Sunday, 5 August 2018

शक्ति छंद ......छोड़ नशा

नशा गा सुनौ सब ,बड़ा नाश हे।
दरूहा  बने  हे, बने  लाश  हे।।
सबो भूल जावय,नशा डार के।
पिये मा  भुलाये,बिना  सार के।।

गिरे  राह  मा जी,नही  चेत हे।
मरे बर  सुनौ  गा,नशा लेत हे।।
मया छोड़ देवय, नशा मा पड़े।
घरो घर सबो झन,नशा बर लड़े।।

नही सोच पावय,कतक नाश गा।
सबो जान  उजरे,मिटे  आस गा।।
नरक  हो जथे  गा,नही  थाह  हे।
नशा  छोड़  देबे , इही  राह  हे।।

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