झाँसी के रानी के सुनलव,महिमा अड़बड़ हवय अपार।
झाँसी के रानी कहलाइस,दुश्मन के कर दिस संहार।।
सुनौ मराठा काल के रानी,उत्तर भारत के हे राज।
हिम्मत ला मरदानी कहिथे,गुन ओखर गावत हे आज।।
जनम लिये ओ वाराणसी म,बाबू मोरोपन्त कहाय।
सीख घुड़सवारी लक्ष्मी हा,पवन बरोबर वो उड़ जाय।।
गंगाधर ले बिहाव करके,बनगे रानी ओखर जान।
दामोदर ला जनम दिहिस जी,बनिस राज के ओहा शान।।
जुलुम करिन जब ब्रिटिश अबड़ गा,कतका हिम्मत ओखर मान।
एक-एक ला वो मार गिराइस,दुश्मन के वो लेवय जान।।
अपन पीठ मा बांधे लइका ,चढ़गे घोड़ा तान सवार।
मारिस सबला माछी मन कस,धरके हाथे मा तलवार।।
बचपन ले साहस ला राखिस,धरिस हाथ मा ओ तलवार।
आजादी बर साथ दिहिस गा,करिस जगत के ओ उद्धार।।
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