Sunday, 5 August 2018

ताटक छंद....नोनी के पीरा

लुटत हवे मोर मान हा दाई,रोवत मयँ हावौ दाई।
जगा जगा मा छुपे लुटेरा,कोन डहर हम गोहराई।।

मयँ नारी अवतार जनम के,पाप करे मयँ हा भारी।
बेटी ला सब छलत हवय गा,कतका हे अतियाचारी।।

बिलखत तड़पत जिनगी होगे,कोन कहे अवतारी हे।
सुग्गर कइसे जीयौ जिनगी,नारी के दुख भारी हे।।

रद्दा रेंगव कोन डहर मयँ,कति गोहार लगावौ गा।
जीना चाहौ नारी जीवन,दुख ला मयँ हा पावौ गा।।

कलयुग के मानव ला देखे,नाबालिग ला नोचे हे।
देख राक्षस बन बइठे हे,मान कोन मन सोचे हे।।

कहाँ गवांगे माँ के ममता,बेटी मया भुलागे गा।
पापी बनगे आज देखलौ,नारी आज लजागे गा।।

मोला कोख मा मार गिराबे,दुनिया मा नइ आना हे।
तड़प तड़प के नइ जीना हे,मोला मान बचाना हे।।

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