Sunday, 5 August 2018

गीतिका छंद...दानी बनके देखले

दीन मनके देख हालत,रोय दिन अउ रात गा
दुख दरद ला देख रहिथे,नइ गुनय सब बात गा।।
मान देखव रोज झेलय,देख लांघन सोय गा
का करय विपदा अबड़ हे,पेट पीरा होय गा।।

बोय खातिन खेत नइहे,दीन हर लाचार हे
जान नेता सोय हावय,देख नइ आधार हे।
देख आँसू थाम लव गा,दुख अबड़ हे जान ले
दीन मनके साथ देदव,शान ऐमा मान ले।।

जान चिरहा देह पहिरे,दिल अबड़ सुन रोय गा
नइ मिलय ता भात संगी,मान लाँघन सोय गा।
देख मिहनत राह धरथे,रोज पीरा झेल ले।
रोज रोजी मा कमाथे,पेट के सब खेल ले।।

सब मदत के राह धरवव,नेक रद्दा थाम ले
एक लइका ला पढ़ा दे,दिल डहर ले काम ले।
सुन बनय जी काज कखरो,नाम तोरे होय गा
भाग मनखे के बनादे,जाग काहे सोय गा।।

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