Sunday, 5 August 2018

आशा के आल्हा छंद...सुनले दुश्मन


सुनले दुश्मन मोर देश के,अबड़ मोर हिम्मत हे जान।
दुश्मन ला मँय मार गिराहूँ,अतका मोरे हावँय शान।।

मँय झाँसी के रानी आवँव,दुश्मन ला सब मार गिराँव।
बुरी नजर जे डाले सुनलव,नारी मनला न्याय दिलाँव।।

कहे मदर टेरेसा मोला ,दीन दुखी के लाज बचाँव।
दर-दर भटके जे मनखे मन,ओला अपने घर मा लाँव।।

कहे इंदिरा गाँधी मोला,नारी होके देश चलाँव।
अतियाचारी ला नइ छोड़ँव,नारी मनके लाज बचाँव।।

सैनिक बनके सेवा करथौं,दुश्मन ला जी देथौं मार।
डर के भागे दुश्मन सुनले,अइसन रहिथे मोरे वार।।

महिला मनके शान हवँव मँय,जानौ अपने सब अधिकार।
बाँह अबड़ मँय ताकत रखथौं,धरथौं हाथे मा तलवार।।

नारी ला सम्मान दिलावौं,इही हवे मोरो आधार।
नारी के मँय मान बचाथौं,जिनगी के बस एके सार।।

जुरुम करे जे प्रानी सुनले,ओखर करथौं गा संहार।
धर-धरके मँय मार गिराथौं, करौं देश के मँय उद्धार।।

कोर कपट के भेद जानथौं,दुश्मन बर ठाढ़े हे कान।
चलै नही जे रद्दा सत के,जीवन नइ देवँव मँय दान।।

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