहास के सब रचना।
ए भुइयाँ के सुग्घर माटी।केशकाल हे सुग्घर घाटी।।
बिकट चीज के हवे खजाना।उर्जा नगरी राज कहाना।
सोना के भंडार भरे हे।दाई कतका खान धरे हे।।
खनिज संपदा कतका जानौ।सहर कोरबा नामी मानौ।
देवभोग मा सोना दिखथे।लोहा बैलाडिला म मिलथे।।
जान पहाड़ी मैना हावै।राजकीय पक्षी कहलावै।
वनभैसा हे अब्बड़ मिलथे। हमर राज मा गोंदा खिलथे।।
न्यायपालिका सुग्घर हावै।बिलासपुर मा मनखे जावै।
अभ्यारण हा सुग्घर भाये।धान कटोरा राज कहाये।।
का-का गुन ला मँय बतलावौ।छत्तीसगढ़ के महिमा गावौ।
खुशहाली हा जम्मो आये।हमर राज सुग्घर कहलाये।।
लवंगलता सवैया
छंद: लवंगलता सवैया
अनाथ हवे दुख पीर सबो नित मात पिता ल पुकारत हावय।
सतावत हे दिन रात इही उन काबर छोड़ भुलावत जावय।
बिना ममता दिन रात न बीतय ये तरसैं नित रोवय गावय।
सियान हवे नइ तीर म जी भगवान घलो बड़ देख सतावय।।
न्याय कहाँ मिलथे ग कभो हम दीन दुखी मन रोवत हावन।
गरीब सहे कतका दुख झेलय काखर तीर म पीर बतावन।
सबो ठग के नित लूटत हे ग अनाज नही अब जेन ल खावन।
सरकार घलो चुप देखत हे कछु काज करे सुख ला तब पावन।।
अनाथ हवे दुख पीर सबो नित मात पिता ल पुकारत हावय।
सतावत हे दिन रात इही उन काबर छोड़ भुलावत जावय।
बिना ममता दिन रात न बीतय ये तरसैं नित रोवय गावय।
सियान हवे नइ तीर म जी भगवान घलो बड़ देख सतावय।।
न्याय कहाँ मिलथे ग कभो हम दीन दुखी मन रोवत हावन।
गरीब सहे कतका दुख झेलय काखर तीर म पीर बतावन।
सबो ठग के नित लूटत हे ग अनाज नही अब जेन ल खावन।
सरकार घलो चुप देखत हे कछु काज करे सुख ला तब पावन।।
छप्पय छंद
छप्पय छंद-श्रीमती आशा आजाद
(1)प्राथमिक ज्ञान*
पढ़ँलव पहिली पाठ,पाठशाला मा जाके।
बनही जी आधार,पढ़ँव सब सुग्घर गा के।।
खेलव कूदँव रोज,सँग मा भोजन खावौ।
मध्यांतर मा खेल,मजा कर सब घर जावौ।।
पहल प्राथमिक ज्ञान हा,देवँय सुग्घर सार जी।
जिनगी के सुरुवात हे,इही हवे आधार जी।।
(2)सफाई
भारत सुग्घर देश,करौ जी रोज सफाई।
चमचम रखे म सान,आज सबला समझाई।
कूड़ा सबो डलाय,जिहाँ हे कचरा दानी।
देवय जे सहयोग,उही कहरावय ज्ञानी।
परदूषण झन होय जी,इही गोठ मा सार हे।
बड़े बिमारी ले बचौ,सेहत के आधार हे।।
(3)कम्प्यूटर के ज्ञान
कम्प्यूटर के ज्ञान,आज अपनावौ भाई।
जम्मो होथे काज,देश के होत भलाई।।
होवै बुद्धि विकास,देश दुनियाँ के शिक्षा।
आनलाइन भराय,होत जे आज परीक्षा।।
जन-जन के आधार हा,इही म आज रखाय जी।
सबो आकड़ा काम के,छिन मा सब मिल जाय जी।।
(4)पलायन
झन जावव जी छोड़,हमर भारत हे भुइयाँ।
धन के छोड़व लोभ,इहाँ के जनम लेवइया।
सुग्घर आज कमाव,इहाँ सब काही हावै।
ए भुइयाँ ला छोड़,आन देश म झन जावै।।
जनम लिये ये देश मा,कर्म अपन तँय जान ले।
सुग्घर देश के नाव कर,देश धर्म पहिचान ले।।
(5)लोभ मोह
धन के लालच छोड़,धीर ला तँय हा धरले।
मिहनत मा दे ध्यान,नेक तँय रद्दा चुनले।।
होथे धीर म खीर,गोठ ला तँय पतियाले।
धर्म कर्म ला राख,दीन मन ला अपनाले।।
लोभ मोह सब त्याग दे,करथे सबला दूर जी।
मिहनत आही काम सब,जिनगी जी भरपूर जी।।
(6)साफ पानी
पानी पीयव साफ,बिमारी दूर भगाही।
गंदा होही जान,अबड़ ये रोग लगाही।।
डायरिया बड़ होय,जीव ला अपन बचावौ।
कब्ज बढ़े नित मान,जान झन रोग लगावौ।।
स्वस्थ देह बर सीख दव,करय सुरक्षा जान के।
जिनगी सुग्घर बन जही,पानी पी लयँ छान के।।
(7)रोकौ मारपीट
खून खराबा देख,आज कतका हे बढ़गे।
जन-जन बीच म देख,द्वेष मा कतका मरगे।
भाई-भाई के बीच,नही हे भाई चारा।
पइसा के बड़ लोभ,फेर बनथे हत्यारा।
क्रोध भाव हा मान लव,नाता सबला तोड़थे।
प्रेम भाव रद्दा बड़े,इही सबो ला जोड़थे।।
(8) योग करौ
योग करौ जी रोज,बिमारी दूर भगाही।
रोज उठँय सब भोर,पोठ तन आप बनाही।
ओम विलोम म ध्यान,शुद्ध फेफरा ल करही।
रहहूँ स्वस्थ निरोग,योग सब करना परही।।
सेहत हे अनमोल जी,तन ला राखव पोठ जी।
वर्तमान के दउँड़ मा,स्वस्थ रहौ ये गोठ जी।।
(9)वायु प्रदूषण
आज प्रदूषण देख,अबड़ जी रोग लगाथे।
धुँआ के भरमार,इही अंतस घुस जाथे।
करे फेफरा जाम,दमा के पीरा सहिथें।
कैंसर रोग लगाय,चिकित्सक जम्मो कहिथें।
गाड़ी मोटर कोयला,प्लांट प्रदूषण छोड़थे।
धुँआ अबड़ बगरात हे,तन भीतर ले तोड़थे।।
(10)शिक्षा अनमोल
शिक्षा के गुण जान,इही ले हो उजियारा।
एहा चारो धाम,मिटाथे सब अँधियारा।।
कतको विपदा होय,पार लग जाथे नैया।
पढ़े लिखे मा सान,बनालौ अपने छैया।।
शिक्षा आवय काम बड़,ज्ञान हवय अनमोल जी।
शिक्षक बनके ज्ञान दे,शिक्षा के रस घोल जी।।
छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़
(1)प्राथमिक ज्ञान*
पढ़ँलव पहिली पाठ,पाठशाला मा जाके।
बनही जी आधार,पढ़ँव सब सुग्घर गा के।।
खेलव कूदँव रोज,सँग मा भोजन खावौ।
मध्यांतर मा खेल,मजा कर सब घर जावौ।।
पहल प्राथमिक ज्ञान हा,देवँय सुग्घर सार जी।
जिनगी के सुरुवात हे,इही हवे आधार जी।।
(2)सफाई
भारत सुग्घर देश,करौ जी रोज सफाई।
चमचम रखे म सान,आज सबला समझाई।
कूड़ा सबो डलाय,जिहाँ हे कचरा दानी।
देवय जे सहयोग,उही कहरावय ज्ञानी।
परदूषण झन होय जी,इही गोठ मा सार हे।
बड़े बिमारी ले बचौ,सेहत के आधार हे।।
(3)कम्प्यूटर के ज्ञान
कम्प्यूटर के ज्ञान,आज अपनावौ भाई।
जम्मो होथे काज,देश के होत भलाई।।
होवै बुद्धि विकास,देश दुनियाँ के शिक्षा।
आनलाइन भराय,होत जे आज परीक्षा।।
जन-जन के आधार हा,इही म आज रखाय जी।
सबो आकड़ा काम के,छिन मा सब मिल जाय जी।।
(4)पलायन
झन जावव जी छोड़,हमर भारत हे भुइयाँ।
धन के छोड़व लोभ,इहाँ के जनम लेवइया।
सुग्घर आज कमाव,इहाँ सब काही हावै।
ए भुइयाँ ला छोड़,आन देश म झन जावै।।
जनम लिये ये देश मा,कर्म अपन तँय जान ले।
सुग्घर देश के नाव कर,देश धर्म पहिचान ले।।
(5)लोभ मोह
धन के लालच छोड़,धीर ला तँय हा धरले।
मिहनत मा दे ध्यान,नेक तँय रद्दा चुनले।।
होथे धीर म खीर,गोठ ला तँय पतियाले।
धर्म कर्म ला राख,दीन मन ला अपनाले।।
लोभ मोह सब त्याग दे,करथे सबला दूर जी।
मिहनत आही काम सब,जिनगी जी भरपूर जी।।
(6)साफ पानी
पानी पीयव साफ,बिमारी दूर भगाही।
गंदा होही जान,अबड़ ये रोग लगाही।।
डायरिया बड़ होय,जीव ला अपन बचावौ।
कब्ज बढ़े नित मान,जान झन रोग लगावौ।।
स्वस्थ देह बर सीख दव,करय सुरक्षा जान के।
जिनगी सुग्घर बन जही,पानी पी लयँ छान के।।
(7)रोकौ मारपीट
खून खराबा देख,आज कतका हे बढ़गे।
जन-जन बीच म देख,द्वेष मा कतका मरगे।
भाई-भाई के बीच,नही हे भाई चारा।
पइसा के बड़ लोभ,फेर बनथे हत्यारा।
क्रोध भाव हा मान लव,नाता सबला तोड़थे।
प्रेम भाव रद्दा बड़े,इही सबो ला जोड़थे।।
(8) योग करौ
योग करौ जी रोज,बिमारी दूर भगाही।
रोज उठँय सब भोर,पोठ तन आप बनाही।
ओम विलोम म ध्यान,शुद्ध फेफरा ल करही।
रहहूँ स्वस्थ निरोग,योग सब करना परही।।
सेहत हे अनमोल जी,तन ला राखव पोठ जी।
वर्तमान के दउँड़ मा,स्वस्थ रहौ ये गोठ जी।।
(9)वायु प्रदूषण
आज प्रदूषण देख,अबड़ जी रोग लगाथे।
धुँआ के भरमार,इही अंतस घुस जाथे।
करे फेफरा जाम,दमा के पीरा सहिथें।
कैंसर रोग लगाय,चिकित्सक जम्मो कहिथें।
गाड़ी मोटर कोयला,प्लांट प्रदूषण छोड़थे।
धुँआ अबड़ बगरात हे,तन भीतर ले तोड़थे।।
(10)शिक्षा अनमोल
शिक्षा के गुण जान,इही ले हो उजियारा।
एहा चारो धाम,मिटाथे सब अँधियारा।।
कतको विपदा होय,पार लग जाथे नैया।
पढ़े लिखे मा सान,बनालौ अपने छैया।।
शिक्षा आवय काम बड़,ज्ञान हवय अनमोल जी।
शिक्षक बनके ज्ञान दे,शिक्षा के रस घोल जी।।
छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़
मदिरा सवैया
मदिरा सवैया
(भगण 211×7)+2
शिक्षक दे नित ज्ञान अपार बटावत हे सब ध्यान धरौ।
ज्ञान सिखावत हे सत मारग रेंगव झूठ ल आप डरौ।
विश्व चले गुरु ज्ञान म जी सुविचार रखौ सत भाव भरौं।
ज्ञान ल दान करें गढ़थे गुरु देव सही परनाम करौ।।
मीठ मया समभाव रहे नित प्रेम सबो बगरावव जी।
द्वेष कभू झन राखव जी सत मारग ला अपनावव जी।
क्रोध बड़ा नुकसान करे सहना सब आदत डावव जी।
प्रेम रहे हिरदे म सदा समता रस के गुन गावव जी।।
काबर तेज चलावय वाहन बाढ़त हे खतरा जानव जी।
ट्रेफिक रूल ल तोड़य जेमन चोट लगे बड़ मानव जी।
देख हवे जिनगी अनमोल धियान धरौं समझावव जी।
धीर म खीर सुनौ सब मानुष होश म वाहन चलावव
(भगण 211×7)+2
शिक्षक दे नित ज्ञान अपार बटावत हे सब ध्यान धरौ।
ज्ञान सिखावत हे सत मारग रेंगव झूठ ल आप डरौ।
विश्व चले गुरु ज्ञान म जी सुविचार रखौ सत भाव भरौं।
ज्ञान ल दान करें गढ़थे गुरु देव सही परनाम करौ।।
मीठ मया समभाव रहे नित प्रेम सबो बगरावव जी।
द्वेष कभू झन राखव जी सत मारग ला अपनावव जी।
क्रोध बड़ा नुकसान करे सहना सब आदत डावव जी।
प्रेम रहे हिरदे म सदा समता रस के गुन गावव जी।।
काबर तेज चलावय वाहन बाढ़त हे खतरा जानव जी।
ट्रेफिक रूल ल तोड़य जेमन चोट लगे बड़ मानव जी।
देख हवे जिनगी अनमोल धियान धरौं समझावव जी।
धीर म खीर सुनौ सब मानुष होश म वाहन चलावव
आल्हा छंद
आल्हा छंद - श्रीमती आशा आजाद
कोरोना हे बड़े बीमारी।कहिथे सब कोविड उन्नीस।
बगरावत हे वायरस ल जी।अबड़ महामारी ला दीस।।
चीन देश के ये बीमारी।देश-देश मा बगरिस आज।
लाकडाउन ह होगे हावै।बंद पड़े हे सबके काज।।
नान-नान लइका मन जानै।कोरोना हावै अभिसाप।
घर के भीतर बइठे हावै।सब छोड़िन जी मेल मिलाप।।
भारत के मनखे मन ज्ञानी।जुरमिल मनखे देवै साथ।
ईश्वर ला नित घर मा पूजै।जम्मो टेकत हावै माथ।।
दूर भगे जी ये बीमारी।अनुसासन के रखलौ ध्यान।
पुलिस प्रसासन करे सुरक्षा।हिरदे ले उनला सम्मान।।
डाक्टर के सेवा ला मानौ।देत हवे सब जीवन दान।
मानवता के भाव धरे हे।नर्स सबो मन हवे महान।।
मास्क लगाना जिम्मेदारी।समझौ मनखे नेक सुजान।
एक हाथ के दूरी राखौ।बचही तब मनखे के प्रान।।
अनुसासन के पालन करलौ।धरलौ थोरक मन मा धीर।
लाकडाउन ले मिट जाही जी।बीमारी हावै गंभीर।।
छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़
कोरोना हे बड़े बीमारी।कहिथे सब कोविड उन्नीस।
बगरावत हे वायरस ल जी।अबड़ महामारी ला दीस।।
चीन देश के ये बीमारी।देश-देश मा बगरिस आज।
लाकडाउन ह होगे हावै।बंद पड़े हे सबके काज।।
नान-नान लइका मन जानै।कोरोना हावै अभिसाप।
घर के भीतर बइठे हावै।सब छोड़िन जी मेल मिलाप।।
भारत के मनखे मन ज्ञानी।जुरमिल मनखे देवै साथ।
ईश्वर ला नित घर मा पूजै।जम्मो टेकत हावै माथ।।
दूर भगे जी ये बीमारी।अनुसासन के रखलौ ध्यान।
पुलिस प्रसासन करे सुरक्षा।हिरदे ले उनला सम्मान।।
डाक्टर के सेवा ला मानौ।देत हवे सब जीवन दान।
मानवता के भाव धरे हे।नर्स सबो मन हवे महान।।
मास्क लगाना जिम्मेदारी।समझौ मनखे नेक सुजान।
एक हाथ के दूरी राखौ।बचही तब मनखे के प्रान।।
अनुसासन के पालन करलौ।धरलौ थोरक मन मा धीर।
लाकडाउन ले मिट जाही जी।बीमारी हावै गंभीर।।
छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़
Friday, 17 April 2020
कुण्डलिया छंद
कुण्डलिया छंद
शिक्षक के सम्मान हो,हावै ज्ञानाधार।
निश्छल मन सद्भावना,सत्य प्रेम के सार।।
सत्य प्रेम के सार,ज्ञान के वर्षा करथें।
ज्ञान हवय अनमोल,सदा ये जीवन गढ़थें।।
कह आशा आजाद ,देश के रचथे रक्षक।
विपदा कतको जान,पार लगोइया शिक्षक।
शिक्षक के सम्मान हो,हावै ज्ञानाधार।
निश्छल मन सद्भावना,सत्य प्रेम के सार।।
सत्य प्रेम के सार,ज्ञान के वर्षा करथें।
ज्ञान हवय अनमोल,सदा ये जीवन गढ़थें।।
कह आशा आजाद ,देश के रचथे रक्षक।
विपदा कतको जान,पार लगोइया शिक्षक।
चौपाई छंद
चौपाई छंद
मिलगे दर्जा आज राज के।शान कतक सुन हमर आज के।।
छत्तीसगढ़ी गुरतुर बोली।कतक हँसी अउ जान ठिठोली।
ज्ञान बरसथे निशदिन जानौ।कतक विदूषी हावै मानौ।।
जान छब्बीस मान देश मा।बसथे मनखे कतक भेष मा।
दक्षिण कौशल राज कहाये।सुग्घर गढ़ छत्तीस समाये।।
मिलिस जगा हे नवँवा सुनलौ।कतक हवे आबादी गुनलौ।
देख छत्तीसगढ़ के माटी।केशकाल हे सुग्घर घाटी।
जान नागवंशी के बसना।देखौ सब इतिहास के रचना।
शान कलचुरी के तब सुनलौ।लड़िन ब्रिटिश ले सबझन गुनलौ।
बिकट चीज के हवे खजाना।उर्जा नगरी राज कहाना।
सोना के भंडार भरे हे।दाई कतका खान धरे हे।।
खनिज संपदा कतका जानौ।सहर कोरबा नामी मानौ।
देवभोग मा सोना दिखथे।लोहा बैलाडिला म मिलथे।।
कतक संपदा बाढ़े जानौ।सबो काज के सुविधा मानौ।
झरना झिरिया मंदिर सोहे।मया दया सब मन ला मोहे।।
जान पहाड़ी मैना हावै।राजकीय पक्षी कहलावै।
वनभैसा हे अब्बड़ मिलथे। हमर राज मा गोंदा खिलथे।
न्यायपालिका सुग्घर हावै।बिलासपुर मा मनखे जावै।
अभ्यारण हा सुग्घर भाये।धान कटोरा राज कहाये।
का-का गुन ला मँय बतलावौ।छत्तीसगढ़ के महिमा गावौ।
सुख शांति हा जम्मो आये।हमर राज सुग्घर कहलाये।।
सरसी छंद
*सुनले मोरो गोठ*
पीयत दारू काहे संगी ,सुनले मोरो गोठ।
झन पीबे तयँ दारू संगी,गोठ करो मयँ पोठ।।
कर देथे घर बार नाश जी,हावय ये विषपान।
सुग्घर जीवन जीले मानुष,तन के गुन ला जान।।
दारू हावय जहर बरोबर,नाता सबो छुड़ाय।
घर के विपदा नइ जानय जी,सबला देय भुलाय।।
ठेनी झगरा रोज करय जी,कारन बिन रूलाय।
रद्दा चोरी के धर लेवय ,पइसा लेय लुकाय।।
बिन कारन गारी देवत हे,तयँ अपमान कमाय।
गहना जेवर सब बेचत हे,करके नशा गँवाय।।
रोवत रहिथे घरवाली हा,रोवत लइका जान।
दारू के आदत खराब हे,खो देवय पहिचान।।
संगी मनला अइसन रखबे,रद्दा नेक दिखाय।
सुग्घर जिनगी तयँ जीबे ता,जनम सफल हो जाय।।
नशा नाश के जड़ कहिथे जी,पढ़लव सब ए ज्ञान।
जम्मो रिश्ता खो डरबे तयँ,खो देबे पहिचान।।
रचनाकार-श्रीमति आशा आजाद
पता -एसइसीएल मानिकपुर कोरबा (छ.ग.)
अमृतध्वनि छंद छेरछेरा
छेरछेरा तिहार
संग मनाये देख लव,छेरछेरा ल आज।
सबो बिहनिया जाग के,सब निपटाथे काज।
सब निपटाथे ,काज आज जी,जुर मिल जावै।
छेरछेरा ल,घर-घर घूमत,मांगत जावै।
रोटी पीठा ,बरा सोहारी,मिलजुल खाये।
नाचत कूदत,छेरछेरा ल,संग मनाये।।
अन्न दान के मान हे,इही राज के शान।
पौष माह के आय ले,घर घर निकलय धान।
घर घर निकलय ,धान गुनौ जी,सेवा करथे।
माँग माँग के,लइका जम्मो,झोला भरथे।
घर खुशहाली,छाये रहिथे,इही शान हे।
छत्तीसगढ़ म,बड़ा मान हे,अन्न दान के।
मुर्रा लाई खाय के,बड़ा नियम हे आज,
डंडा नाचा नाचथे,गावयँ सुग्घर साज।
गावय सुग्घर,साज धान ला,सबझन हेरा।
तान लगाके,सबझन बोलय,ग छेर छेरा।
देख मनावय,दान करत हे,जुर मिल भाई।
तिल के लाड़ू,खावय सबझन,मुर्रा लाई।।
सुग्घर सिरजन सब करौ,जग के हो उद्धार।
पढ़के सबझन ज्ञान ले,इही कलम के सार।।
इही कलम के,सार करय जे,नित उजियारा।
सुग्घर कविता,गढ़ देवव जी,लागय प्यारा।।
साहित सिरजन,ज्ञान बढ़ावँय,सीखँय सबझन।
नेक सोच ले,कवि मन रचदयँ,सुग्घर सिरजन।।
संग मनाये देख लव,छेरछेरा ल आज।
सबो बिहनिया जाग के,सब निपटाथे काज।
सब निपटाथे ,काज आज जी,जुर मिल जावै।
छेरछेरा ल,घर-घर घूमत,मांगत जावै।
रोटी पीठा ,बरा सोहारी,मिलजुल खाये।
नाचत कूदत,छेरछेरा ल,संग मनाये।।
अन्न दान के मान हे,इही राज के शान।
पौष माह के आय ले,घर घर निकलय धान।
घर घर निकलय ,धान गुनौ जी,सेवा करथे।
माँग माँग के,लइका जम्मो,झोला भरथे।
घर खुशहाली,छाये रहिथे,इही शान हे।
छत्तीसगढ़ म,बड़ा मान हे,अन्न दान के।
मुर्रा लाई खाय के,बड़ा नियम हे आज,
डंडा नाचा नाचथे,गावयँ सुग्घर साज।
गावय सुग्घर,साज धान ला,सबझन हेरा।
तान लगाके,सबझन बोलय,ग छेर छेरा।
देख मनावय,दान करत हे,जुर मिल भाई।
तिल के लाड़ू,खावय सबझन,मुर्रा लाई।।
सुग्घर सिरजन सब करौ,जग के हो उद्धार।
पढ़के सबझन ज्ञान ले,इही कलम के सार।।
इही कलम के,सार करय जे,नित उजियारा।
सुग्घर कविता,गढ़ देवव जी,लागय प्यारा।।
साहित सिरजन,ज्ञान बढ़ावँय,सीखँय सबझन।
नेक सोच ले,कवि मन रचदयँ,सुग्घर सिरजन।।
छन्न पकैया
*छत्तीसगढ़ी रोटी पीठा*
छन्न पकैया छन्न पकैया,खई खजानी जानौ।
किसम किसम के रोटी पीठा ,हमर राज के मानौ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया,लाटा सबला भाये।
गुड़ के सँग अमली डालौ,चाट-चाट सब खाये।।
छन्न पकैया छन्न पकैया,चटनी मा खा चीला।
बेसन के कड़ही सब खालौ,दिखँय पीला पीला।।
छन्न पकैया छन्न पकैया,चाउँर अरसा खालौ।
अब्बड़ गुलगुल मीठा लागँय,गुन ओखर सब गालौ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया,अंगाकर ला जानौ।
परसा पाना ले बन जाथे,एखर गुन ला मानौ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया,स्वाद फरा के जानौ ।
नून दूध मा एहा बनथे, नून-चूरहा मानौ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया,उरिद दार मा बनथे।
बरा सबो ला अब्बड़ भावय,जम्मो ऐला चखथे।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, बोरे बासी खालौ।
सुरुट सुरुट सब पीलव पसिया ,मिरचा बुकनी डालौ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया,दही मही ला जानौ।
अम्मटहा मा कांदा भावँय,अबड़ मजा मा खालौ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया,अरसा रोटी चखलौ।
गुड़ के सँग पाक धरँय जी,हमर राज के करलौ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया,इहाँ ठेठरी बनथे ।
बेसन के बन जाथे पातर,ठुठरुम एहा बजथे।।
रचनाकार-श्रीमति आशा आजाद
पता-एसइसीएल मानिकपुर कोरबा( छ.ग)
कुकुभ छंद
कुकुभ छंद
भ्रष्ट नेता
नेता अइसे भ्रष्ट हवय गा,अपन जेब ला भरथे जी।
वोट मांग के नेता बनगे,लोभ मोह बड़ रखथे जी।।
जीत जथे ता नेता मन सब,अपने सेवा ला जानै।
लूटत हावै गरीब मन ला,बात कभू गा नइ मानै।।
मरत हवे कतको किसान मन,दुख हावय ओखर भारी।
लागा करजा मा सब बुड़गे,अइसे हावय लाचारी।।
रोजगार सब खोजत हावय,पढ़ लिख के हावय खाली ।
घूस दिये अउ मिलय नौकरी,ओखर डिग्री हे जाली।।
टूटे घर ला फूटे छानी,सबला कोन बनाही जी।
सरकारी पइसा खा जाथे,देखत रहय तबाही जी।।
जे गरीब के खुलथे खाता,जम्मो पइसा ले जाथे।
मर-मर के जीये गरीब हा,नेता अपने गुन गाथे।।
नेता मनके हवे सुवारथ,अब्बड़ पापी बनगे हे।
कोनो के कछु नइ बिगड़े जी,दुखिया सबो तड़पगे हे।।
खाता सबके खुलगे हावय,पइसा एको नइ हावै।
काटत हावय बैंक देख जी,फोकट चारज कट जावै।।
लोन सबो के खा जाथे सब, दे सरकारी हमला जी।
नजर गड़े हे नेता मनके,होवत हे सब घपला जी।।
नेता मनके भ्रष्ट काम हा,बड़े बिमारी बन गे हे।
राज-काज के लालच मा सुन,सबके माथा तन गे हे।।
भ्रष्ट नेता
नेता अइसे भ्रष्ट हवय गा,अपन जेब ला भरथे जी।
वोट मांग के नेता बनगे,लोभ मोह बड़ रखथे जी।।
जीत जथे ता नेता मन सब,अपने सेवा ला जानै।
लूटत हावै गरीब मन ला,बात कभू गा नइ मानै।।
मरत हवे कतको किसान मन,दुख हावय ओखर भारी।
लागा करजा मा सब बुड़गे,अइसे हावय लाचारी।।
रोजगार सब खोजत हावय,पढ़ लिख के हावय खाली ।
घूस दिये अउ मिलय नौकरी,ओखर डिग्री हे जाली।।
टूटे घर ला फूटे छानी,सबला कोन बनाही जी।
सरकारी पइसा खा जाथे,देखत रहय तबाही जी।।
जे गरीब के खुलथे खाता,जम्मो पइसा ले जाथे।
मर-मर के जीये गरीब हा,नेता अपने गुन गाथे।।
नेता मनके हवे सुवारथ,अब्बड़ पापी बनगे हे।
कोनो के कछु नइ बिगड़े जी,दुखिया सबो तड़पगे हे।।
खाता सबके खुलगे हावय,पइसा एको नइ हावै।
काटत हावय बैंक देख जी,फोकट चारज कट जावै।।
लोन सबो के खा जाथे सब, दे सरकारी हमला जी।
नजर गड़े हे नेता मनके,होवत हे सब घपला जी।।
नेता मनके भ्रष्ट काम हा,बड़े बिमारी बन गे हे।
राज-काज के लालच मा सुन,सबके माथा तन गे हे।।
कुकुभ छंद
कुकुभ छंद...
नक्सल हमला बंद करौ...
नक्सल हमला बंद करौ जी,सुघ्घर सुमता रखलौ जी।
प्रेम भाव हो बस भारत मा,मानवता ला धरलौ जी।।
बिन कारन सब वीर मरय जी,कतक लहू लुहान होवै।
तड़पत हे लइका मन ओखर,घरवाली बहुते रोवै।।
विपदा हे अब्बड़ सुन ले जी,जेखर सुहाग उजड़े हे।
लइका अनाथ होगे ओखर,रोवत माथा पकड़े हे।।
नक्सल मन सुनलव ए बानी,हाथ जोड़ विनती हावै।
मेल-जोल ला सुग्घर राखव,भाईचारा बढ़ जावै।।
कतका पीरा ला गोहराव,कोन कोन दुख ला बोलौं।
मातम रहिथे छाय देख जी,दिल के दुख कइसे खोलौं।।
रात-रात भर जाग जाग के,करे हमर जी रखवाली।
छोड़ अपन परिवार दूर मा,पेट रहय ओखर खाली।।
हे शहीद भारत के अइसन,झुक जावय सबके माथा।
जुग-जुग तक सहरावत हे जी,गावत हे ओखर गाथा।।
भूख प्यास ला भुला जथे जी,ऐखर कुरबानी जानौ।
सच्चा हावय सपूत देखव,वतन परस्ती ला मानौ।।
नक्सल हमला बंद करौ...
नक्सल हमला बंद करौ जी,सुघ्घर सुमता रखलौ जी।
प्रेम भाव हो बस भारत मा,मानवता ला धरलौ जी।।
बिन कारन सब वीर मरय जी,कतक लहू लुहान होवै।
तड़पत हे लइका मन ओखर,घरवाली बहुते रोवै।।
विपदा हे अब्बड़ सुन ले जी,जेखर सुहाग उजड़े हे।
लइका अनाथ होगे ओखर,रोवत माथा पकड़े हे।।
नक्सल मन सुनलव ए बानी,हाथ जोड़ विनती हावै।
मेल-जोल ला सुग्घर राखव,भाईचारा बढ़ जावै।।
कतका पीरा ला गोहराव,कोन कोन दुख ला बोलौं।
मातम रहिथे छाय देख जी,दिल के दुख कइसे खोलौं।।
रात-रात भर जाग जाग के,करे हमर जी रखवाली।
छोड़ अपन परिवार दूर मा,पेट रहय ओखर खाली।।
हे शहीद भारत के अइसन,झुक जावय सबके माथा।
जुग-जुग तक सहरावत हे जी,गावत हे ओखर गाथा।।
भूख प्यास ला भुला जथे जी,ऐखर कुरबानी जानौ।
सच्चा हावय सपूत देखव,वतन परस्ती ला मानौ।।
Thursday, 16 April 2020
सुमुखी सवैया
सुमुखी सवैया
कटावत हे बड़ पेड़ सुनौ बन जीव सबो मन रोवत हे।
प्रदूषण बाढ़त रोग लगे अपने सब सेहत खोवत हे।
सरकार करै कुछु काज भला चुपचाप इहूँ मन सोवत हे।
लुकावत चोर बने कतका लकरी वन के सब ढोवत हे।।
जवान मरे दिन रात सुनौ कतका सुन सैनिक रोज मरे।
शहीद हुये बड़ देश म जानव दुश्मन ले नइ कोय डरे।
कटावत हे बड़ पेड़ सुनौ बन जीव सबो मन रोवत हे।
प्रदूषण बाढ़त रोग लगे अपने सब सेहत खोवत हे।
सरकार करै कुछु काज भला चुपचाप इहूँ मन सोवत हे।
लुकावत चोर बने कतका लकरी वन के सब ढोवत हे।।
जवान मरे दिन रात सुनौ कतका सुन सैनिक रोज मरे।
शहीद हुये बड़ देश म जानव दुश्मन ले नइ कोय डरे।
चलावत हे दिन रात म जी नित तानय अस्त्र ल देख धरे।
जवान शहीद हुए तव जी लहरावत हे ध्वज आज हरे।।
नवावँव माथ ल आज सबो भारत माँ बर सैनिक रोज मरे।
शहीद हुये बड़ देश म जानव दुश्मन ले नइ कोय डरे।
नवावँव माथ ल आज सबो भारत माँ बर सैनिक रोज मरे।
शहीद हुये बड़ देश म जानव दुश्मन ले नइ कोय डरे।
चलावत हे दिन रात न देखय तानय अस्त्र ल देख धरे।
लगावँव भारत माँ जय ला लहरावत हे ध्वज आज हरे।।
लगावँव भारत माँ जय ला लहरावत हे ध्वज आज हरे।।
मोद सवैया
छंद: मोद सवैया
पाँव पखारत हौ भुइयाँ ममता बसथे बोलै महतारी।
देख हवे नदियाँ कतका दिन रात बहे पानी नित भारी।
खेत म धान बने सब बोवय देवत हे सेवा नर नारी।
धान हवे सबले बढ़िया धन देवत हे मानौ सँगवारी।।
काबर फेंकत हौ पननी सब ध्यान धरौं आगी ल लगादौ।
खावत हे गरवा नइ जानय जान सबो पीड़ा ल मिटादौ।
होवत हे विष पेट मा जी कलपै तड़पै गा जीव बचादौ।
फेंकव साग न भात कभू पननी खतरा हे ये समझादौ।।
जेठ असाढ़ म साँप बिछी कतका नित रेगैं घूमत जावै।
ऊमस कारन बाहिर घूमय देखव पान पताई म लुकावै।
साँप लुकाय कहाँ नइ जानन तेखर ले पनही ला जी बिसावै।
जान बचे सब ध्यान धरौं सब सावन मा रक्षा ल बतावै।।
पाँव पखारत हौ भुइयाँ ममता बसथे बोलै महतारी।
देख हवे नदियाँ कतका दिन रात बहे पानी नित भारी।
खेत म धान बने सब बोवय देवत हे सेवा नर नारी।
धान हवे सबले बढ़िया धन देवत हे मानौ सँगवारी।।
काबर फेंकत हौ पननी सब ध्यान धरौं आगी ल लगादौ।
खावत हे गरवा नइ जानय जान सबो पीड़ा ल मिटादौ।
होवत हे विष पेट मा जी कलपै तड़पै गा जीव बचादौ।
फेंकव साग न भात कभू पननी खतरा हे ये समझादौ।।
जेठ असाढ़ म साँप बिछी कतका नित रेगैं घूमत जावै।
ऊमस कारन बाहिर घूमय देखव पान पताई म लुकावै।
साँप लुकाय कहाँ नइ जानन तेखर ले पनही ला जी बिसावै।
जान बचे सब ध्यान धरौं सब सावन मा रक्षा ल बतावै।।
आभार सवैया
छंद: आभार सवैया
आधार हावै सबो के ग भैया सबो कार्ड राखै बने देय जी ध्यान ।
फोटो खिचाके अँगूठा लगाके ग आधार वाला बताही सबो ज्ञान।
कोनो दिशा मा चले जाव भैया दिलाही बुता गोठ मोरे सही मान।
आधार रोजी दिलावै सुनौ कार्ड राखै उही ला मिले जानलौ धान।
पौधा लगालौ बड़ा नेक हावै इही सांस देवै चलावै सदा जान।
छैया मिले बैठ जावै सबो जी सदा पेड़ छैया ल देवै सुनौ दान।।
देवै सदा शुद्ध हावा सबो ला धुँआ ले बचावै सबो के इही प्रान।
काहे जलाये बिना सोच काटै बचालौ सबो पेड़ दे दौ इही ध्यान।
पौधा लगालौ बड़ा नेक हावै इही सांस देवै चलावै सदा जान।
छैया मिले बैठ जावै सबो जी सदा पेड़ छैया ल देवै सुनौ दान।।
देवै हवा शुद्ध ताजा रखे जी धुँआ ले बचावै सबो के इही प्रान।
काहे जलाये बिना सोच काटै बचालौ सबो पेड़ दे दौ इही ध्यान।
आधार हावै सबो के ग भैया सबो कार्ड राखै बने देय जी ध्यान ।
फोटो खिचाके अँगूठा लगाके ग आधार वाला बताही सबो ज्ञान।
कोनो दिशा मा चले जाव भैया दिलाही बुता गोठ मोरे सही मान।
आधार रोजी दिलावै सुनौ कार्ड राखै उही ला मिले जानलौ धान।
पौधा लगालौ बड़ा नेक हावै इही सांस देवै चलावै सदा जान।
छैया मिले बैठ जावै सबो जी सदा पेड़ छैया ल देवै सुनौ दान।।
देवै सदा शुद्ध हावा सबो ला धुँआ ले बचावै सबो के इही प्रान।
काहे जलाये बिना सोच काटै बचालौ सबो पेड़ दे दौ इही ध्यान।
पौधा लगालौ बड़ा नेक हावै इही सांस देवै चलावै सदा जान।
छैया मिले बैठ जावै सबो जी सदा पेड़ छैया ल देवै सुनौ दान।।
देवै हवा शुद्ध ताजा रखे जी धुँआ ले बचावै सबो के इही प्रान।
काहे जलाये बिना सोच काटै बचालौ सबो पेड़ दे दौ इही ध्यान।
मेरा परिचय
मेरा परिचय
छत्तीसगढ़ राज्य में "छंद के छ" -छत्तीसगढ़ी छंद खजाना ब्लाग पर सम्मिलित मेरी (श्रीमती आशा आजाद) छंदबद्ध रचनाएँ।छंदबद्ध 48-रचनाएँ...
http://chhandkhajana.blogspot.com देखी जा सकती है।
छत्तीसगढ़ राज्य के छत्तीसगढ़ी छंद ब्लाग में मेरी सारी रचनाएँ इस प्रकार है...
1-http://chhandkhajana.blogspot.com/2018/07/blog-post_72.html
2-http://chhandkhajana.blogspot.com/2019/08/blog-post_16.html
3-http://chhandkhajana.blogspot.com/2019/08/blog-post.html
4-http://chhandkhajana.blogspot.com/2019/07/1_27.html
5-http://chhandkhajana.blogspot.com/2019/07/1-25.html
6-http://chhandkhajana.blogspot.com/2018/10/blog-post_24.html
7-http://chhandkhajana.blogspot.com/2018/11/blog-post.html
8-http://chhandkhajana.blogspot.com/2018/10/blog-post_15.html
9-http://chhandkhajana.blogspot.com/2018/07/blog-post_16.html
10-http://chhandkhajana.blogspot.com/2018/07/blog-post_13.html
11-http://chhandkhajana.blogspot.com/2018/10/blog-post_15.html
12-http://chhandkhajana.blogspot.com/2018/07/blog-post_3.html
13-http://chhandkhajana.blogspot.com/2018/07/blog-post_23.html
14-http://chhandkhajana.blogspot.com/2018/07/blog-post_37.html
15-http://chhandkhajana.blogspot.com/2019/11/blog-post_3.html
16-http://chhandkhajana.blogspot.com/2019/11/blog-post_5.html?m=1
17-http://chhandkhajana.blogspot.com/13-2019/11/blog-post_5.html
18-http://chhandkhajana.blogspot.com/2019/11/blog-post_26.html
19-http://chhandkhajana.blogspot.com/2019/08/blog-post_31.html
20-http://chhandkhajana.blogspot.com/2019/07/blog-post.html
21-http://chhandkhajana.blogspot.com/2019/07/1-25.html
22-http://chhandkhajana.blogspot.com/2019/04/blog-post_14.html
23-http://chhandkhajana.blogspot.com/2019/03/blog-post_21.html
24-http://chhandkhajana.blogspot.com/2019/02/blog-post.html
25-http://chhandkhajana.blogspot.com/2018/12/blog-post.html
26-http://chhandkhajana.blogspot.com/2018/11/blog-post.html
27-http://chhandkhajana.blogspot.com/2019/12/blog-post_4.html?m=1
28-http://chhandkhajana.blogspot.com/2019/12/blog-post_14.html?m=1
29-http://chhandkhajana.blogspot.com/2019/12/blog-post_10.html
30-http://chhandkhajana.blogspot.com/2019/12/2019.html?m=1
31-https://chhandkhajana.blogspot.com/2019/12/blog-post_60.html?m=1
32-https://chhandkhajana.blogspot.com/2019/12/2019_31.html?m=1
33-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/01/blog-post.html?m=1
34-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/01/blog-post_74.html?m=1
35-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/01/blog-post_10.html?m=1
36-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/01/blog-post_13.html?m=1
37-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/01/blog-post_55.html?m=1
38-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/01/blog-post_25.html?m=1
39-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/01/blog-post_26.html?m=1
40-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/02/blog-post_11.html?m=1
41-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/02/blog-post_21.html?m=1
42-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/02/blog-post_25.html?m=1
43-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/03/blog-post_4.html?m=1
44-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/03/blog-post.html?m=1
45-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/03/blog-post_94.html?m=1
46-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/03/blog-post_10.html?m=1
47-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/03/blog-post_17.html?m=1
48-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/03/blog-post_22.html?m=1
49-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/04/blog-post_12.html?m=1
50-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/04/blog-post_14.html
51-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/03/blog-post_22.html?m=1
52-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/04/blog-post_27.html?m=1
53-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/05/blog-post.html?m=1
54-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/05/blog-post_2.html?m=1
55-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/06/blog-post_5.html?m=1
56-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/06/blog-post_86.html?m=1
57-https://chhandkhajana.blogspot.com/2020/07/blog-post_20.html
58-https://chhandkhajana.blogspot.com/2020/07/blog-post_24.html
59-https://chhandkhajana.blogspot.com/2020/07/blog-post_27.html
60-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/08/blog-post_3.html
61-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/07/blog-post_29.html
62-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/08/blog-post_4.html
52-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/04/blog-post_27.html?m=1
53-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/05/blog-post.html?m=1
54-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/05/blog-post_2.html?m=1
55-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/06/blog-post_5.html?m=1
56-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/06/blog-post_86.html?m=1
57-https://chhandkhajana.blogspot.com/2020/07/blog-post_20.html
58-https://chhandkhajana.blogspot.com/2020/07/blog-post_24.html
59-https://chhandkhajana.blogspot.com/2020/07/blog-post_27.html
60-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/08/blog-post_3.html
61-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/07/blog-post_29.html
62-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/08/blog-post_4.html
Wednesday, 1 April 2020
अमृतध्वनि छंद
अमृतध्वनि छंद-श्रीमती आशा आजाद
पोरा तिहार
पोरा सुग्घर मान लौ,हावय हमर तिहार।
कृष्ण पक्ष मा आय जी,रहिथे सुग्घर सार।
रहिथे सुग्घर,सार अबड़ हे,सबझन मानौ।
नँदिया बइला,जोड़ी रहिथे,गुन ला जानौ।
संगी साथी,सब करथे जी,आज अगोरा।
छोट बड़े सब,नोनी बाबू,मानय पोरा।।1
अँगना घर ला लीपथें,खूब बने पकवान।
छत्तीसगढ़ी ठेठरी,हमर राज के सान।
हमर राज के,सान आज जी,झूमय सबझन।
मिहनत करके ,खूब कमावय,भरथें अन धन।
खुशी मनावय,किंजरय जम्मों,नइ हे बँधना।
मया बरसथे,हँसी ठिठोली,सबके अँगना।।2
चुकिया दीया देख लव,सुग्घर रंग लगाय।
लइका मन सब खेलथे,मनला अब्बड़ भाय।
मनला अब्बड़,भाय रंग मा,जाँता सजथे।
गुलगुल मीठा,अरसा रोटी,अब्बड़ बनथे।
दुख ला हर लौ,झन राहय जी,कोनो दुखिया।
मिल के राहव,घर-घर लावव,दीया चुकिया।।3
छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर, कोरबा,छत्तीसगढ़
पोरा तिहार
पोरा सुग्घर मान लौ,हावय हमर तिहार।
कृष्ण पक्ष मा आय जी,रहिथे सुग्घर सार।
रहिथे सुग्घर,सार अबड़ हे,सबझन मानौ।
नँदिया बइला,जोड़ी रहिथे,गुन ला जानौ।
संगी साथी,सब करथे जी,आज अगोरा।
छोट बड़े सब,नोनी बाबू,मानय पोरा।।1
अँगना घर ला लीपथें,खूब बने पकवान।
छत्तीसगढ़ी ठेठरी,हमर राज के सान।
हमर राज के,सान आज जी,झूमय सबझन।
मिहनत करके ,खूब कमावय,भरथें अन धन।
खुशी मनावय,किंजरय जम्मों,नइ हे बँधना।
मया बरसथे,हँसी ठिठोली,सबके अँगना।।2
चुकिया दीया देख लव,सुग्घर रंग लगाय।
लइका मन सब खेलथे,मनला अब्बड़ भाय।
मनला अब्बड़,भाय रंग मा,जाँता सजथे।
गुलगुल मीठा,अरसा रोटी,अब्बड़ बनथे।
दुख ला हर लौ,झन राहय जी,कोनो दुखिया।
मिल के राहव,घर-घर लावव,दीया चुकिया।।3
छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर, कोरबा,छत्तीसगढ़
चौपाई छंद
चौपाई छंद
आज शरद पूर्णिमा हे संगी।मउसम देखौ रंग बिरंगी।
चंदा देखौ अब्बड़ चमके।अंतस मन हा सबके दमके।।
नाव कौमुदी व्रत कहलाये।देख शुक्लपक्ष मा हे आये।
चमकय देखौ चंदा भारी।किरन होय आजे शुभकारी।।
जन्मे लक्ष्मी आजे सुनलौ।मनोकामना ला सब गुनलौ।
व्रत होथे लइका के आजे।शुभ बेरा मा बाजा बाजे।।
नोनी आजे व्रत जे रहिथे।मिलथे सुग्घर वर सब कहिथे।
रोग दूर हो जाये सुनले।आज शरद दिन ला तँय गुनले।।
आज जागरन जम्मो करथे।हिरदे ला सब निर्मल रखथे।
रोग असाध्य सबो मिट जाथे।आज सुनौ दिन शुभ कहाथे।।
खुशहाली जी आजे आथे।दिन अइसन सुन आज कहाथे।
निर्मल मन तन सबके होवै।रोग असाध्य आजे खोवै।।
चंदा के मुख अब्बड़ भाये।ओला देखे बर सकलाये।
बारत हावै दीया बाती।शुभ बीते जी दिन अ
छन्न पकैया छंद
छत्तीसगढ़ी रोटी पीठा
छन्न पकैया छन्न पकैया, छत्तीसगढ़ी जानौ।
किसम किसम के रोटी पीठा ,सुग्घर एला मानौ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया,लाटा अब्बड़ भाये।
गुड़ के संगे अमली डालौ,चाट-चाट सब खाये।।
छन्न पकैया छन्न पकैया,चटनी मा खा चीला।
बेसन के कड़ही तयँ खाले,दिखँय पीला पीला।।
छन्न पकैया छन्न पकैया,चाउँर अरसा खाले।
अब्बड़ गुलगुल मीठा लागँय,गुन ओखर तँँय गाले।।
छन्न पकैया छन्न पकैया,अंगाकर ला जानौ।
परसा पाना ले बन जाथे,एखर गुन ला मानौ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया,स्वाद फरा के जानौ ।
नून दूध मा एहा बनथे, नून-चूरहा मानौ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया,उरिद दार मा बनथे।
बरा सबो ला अब्बड़ भावय,जम्मो ऐला चखथे।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, बोरे बासी खाले।
रचनाकार-श्रीमति आशा आजाद
पता-एसइसीएल मानिकपुर कोरबा( छ.ग)
छन्न पकैया छन्न पकैया, छत्तीसगढ़ी जानौ।
किसम किसम के रोटी पीठा ,सुग्घर एला मानौ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया,लाटा अब्बड़ भाये।
गुड़ के संगे अमली डालौ,चाट-चाट सब खाये।।
छन्न पकैया छन्न पकैया,चटनी मा खा चीला।
बेसन के कड़ही तयँ खाले,दिखँय पीला पीला।।
छन्न पकैया छन्न पकैया,चाउँर अरसा खाले।
अब्बड़ गुलगुल मीठा लागँय,गुन ओखर तँँय गाले।।
छन्न पकैया छन्न पकैया,अंगाकर ला जानौ।
परसा पाना ले बन जाथे,एखर गुन ला मानौ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया,स्वाद फरा के जानौ ।
नून दूध मा एहा बनथे, नून-चूरहा मानौ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया,उरिद दार मा बनथे।
बरा सबो ला अब्बड़ भावय,जम्मो ऐला चखथे।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, बोरे बासी खाले।
सुरुट सुरुट तयँ पीले पानी ,मिरचा चटनी डाले।।
छन्न पकैया छन्न पकैया,दही मही ला जानव।
जिमी कांदा अम्मटहा म,अबड़ मजा मा खालव।।
छन्न पकैया छन्न पकैया,दही मही ला जानव।
जिमी कांदा अम्मटहा म,अबड़ मजा मा खालव।।
रचनाकार-श्रीमति आशा आजाद
पता-एसइसीएल मानिकपुर कोरबा( छ.ग)
अमृतध्वनि छंद
अमृतध्वनि छंद
छेरछेरा तिहार
संग मनाये देख लव,छेरछेरा ल आज।
सबो बिहनिया जाग के,सब निपटाथे काज।
सब निपटाथे ,काज आज जी,जुर मिल जावै।
छेरछेरा ल,घर-घर घूमत,मांगत जावै।
रोटी पीठा ,बरा सोहारी,मिलजुल खाये।
नाचत कूदत,छेरछेरा ल,संग मनाये।।
अन्न दान के मान हे,इही राज के शान।
पौष माह के आय ले,घर घर निकलय धान।
घर घर निकलय ,धान सबो झन, पूजा करथे।
माँग माँग के,लइका जम्मो,झोला भरथे।
घर खुशहाली,छाये रहिथे,इही शान हे।
छत्तीसगढ़ म,बड़ा मान हे,अन्न दान के।
डंडा नाचा नाचथे,राखय एके साज।
राखय एके,साज धान सब,कोठी हेरा।
तान लगाके सबझन बोलय,ग छेर छेरा।
देख मनावय,दान करत हे,जुर मिल भाई।
तिल के लाड़ू,खावय अउ सुन,मुर्रा लाई।।
छेरछेरा तिहार
संग मनाये देख लव,छेरछेरा ल आज।
सबो बिहनिया जाग के,सब निपटाथे काज।
सब निपटाथे ,काज आज जी,जुर मिल जावै।
छेरछेरा ल,घर-घर घूमत,मांगत जावै।
रोटी पीठा ,बरा सोहारी,मिलजुल खाये।
नाचत कूदत,छेरछेरा ल,संग मनाये।।
अन्न दान के मान हे,इही राज के शान।
पौष माह के आय ले,घर घर निकलय धान।
घर घर निकलय ,धान सबो झन, पूजा करथे।
माँग माँग के,लइका जम्मो,झोला भरथे।
घर खुशहाली,छाये रहिथे,इही शान हे।
छत्तीसगढ़ म,बड़ा मान हे,अन्न दान के।
मुर्रा लाई खाय के,बड़ा नियम हे आज।
डंडा नाचा नाचथे,राखय एके साज।
राखय एके,साज धान सब,कोठी हेरा।
तान लगाके सबझन बोलय,ग छेर छेरा।
देख मनावय,दान करत हे,जुर मिल भाई।
तिल के लाड़ू,खावय अउ सुन,मुर्रा लाई।।
वाम सवैया
वाम सवैया-श्रीमती आशा आजाद
बड़ा मनभावन लागत हे बहिनी मनहा सब तीज मनावै।
लगावत हे सब हाथ म रंग सखी मिलके मुसकावत गावै।
सुहागिन आज सजै बड़ देखव नीक सुहावन लागत हावै।
धियान धरै पति नाव रटै सुमिरै ग सुहागिन ओ कहलावै।।
बलावत हे सब तीज तिहार म भात खवाय बड़ा मन भाथे।
सबो झन प्रेम ल राखय आज सुहागिन गीत ल सुग्घर गाथे।।
अपार खुशी मइलोगन के दिन रात रखे उपवास सुहाथे।
बिहान म ये फरहार करे हर साल तिहार मया बरसाथे।।
बड़ा मनभावन लागत हे बहिनी मनहा सब तीज मनावै।
लगावत हे सब हाथ म रंग सखी मिलके मुसकावत गावै।
सुहागिन आज सजै बड़ देखव नीक सुहावन लागत हावै।
धियान धरै पति नाव रटै सुमिरै ग सुहागिन ओ कहलावै।।
बलावत हे सब तीज तिहार म भात खवाय बड़ा मन भाथे।
सबो झन प्रेम ल राखय आज सुहागिन गीत ल सुग्घर गाथे।।
अपार खुशी मइलोगन के दिन रात रखे उपवास सुहाथे।
बिहान म ये फरहार करे हर साल तिहार मया बरसाथे।।
सार छंद गीत
सार छंद गीत-श्रीमती आशा आजाद
समता हिरदे बस जाये जी,भाईचारा लावौ।
समरसता के भाव रहै जी,उजियारा बगरावौ।।
मनखे मनखे एक रहय जी,गुनलौ सुग्घर बानी।
गुरुघासीदास बबा हा जी,अबड़ राहीन ज्ञानी।
छूआछूत ला दूर भगाके,सबझन मन दमकावौ।
समता जग मा बगरावौ जी,भाईचारा लावौ।।
बाबा अम्बेडकर ह बोलिन,जात पात ला भूलौ।
सुग्घर जम्मो काज करौ जी,मन ले मन ला छूलौ।
मनुज रक्त हा एक हवे जी,मानवता अपनावौ।
समता जग मा बगरावौ जी,भाईचारा लावौ।।
गाँधी जी के नेक वचन ला,सबझन सुग्घर मानौ।
झूठ लबारी गोठ त्याग के,नेक करम पहिचानौ।
भेदभाव ला तोड़ौं जम्मो,झरखा द्वेष मिटावौ।
समता जग मा बगरावौ जी,भाईचारा लावौ।।
इँदिरा गाँधी ज्ञान देत हे,नारी साहस धरलौ।
अनाचार ले जुरमिल लड़हूँ,तन लोहा कस रखलौ।
शिक्षा के अनमोल रतन ले,जन जन मा फैलावौ।
समता जग मा बगरावौ जी,भाईचारा लावौ।।
झाँसी के रानी के हिम्मत,सबला ये सिखलाथे।
मुसकिल होवै कतको भारी,दुनियाँ ले लड़ जाथे।
अंतस हिरदे जोश जगाके,कमजोरी ल भगावौ।
समता जग मा बगरावौ जी,भाईचारा लावौ।।
छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर, कोरबा छत्तीसगढ़
समता हिरदे बस जाये जी,भाईचारा लावौ।
समरसता के भाव रहै जी,उजियारा बगरावौ।।
मनखे मनखे एक रहय जी,गुनलौ सुग्घर बानी।
गुरुघासीदास बबा हा जी,अबड़ राहीन ज्ञानी।
छूआछूत ला दूर भगाके,सबझन मन दमकावौ।
समता जग मा बगरावौ जी,भाईचारा लावौ।।
बाबा अम्बेडकर ह बोलिन,जात पात ला भूलौ।
सुग्घर जम्मो काज करौ जी,मन ले मन ला छूलौ।
मनुज रक्त हा एक हवे जी,मानवता अपनावौ।
समता जग मा बगरावौ जी,भाईचारा लावौ।।
गाँधी जी के नेक वचन ला,सबझन सुग्घर मानौ।
झूठ लबारी गोठ त्याग के,नेक करम पहिचानौ।
भेदभाव ला तोड़ौं जम्मो,झरखा द्वेष मिटावौ।
समता जग मा बगरावौ जी,भाईचारा लावौ।।
इँदिरा गाँधी ज्ञान देत हे,नारी साहस धरलौ।
अनाचार ले जुरमिल लड़हूँ,तन लोहा कस रखलौ।
शिक्षा के अनमोल रतन ले,जन जन मा फैलावौ।
समता जग मा बगरावौ जी,भाईचारा लावौ।।
झाँसी के रानी के हिम्मत,सबला ये सिखलाथे।
मुसकिल होवै कतको भारी,दुनियाँ ले लड़ जाथे।
अंतस हिरदे जोश जगाके,कमजोरी ल भगावौ।
समता जग मा बगरावौ जी,भाईचारा लावौ।।
छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर, कोरबा छत्तीसगढ़
रोला छंद
रोला छंद - श्रीमती आशा आजाद
कोरोना हे छाय,देश मा जानौ भाई।
देख वायरस आज,मात गे अब करलाई।।
बिगड़े हे हालात,नास छिन भर मा करथे।
लग जावय ये रोग,कतक मनखे मन मरथे।।
फैलाइस हे रोग,चीन हा देखौ जानौ।
खाइन कच्चा मांस,रोग नावा पहिचानौ।।
फैलत तुरते अंग,हाथ झन जान मिलाहू।
मास्क ल पहिरौ रोज,ज्ञान के बात सिखाहू।।
भीड़ भड़क्का छोड़,हवय अबड़ महामारी।
जन जन बगरे खूब,वायरस के बीमारी।।
मुँह मा रखौ रुमाल,साथ झन किटानु आये।
बाहिर झन जी जाव,छुवत ये रोग लगाये।।
खाँसी संग जुकाम,हवय जी इही निसानी।
गला करे हे जाम,सांस के बड़ परसानी।।
चमगादड़ अउ सांप,खाय हे चीनी मन जी।
जहर बरोबर मान,बिगड़ गे सबके तन जी।।
शहर शहर अउ गाँव,देश के जम्मो कोना।
कलपत अब्बड़ मान,देख बगरे कोरोना।।
धोवौ अपने हाथ,रोज साबुन ले भैया।
धरलौ करलौ चेत,देश के सबो रहैया।।
लहसुन सुघर उपाय,गरम पानी ला पीहू।
हल्दी तुलसी काट,सुघर एखर ले जीहू।।
करदौ पूरा बंद,चीन के खई खजाना।
बिगड़ जथे हालात,परय पाछु पछताना।
रोकथाम के काज,करत हे डाक्टर सुनलौ।
कहिथें जेन उपाय,ध्यान धर ओला गुनलौ।।
सर्दी छींक जुकाम,जाँच खाँसी के करहू।
रखके मनखे चेत,स्वस्थ तन मन ला रखहू।
छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़
छप्पय छंद - श्रीमती आशा आजाद
कोरोना के रोग,छाय अबड़ महामारी।
बिगड़े हे हालात,वायरस के बीमारी।।
देवय तन ल बिगाड़,बात ला मानौ भैया।
रखहू सबझन ध्यान,देश के सबो रहैया।।
खाँसी छींक जुकाम हो,जाँच करे मा ध्यान दौ।
छुवत बढ़य जी रोग हा,सबला सुग्घर ज्ञान दौ।।
मुँह मा रखौ रुमाल,मास्क ला पहिरौ भाई।
फइल जही नित जान,मातही तब करलाई।।
वायरस के प्रकोप,रात दिन बाढ़ै जानौ।
बाहिर झन जी जाव,गोठ डाक्टर के मानौ।।
हाथ मिलाके सब सुनौ,धोवव अपने हाथ जी।
रोज सावधानी रखौ,घूमौ झन नित साथ जी।
छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़
मनहरण घनाक्षरी - श्रीमती आशा आजाद
कोरोना हा बगरत हे,मानुष हा तड़पत हे
महामारी नित बाढ़ै,किटानु फैलात हे
वायरस कहिथे जी,दरद ला सहिथें जी
अंतस मा घुस के जी,बीमारी बगरात हे
चीनी मन के देन हावै,चमगादड़ सांप खावै,
सोचे नइ समझे जी ,मांस कच्चा खात हे
देश के जम्मो कोनो,बगरे हे ये कोरोना,
सावधानी राखे मा जी,रोग कट जात हे।
गरम सब पीयौ पानी,झन करौ मनमानी
सांस बड़ परसानी,लेवत हे प्रान ला
कोरोना हे छाय,देश मा जानौ भाई।
देख वायरस आज,मात गे अब करलाई।।
बिगड़े हे हालात,नास छिन भर मा करथे।
लग जावय ये रोग,कतक मनखे मन मरथे।।
फैलाइस हे रोग,चीन हा देखौ जानौ।
खाइन कच्चा मांस,रोग नावा पहिचानौ।।
फैलत तुरते अंग,हाथ झन जान मिलाहू।
मास्क ल पहिरौ रोज,ज्ञान के बात सिखाहू।।
भीड़ भड़क्का छोड़,हवय अबड़ महामारी।
जन जन बगरे खूब,वायरस के बीमारी।।
मुँह मा रखौ रुमाल,साथ झन किटानु आये।
बाहिर झन जी जाव,छुवत ये रोग लगाये।।
खाँसी संग जुकाम,हवय जी इही निसानी।
गला करे हे जाम,सांस के बड़ परसानी।।
चमगादड़ अउ सांप,खाय हे चीनी मन जी।
जहर बरोबर मान,बिगड़ गे सबके तन जी।।
शहर शहर अउ गाँव,देश के जम्मो कोना।
कलपत अब्बड़ मान,देख बगरे कोरोना।।
धोवौ अपने हाथ,रोज साबुन ले भैया।
धरलौ करलौ चेत,देश के सबो रहैया।।
लहसुन सुघर उपाय,गरम पानी ला पीहू।
हल्दी तुलसी काट,सुघर एखर ले जीहू।।
करदौ पूरा बंद,चीन के खई खजाना।
बिगड़ जथे हालात,परय पाछु पछताना।
रोकथाम के काज,करत हे डाक्टर सुनलौ।
कहिथें जेन उपाय,ध्यान धर ओला गुनलौ।।
सर्दी छींक जुकाम,जाँच खाँसी के करहू।
रखके मनखे चेत,स्वस्थ तन मन ला रखहू।
छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़
छप्पय छंद - श्रीमती आशा आजाद
कोरोना के रोग,छाय अबड़ महामारी।
बिगड़े हे हालात,वायरस के बीमारी।।
देवय तन ल बिगाड़,बात ला मानौ भैया।
रखहू सबझन ध्यान,देश के सबो रहैया।।
खाँसी छींक जुकाम हो,जाँच करे मा ध्यान दौ।
छुवत बढ़य जी रोग हा,सबला सुग्घर ज्ञान दौ।।
मुँह मा रखौ रुमाल,मास्क ला पहिरौ भाई।
फइल जही नित जान,मातही तब करलाई।।
वायरस के प्रकोप,रात दिन बाढ़ै जानौ।
बाहिर झन जी जाव,गोठ डाक्टर के मानौ।।
हाथ मिलाके सब सुनौ,धोवव अपने हाथ जी।
रोज सावधानी रखौ,घूमौ झन नित साथ जी।
छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़
मनहरण घनाक्षरी - श्रीमती आशा आजाद
कोरोना हा बगरत हे,मानुष हा तड़पत हे
महामारी नित बाढ़ै,किटानु फैलात हे
वायरस कहिथे जी,दरद ला सहिथें जी
अंतस मा घुस के जी,बीमारी बगरात हे
चीनी मन के देन हावै,चमगादड़ सांप खावै,
सोचे नइ समझे जी ,मांस कच्चा खात हे
देश के जम्मो कोनो,बगरे हे ये कोरोना,
सावधानी राखे मा जी,रोग कट जात हे।
गरम सब पीयौ पानी,झन करौ मनमानी
सांस बड़ परसानी,लेवत हे प्रान ला
Subscribe to:
Comments (Atom)
-
गीत - दाई ले संसार ईश्वर के अवतार दाई हे जिनगी के आधार । मया बाँटथे निर्मल मन ले एखर ले संसार ।। सुघ्घर घर ला राखय दाई सुघ्घर जम्मो काम । भा...
-
त्रिभंगी छंद - श्रीमती आशा आजाद लक्ष्मण मस्तुरिया,गीत रचइया,देश राज सब,छोड़ दिये। सुग्घर सब बानी,अमिट कहानी,सुग्घर तँय हा,राज किये। अमरित ला...
-
विधाता छंद 122×4 जिहाँ कलकल बहय नदियाँँ,उही हा राज हमर हावै। जिहाँ हे मीठ रस भाखा,उही हा मान हमर हावै, कहयँ छत्तीसगढ़ माटी,बड़ा ममहात राहय जी,...