मान सुग्घर गोठ सबके,झूठ रद्दा छोड़
नेक भाखा राह चुनले,मान सबले जोड़
छोड़ ठेनी प्यार रखले ,नेक रद्दा जाव
प्रेम हिरदय भाव रखबे,होय मीठा भाव।।
नीक लागे राख आदत,गोठ अइसन बोल
भाव अइसे तोर रखबे,साज मीठा घोल
काल कब ले जाय संगी,कोन जाने राज
मान मनखे एक हावय,जान समता साज।
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