नव सिरजन ले हो उद्धार, इही लेखनी के हे आधार।
चलव आज ठानौ,बचे नीर गा। सबो दान करके ,हरव पीर गा।। करम नेक करबे,बचे जान जी। बचा नीर सुग्घर ,रहे शान जी।।
सुनौ नीर कतका,हमर काम के। सबो मोल जानव,नही दाम के।। धरौं ध्यान थोरे,बचत होय जी। सुनौ नीर बिन झन,कभू रोय जी।।
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